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...कहीं वन महकमे ने अतिक्रमणकारियों से हारकर तो नहीं बदला इरादा
Updated Fri, 24 Nov 2017 12:20 AM IST
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टाइगर रिजर्व की सुरक्षा
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टाइगर रिजर्व में रेस्क्यू सेंटर खोलने का मामला
टाइगर रिजर्व के अफसरों ने अब रेस्क्यू सेंटर को बरुआ कुठारा की जगह माला रेंज में खोलने का फैसला लिया है। कयास यह लगाए जा रहे हैं कि कहीं वन महकमा वन भूमि के अतिक्रमणकारियों के सामने बौना तो नहीं साबित हो रहा है। जिसके चलते ही उन्हें रेस्क्यू सेंटर खोलने का इरादा बदलना पड़ा। जबकी बराही व महोफ के जंगल बाघों के रहन-सहन एवं जलवायु के लिहाज से खासे उपयुक्त माने जाते रहे हैं।
टाइगर रिजर्व रेस्क्यू सेंटर को दस हेक्टेयर क्षेत्रफल में बनाया जाना है। इसके लिए प्रथम चरण में साढ़े तीन करोड़ रुपये की डिमांड भी शासन को भेजी गई। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी जनपद भ्रमण के दौरान टाइगर रिजर्व का दौराकर इसका प्रस्ताव शीघ्र भेजने के निर्देश दे गए थे। इधर, अब टाइगर रिजर्व के आला अधिकारी रेस्क्यू सेंटर बराही के बरुआ कुठारा क्षेत्र के बजाए माला रेंज के इलाके में खोलने की तैयारी कर रहे हैं। बरुआ कुठारा क्षेत्र में लंबे समय से अतिक्रमणकारियो का अवैध कब्जा है। जिससे आज तक वन महकमा प्रशासन की मदद से भी खाली नहीं करा सका। हालांकि रेस्क्यू सेंटर मात्र दस हेक्टेयर में बनाए जाने की योजना है, जबकि वन विभाग के पास यहां काफी उपयुक्त जंगल व जमीन है, लेकिन माना जा रहा है कि अतिक्रमणकारियों के आगे वन महकमा बौना साबित हो रहा है। इसी कारण बरुआ कुठारा के बजाए अब माला जंगल में रेस्क्यू सेंटर बनाने की योजना बनाई जा रही है। वन विभाग के जिम्मेदार सूत्र बताते हैं कि टाइगर रिजर्व के अधिकारी जल्द से जल्द यहां प्रोजेक्ट लागू कराना चाहते हैं और जहां-जहां वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने के प्रयास हुए, वहां पुलिस व राजस्व विभाग साथ तो रहा, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। चाहे नौजल्हा का मामला हो या फिर राजपुर ताल्लुके महाराजपुर या बरुआ कुठारा, इन जगहों पर हुई कार्रवाई में अवैध कब्जेदारों के साथ वन कर्मी भी घायल हुए, मुकदमेबाजी भी हुई, लेकिन पुलिस महकमा बाद में कोई कार्रवाई नहीं कर सका। इधर रेस्क्यू सेंटर खोले जाने के बारे में बराही रेंजर अनिल शाह कहते हैं कि रेस्क्यू सेंटर के मामले में आला अफसर जो निर्णय लेंगे, सेंटर वही खोला जाएगा। हालांकि अभी इस मामले की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
टाइगर रिजर्व को विकसित करने के लिए लिया निर्णय...
