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कैसे मिले लाभ, 20 लाख की आबादी में सिर्फ दो आयुष्मान मित्र
Mon, 31 Dec 2018 08:55 PM IST
zaidi saba
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
Published by: zaidi saba
Updated Mon, 31 Dec 2018 08:55 PM IST
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ब्लॉक स्तर पर नहीं कोई सुविधा, मरीजों को भटकना पड़ रहा
लाभार्थी मुख्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर
पीलीभीत। गरीबों को पांच लाख रुपये तक नि:शुल्क इलाज मुहैया कराने के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की लापरवाही के कारण जिले में बदहाल है। योजना का लाभ लेने के लिए मरीजों को भटकना पड़ रहा है। हो भी क्यों न, यहां करीब 20 लाख की आबादी में सिर्फ दो आयुष्मान मित्र हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लाभार्थियों को इस योजना की जानकारी मिल सके इसको लेकर कोई ठोस रणनीति अब तक नहीं बनाई गई है। ब्लॉक स्तर के एक भी स्वास्थ्य केंद्र पर आयुष्मान मित्र तैनात नहीं किए गए हैं। ऐसे में अभी शत-प्रतिशत लोगों को गोल्डन कार्ड भी जारी नहीं हो सके हैं। गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए लोगों को अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कहीं उनका सूची में नाम गायब रहता है तो कहीं उनको प्रधानमंत्री की चिट्ठी नहीं मिलती।
बता दें जिले में 23 सितंबर 2018 को केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना शुरुआत हुई थी। इस दौरान गांधी प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने पांच लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड वितरित किए थे। इसके बाद योजना के तहत जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं। अब तक करीब चार सौ गोल्डन कार्ड लाभार्थियों को जारी हो चुके हैं। खास बात यह है कि आयुष्मान मित्रों को गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए कार्यालय खुलवाकर बैठा तो दिया गया लेकिन इनका वास्तविक काम मरीजों को खोजकर अस्पताल में इलाज कराना है। लेकिन आयुष्मान मित्रों की तैनाती नहीं होने के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। अभी तक जिले के करीब 100 मरीज योजना के तहत इलाज करा चुके हैं। जिसमें हड्डी, पथरी आदि के ऑपरेशन हुए हैं। शनिवार को जिला अस्पताल में खुले आयुष्मान केंद्र पर लोगों की खासा भीड़ रही। समस्या का समाधान नहीं होने पर लाभार्थियों को लौटना पड़ा। पेश है लाइव रिपोर्ट
नहीं बना काम
गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए चक्कर लगाने पड़े रहे हैं। सोमवार सुबह समय से आने के बाद भी काम नहीं बना। अभी तक कार्ड नहीं बन पाया है। ऐसे तो सरकार की योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। - नियाज बानो, भूरे खां
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योजना के साथ व्यवस्था भी जरूरी
सरकार ने योजना तो शुुरू कर दी लेकिन व्यवस्थाएं पूरी नहीं की है। कार्ड बनवाने के लिए परेशान होना पड़ता है। गरीबों को यह सुविधा ब्लाक स्तर पर भी नि:शुल्क मिलनी चाहिए। - माया, पीलीभीत
लाभार्थियों के हिसाब से मिले काम
भीड़ के हिसाब से कम से कम दो आयुष्मान मित्रों की एक केंद्र पर तैनाती होनी चाहिए। दो घंटे खड़े होने के बाद भी नंबर कब आए कुछ पता नहीं। - बाबूराम, बख्सपुर मोहल्ला
नहीं हो सका समाधान
प्रधानमंत्री की चिट्ठी में नाम गलत होने की वजह से एक बार लौटना पड़ा था। सुबह नौ बजे फिर आयुष्मान केंद्र पहुंचे उसके बाद भी समस्या का निदान नहीं होने पर निराश होकर लौटना पड़ा।
- मोहम्मद सलीम, नौगवा पकड़िया
बोलीं सीएमओ
फिलहाल जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में एक-एक आयुष्मान मित्र तैनात किए गए हैं। वह आयुष्मान कार्यालय पहुंचने वालों की हर समस्या का निदान कर रहे हैं। ब्लाक स्तर पर भी जल्द आयुष्मान मित्रों की तैनाती होगी। ताकि लाभार्थियों को मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़े। प्रधानमंत्री की चिट्ठी लेकर पहुंचने वाले लाभार्थियों के प्राथमिकता के साथ गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं।
- डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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लाभार्थी मुख्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर
पीलीभीत। गरीबों को पांच लाख रुपये तक नि:शुल्क इलाज मुहैया कराने के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की लापरवाही के कारण जिले में बदहाल है। योजना का लाभ लेने के लिए मरीजों को भटकना पड़ रहा है। हो भी क्यों न, यहां करीब 20 लाख की आबादी में सिर्फ दो आयुष्मान मित्र हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लाभार्थियों को इस योजना की जानकारी मिल सके इसको लेकर कोई ठोस रणनीति अब तक नहीं बनाई गई है। ब्लॉक स्तर के एक भी स्वास्थ्य केंद्र पर आयुष्मान मित्र तैनात नहीं किए गए हैं। ऐसे में अभी शत-प्रतिशत लोगों को गोल्डन कार्ड भी जारी नहीं हो सके हैं। गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए लोगों को अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कहीं उनका सूची में नाम गायब रहता है तो कहीं उनको प्रधानमंत्री की चिट्ठी नहीं मिलती।
बता दें जिले में 23 सितंबर 2018 को केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना शुरुआत हुई थी। इस दौरान गांधी प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने पांच लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड वितरित किए थे। इसके बाद योजना के तहत जिला अस्पताल व महिला अस्पताल में गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं। अब तक करीब चार सौ गोल्डन कार्ड लाभार्थियों को जारी हो चुके हैं। खास बात यह है कि आयुष्मान मित्रों को गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए कार्यालय खुलवाकर बैठा तो दिया गया लेकिन इनका वास्तविक काम मरीजों को खोजकर अस्पताल में इलाज कराना है। लेकिन आयुष्मान मित्रों की तैनाती नहीं होने के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। अभी तक जिले के करीब 100 मरीज योजना के तहत इलाज करा चुके हैं। जिसमें हड्डी, पथरी आदि के ऑपरेशन हुए हैं। शनिवार को जिला अस्पताल में खुले आयुष्मान केंद्र पर लोगों की खासा भीड़ रही। समस्या का समाधान नहीं होने पर लाभार्थियों को लौटना पड़ा। पेश है लाइव रिपोर्ट
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नहीं बना काम
गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए चक्कर लगाने पड़े रहे हैं। सोमवार सुबह समय से आने के बाद भी काम नहीं बना। अभी तक कार्ड नहीं बन पाया है। ऐसे तो सरकार की योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। - नियाज बानो, भूरे खां
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योजना के साथ व्यवस्था भी जरूरी
सरकार ने योजना तो शुुरू कर दी लेकिन व्यवस्थाएं पूरी नहीं की है। कार्ड बनवाने के लिए परेशान होना पड़ता है। गरीबों को यह सुविधा ब्लाक स्तर पर भी नि:शुल्क मिलनी चाहिए। - माया, पीलीभीत
लाभार्थियों के हिसाब से मिले काम
भीड़ के हिसाब से कम से कम दो आयुष्मान मित्रों की एक केंद्र पर तैनाती होनी चाहिए। दो घंटे खड़े होने के बाद भी नंबर कब आए कुछ पता नहीं। - बाबूराम, बख्सपुर मोहल्ला
नहीं हो सका समाधान
प्रधानमंत्री की चिट्ठी में नाम गलत होने की वजह से एक बार लौटना पड़ा था। सुबह नौ बजे फिर आयुष्मान केंद्र पहुंचे उसके बाद भी समस्या का निदान नहीं होने पर निराश होकर लौटना पड़ा।
- मोहम्मद सलीम, नौगवा पकड़िया
बोलीं सीएमओ
फिलहाल जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में एक-एक आयुष्मान मित्र तैनात किए गए हैं। वह आयुष्मान कार्यालय पहुंचने वालों की हर समस्या का निदान कर रहे हैं। ब्लाक स्तर पर भी जल्द आयुष्मान मित्रों की तैनाती होगी। ताकि लाभार्थियों को मुख्यालय के चक्कर न लगाने पड़े। प्रधानमंत्री की चिट्ठी लेकर पहुंचने वाले लाभार्थियों के प्राथमिकता के साथ गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं।
- डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