फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   नेपाल के रेत खनन से भारतीय क्षेत्र में कटान का खतरा बढ़ा

नेपाल के रेत खनन से भारतीय क्षेत्र में कटान का खतरा बढ़ा

Sat, 02 Jun 2018 06:40 PM IST
Updated Sat, 02 Jun 2018 06:40 PM IST
विज्ञापन
नेपाल के रेत खनन से भारतीय क्षेत्र में कटान का खतरा बढ़ा
लीड
विज्ञापन

02 पीबीटीपी 12
नेपाल के खनन से भारत में कटान का खतरा बढ़ा
नोमेंस लैंड के पास नेपाल करा रहा रेत का खनन
बाढ़ आई तो शारदा नदी के दाहिने किनारे पर भारी तबाही
जिम्मेदार सिंचाई विभाग को रेत खनन की भनक तक नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत/माधोटांडा।
नोमेंस लैंड के समीप नेपाल ने अपने क्षेत्र में मशीनों की मदद से तेजी से रेत खनन शुरू किया है। जानकारों की मानें तो नोमेंस लैंड के समीप यदि रेत के टीले को हटा दिया गया तो शारदा नदी की धार एक बार पुन: दाहिने किनारे की ओर भारतीय क्षेत्र में कोहराम मचा सकती है। बताते हैं कि नेपाल सरकार इस रेत का उपयोग बांध निर्माण में कर रही है। खास बात यह है कि सिंचाई विभाग को इसकी भनक तक नहीं है।
शारदा नदी व जगबूड़ा नदी का संगम नोमेंस लैंड पर होता है। ये दोनों नदियां मिलकर पिछले कई वर्षों से भारतीय क्षेत्र में दाहिने किनारे की ओर खासी तबाही मचाती रही हैं। तबाही से बचने को स्थानीय सिंचाई विभाग ने पिछले वर्षों में नौजल्हा क्षेत्र में नोमेंस लैंड से लेकर सनेड़ी तटबंध के पांच किलोमीटर तक जिओ टयूब का बांध बनाया था, साथ ही नोमेंस लैंड के नजदीकी इलाके में नदी के भीतरी हिस्से में एक बड़ी पत्थर की ठोकर भी बनाई थी। इसका नतीजा यह निकला कि जब तीन वर्ष पूर्व शारदा में बाढ़ आई तो दाहिने किनारे की ओर दोनों नदियां कटान नहीं कर सकीं। परिणामस्वरूप शारदा नदी ने नोमेंस लैंड के अपस्ट्रीम में नेपाली इलाके में रेत के ढेर टीले के रूप में छोड़ दिए थे। इसके बाद नदी भी बाएं किनारे की ओर बहने लगी थी। जिससे भूकटान का खतरा भी काफी कम हो गया था।
विज्ञापन

00
300 मीटर के दायरे में रेत खनन से बिगड़ सकते हैं हालात
इधर नेपाल सरकार ने नोमेंस लैंड के लगभग 300 मीटर नेपाली क्षेत्र में पोकलैंड मशीनों की मदद से उक्त रेत के टीलों से ही रेत खनन करना शुरू कर दिया है। यह रेत वाहनों के जरिए उठाकर कहीं ले जाई जा रही है। जानकारों की मानें तो यदि रेत के टीले से खनन यूं ही जारी रहा तो बाढ़ के दौरान शारदा व जगबूड़ा नदी एक बार पुन: दाहिने किनारे पर भारतीय क्षेत्र में भूकटान कर तबाही मचा सकती है। चर्चा तो यह है कि नेपाल सरकार अपने नेपाली क्षेत्र में एक बांध का निर्माण करा रही है, ताकि शारदा नदी का पानी नेपाल की ओर न आ सके, लेकिन यदि नोमेंस लैंड के समीप रेत के टीलों को हटाया गया तो भारतीय क्षेत्र में बाढ़ के समय स्थिति बिगड़ सकती है। खास बात यह है कि स्थानीय सिंचाई विभाग को इसकी भनक तक नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

00
सिंचाई विभाग ने सीमा पर भी निभाई महज औपचारिकताएं
गत वर्ष बाढ़ के समय इंडो-नेपाल सीमा पर भारतीय क्षेत्र में शारदा नदी के भीतरी हिस्से में बनी ठोकर का कुछ भाग क्षतिग्रस्त हो गया था। इसकी मरम्मत के नाम पर सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड ने मात्र औपचारिकताएं ही निभाईं। अपस्ट्रीम में नाममात्र को रेत के बोरे हौचपौच में भरवा दिए गए। वहीं नोमेंस लैंड से सटे इलाके में जियो ट्यूब से बने बांध का 300 मीटर हिस्सा भी अधूरा छोड़ दिया था। उसमें भी रेत से भरे बोरे लगवाकर उसके ऊपर से आरबीएम डलवा दिया गया। ऐसे में यह 300 मीटर का हिस्सा भी बाढ़ के समय मुसीबत का सबब बन सकता है।

00
वर्जन:
नौजल्हा नंबर दो कुतिया कवर में नोमेंस लैंड के सामने नदी द्वारा जो रेत के ढेर छोड़े गए थे, उसे नेपाल सरकार द्वारा हटवाने की जानकारी मिली है। अभियंताओं को भेजकर स्थिति की जानकारी की जा रही है। इससे उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया जा रहा है।
डीएन शुक्ला, एसडीओ, बाढ़ खंड
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed