{"_id":"59fdb9024f1c1bd9538bae94","slug":"201509800194-pilibhit-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, सूर्य को दिया अर्घ्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, सूर्य को दिया अर्घ्य
Updated Sat, 04 Nov 2017 10:46 PM IST
विज्ञापन
गंगा स्नान
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पीलीभीत। कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर देवहा, गोमती, अप्सरा, शारदा आदि नदियों के घाटों पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया। नदी तटों पर लगे मेलों में श्रद्धालुओं ने खिचड़ी भोज के भंडारे आयोजित किए।
शनिवार को गंगा स्नान के लिए भोर के तीन बजे से ही श्रद्धालु देवहा के ब्रह्मचारी घाट, खकरा नदी और जहानाबाद क्षेत्र के अप्सरा नदी एवं चक्रतीर्थ पर इकट्ठे होना शुरू हो गए। श्रद्धालुओं ने देवहा नदी में स्नान करने के बाद ब्रह्मचारी घाट पर स्थित मनकामेश्वर नाथ मंदिर में पूजा अर्चना की और भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर मनौतियां मांगीं। इस मौके पर महिलाओं घाट पर विधि विधान से पूजा कर प्रसाद बांटा। सत्यनारायण की कथा सुन दान-पुण्य किया। गंगा स्नान के लिए नदियों के घाटों पर बच्चों और महिलाओं के साथ बड़ी संख्या में वृद्धजन भी स्नान दान को पहुंचे। शहर विधायक संजय गंगवार ने भी परिवार के साथ ब्रह्मचारी घाट पहुंचकर खिचड़ी वितरण किया।
बीसलपुर। श्रद्धालुओं ने देवहा, कटना, माला, अमेड़ी, रपटुआ व खन्नौत नदी के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाई। इन घाटों पर मेले भी लगे। लोग डनलप, बस एवं निजी वाहनों से सवार होकर इन घाटों पर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने स्नान करने के बाद पूजा अर्चना की।
विज्ञापन
दियोरिया। माला नदी के बुहिता घाट पर श्रद्धालुओं ने स्नान किया। इस घाट पर मेला भी लगा, जहां पूरे दिन चहल पहल रही।
बिलसंडा। गंगा स्नान के उपलक्ष्य पर गंाव लिलहर मेें मेले का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने सरोवर में डुबकी लगाकर भगवान सूर्य को जल अर्पित किया और भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
पूरनपुर। कार्तिक पूर्णिमा पर लोगों ने व्रत रखकर घरों में पूजा अर्चना की। शारदा नदी के धनाराघाट, गोमती नदी के उद्गम स्थल पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ रही। नदी घाटों पर मेला भी लगा। कुछ घरों में कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी की पूजा हुई।
हजारा। शारदा नदी के नहरोसा, राणा प्रतापनगर, अशोकनगर पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर दान पुण्य किया। सुबह से ही नदी घाटों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। नदी के घाटों पर मेले भी लगे।
माधोटांडा।गोमती उद्गम स्थल पर विशाल मेला लगा। श्रद्धालुओं ने गोमती में डुबकी लगाने के साथ गोमती तट पर प्रसिद्ध बाबा दुर्गानाथ के मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रसाद चढ़ाया। कई लोगों की तरफ से भंडारे का भी आयोजन किया गया। गोमती उद्गम स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। यहां विशाल मेला भी लगा। जहां दर्जनों गांव के लोग ट्रैक्टर-ट्रालियों व अन्य निजी वाहनों से पहुंचे। श्रद्धालुओं ने दीप जलाए और बाबा दुर्गानाथ के मंदिर पर पूजा अर्चना करने के साथ प्रसाद चढ़ाया। इस मौके पर कई लोगों द्वारा विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। दूर-दूर तक दुकानदारों व श्रद्धालुओं का बच्चों के साथ खरीदारी का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा।
00000
दो बार टूटा अस्थाई पुल
श्रद्धालुओं को देवहा नदी के दूसरे तट पर पहुंचने के लिए प्रति वर्ष लकड़ी का अस्थाई पुल बनाया जाता है। इस पुल से दूसरी ओर जाने को बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पर पहुंच गए। इससे पुल दो बार टूटा लेकिन मरम्मत के बाद इसे फिर चालू कर दिया गया। दरअसल नदी में काफी कम पानी होने और पुल की ऊंचाई अधिक न होने के कारण किसी को चोट नहीं आई लेकिन दोनों बार कुछ देर तक अफरा तफरी मची रही। वहीं कई श्रद्धालुओं ने नदी पार होने को डनलपों का सहारा लिया।
---------
शनिवार को गंगा स्नान के लिए भोर के तीन बजे से ही श्रद्धालु देवहा के ब्रह्मचारी घाट, खकरा नदी और जहानाबाद क्षेत्र के अप्सरा नदी एवं चक्रतीर्थ पर इकट्ठे होना शुरू हो गए। श्रद्धालुओं ने देवहा नदी में स्नान करने के बाद ब्रह्मचारी घाट पर स्थित मनकामेश्वर नाथ मंदिर में पूजा अर्चना की और भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर मनौतियां मांगीं। इस मौके पर महिलाओं घाट पर विधि विधान से पूजा कर प्रसाद बांटा। सत्यनारायण की कथा सुन दान-पुण्य किया। गंगा स्नान के लिए नदियों के घाटों पर बच्चों और महिलाओं के साथ बड़ी संख्या में वृद्धजन भी स्नान दान को पहुंचे। शहर विधायक संजय गंगवार ने भी परिवार के साथ ब्रह्मचारी घाट पहुंचकर खिचड़ी वितरण किया।
विज्ञापन
बीसलपुर। श्रद्धालुओं ने देवहा, कटना, माला, अमेड़ी, रपटुआ व खन्नौत नदी के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाई। इन घाटों पर मेले भी लगे। लोग डनलप, बस एवं निजी वाहनों से सवार होकर इन घाटों पर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने स्नान करने के बाद पूजा अर्चना की।
विज्ञापन
दियोरिया। माला नदी के बुहिता घाट पर श्रद्धालुओं ने स्नान किया। इस घाट पर मेला भी लगा, जहां पूरे दिन चहल पहल रही।
बिलसंडा। गंगा स्नान के उपलक्ष्य पर गंाव लिलहर मेें मेले का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने सरोवर में डुबकी लगाकर भगवान सूर्य को जल अर्पित किया और भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
पूरनपुर। कार्तिक पूर्णिमा पर लोगों ने व्रत रखकर घरों में पूजा अर्चना की। शारदा नदी के धनाराघाट, गोमती नदी के उद्गम स्थल पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ रही। नदी घाटों पर मेला भी लगा। कुछ घरों में कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी की पूजा हुई।
हजारा। शारदा नदी के नहरोसा, राणा प्रतापनगर, अशोकनगर पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर दान पुण्य किया। सुबह से ही नदी घाटों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। नदी के घाटों पर मेले भी लगे।
माधोटांडा।गोमती उद्गम स्थल पर विशाल मेला लगा। श्रद्धालुओं ने गोमती में डुबकी लगाने के साथ गोमती तट पर प्रसिद्ध बाबा दुर्गानाथ के मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रसाद चढ़ाया। कई लोगों की तरफ से भंडारे का भी आयोजन किया गया। गोमती उद्गम स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। यहां विशाल मेला भी लगा। जहां दर्जनों गांव के लोग ट्रैक्टर-ट्रालियों व अन्य निजी वाहनों से पहुंचे। श्रद्धालुओं ने दीप जलाए और बाबा दुर्गानाथ के मंदिर पर पूजा अर्चना करने के साथ प्रसाद चढ़ाया। इस मौके पर कई लोगों द्वारा विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया। दूर-दूर तक दुकानदारों व श्रद्धालुओं का बच्चों के साथ खरीदारी का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा।
00000
दो बार टूटा अस्थाई पुल
श्रद्धालुओं को देवहा नदी के दूसरे तट पर पहुंचने के लिए प्रति वर्ष लकड़ी का अस्थाई पुल बनाया जाता है। इस पुल से दूसरी ओर जाने को बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस पर पहुंच गए। इससे पुल दो बार टूटा लेकिन मरम्मत के बाद इसे फिर चालू कर दिया गया। दरअसल नदी में काफी कम पानी होने और पुल की ऊंचाई अधिक न होने के कारण किसी को चोट नहीं आई लेकिन दोनों बार कुछ देर तक अफरा तफरी मची रही। वहीं कई श्रद्धालुओं ने नदी पार होने को डनलपों का सहारा लिया।
---------