टाइगर रिजर्व को विकसित करने व आबादी क्षेत्र में बढ़ रहे बाघों के हमलों के चलते ऐसे बाघों को पकड़कर नजदीकी क्षेत्र में ही सुरक्षित छोड़ने सहित कई कारणों को ध्यान में रखते हुए टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के बरुआ कुठारा क्षेत्र में टाइगर सफारी का निर्णय लिया गया था। इसके लिए भूमि का चयन करने के साथ वन विभाग के आला अफसरों ने भी स्थलीय दौराकर इसे उपयुक्त मानते हुए प्रस्ताव भेजा था। बताते हैं कि कुछ तकनीकी कारणों के चलते सीधे टाइगर सफारी का प्रावधान नहीं है और उसमें प्रदेश से लेकर केंद्र तक कई विभागों से अनुमति लेनी पड़ती है। इस कारण प्रदेश के आला अफसरों ने प्रथम चरण में रेस्क्यू सेंटर खोलने का निर्णय लिया था। वजह यह रही है कि जनपद में जंगलों से निकले बाघों के हमले मैदानी क्षेत्र में काफी बढ़ गए। अब तक 19 लोग बाघों का शिकार हो चुके हैं।
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टाइगर रिजर्व के अफसरों ने अब रेस्क्यू सेंटर को बरुआ कुठारा की जगह माला रेंज में खोलने का फैसला लिया है। कयास यह लगाए जा रहे हैं कि कहीं वन महकमा वन भूमि के अतिक्रमणकारियों के सामने बौना तो नहीं साबित हो रहा है। जिसके चलते ही उन्हें रेस्क्यू सेंटर खोलने का इरादा बदलना पड़ा। जबकी बराही व महोफ के जंगल बाघों के रहन-सहन एवं जलवायु के लिहाज से खासे उपयुक्त माने जाते रहे हैं।
टाइगर रिजर्व रेस्क्यू सेंटर को दस हेक्टेयर क्षेत्रफल में बनाया जाना है। इसके लिए प्रथम चरण में साढ़े तीन करोड़ रुपये की डिमांड भी शासन को भेजी गई। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी जनपद भ्रमण के दौरान टाइगर रिजर्व का दौराकर इसका प्रस्ताव शीघ्र भेजने के निर्देश दे गए थे। इधर, अब टाइगर रिजर्व के आला अधिकारी रेस्क्यू सेंटर बराही के बरुआ कुठारा क्षेत्र के बजाए माला रेंज के इलाके में खोलने की तैयारी कर रहे हैं। बरुआ कुठारा क्षेत्र में लंबे समय से अतिक्रमणकारियो का अवैध कब्जा है। जिससे आज तक वन महकमा प्रशासन की मदद से भी खाली नहीं करा सका। हालांकि रेस्क्यू सेंटर मात्र दस हेक्टेयर में बनाए जाने की योजना है, जबकि वन विभाग के पास यहां काफी उपयुक्त जंगल व जमीन है, लेकिन माना जा रहा है कि अतिक्रमणकारियों के आगे वन महकमा बौना साबित हो रहा है। इसी कारण बरुआ कुठारा के बजाए अब माला जंगल में रेस्क्यू सेंटर बनाने की योजना बनाई जा रही है। वन विभाग के जिम्मेदार सूत्र बताते हैं कि टाइगर रिजर्व के अधिकारी जल्द से जल्द यहां प्रोजेक्ट लागू कराना चाहते हैं और जहां-जहां वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने के प्रयास हुए, वहां पुलिस व राजस्व विभाग साथ तो रहा, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। चाहे नौजल्हा का मामला हो या फिर राजपुर ताल्लुके महाराजपुर या बरुआ कुठारा, इन जगहों पर हुई कार्रवाई में अवैध कब्जेदारों के साथ वन कर्मी भी घायल हुए, मुकदमेबाजी भी हुई, लेकिन पुलिस महकमा बाद में कोई कार्रवाई नहीं कर सका। इधर रेस्क्यू सेंटर खोले जाने के बारे में बराही रेंजर अनिल शाह कहते हैं कि रेस्क्यू सेंटर के मामले में आला अफसर जो निर्णय लेंगे, सेंटर वही खोला जाएगा। हालांकि अभी इस मामले की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
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टाइगर रिजर्व को विकसित करने के लिए लिया निर्णय...
टाइगर रिजर्व को विकसित करने व आबादी क्षेत्र में बढ़ रहे बाघों के हमलों के चलते ऐसे बाघों को पकड़कर नजदीकी क्षेत्र में ही सुरक्षित छोड़ने सहित कई कारणों को ध्यान में रखते हुए टाइगर रिजर्व की बराही रेंज के बरुआ कुठारा क्षेत्र में टाइगर सफारी का निर्णय लिया गया था। इसके लिए भूमि का चयन करने के साथ वन विभाग के आला अफसरों ने भी स्थलीय दौराकर इसे उपयुक्त मानते हुए प्रस्ताव भेजा था। बताते हैं कि कुछ तकनीकी कारणों के चलते सीधे टाइगर सफारी का प्रावधान नहीं है और उसमें प्रदेश से लेकर केंद्र तक कई विभागों से अनुमति लेनी पड़ती है। इस कारण प्रदेश के आला अफसरों ने प्रथम चरण में रेस्क्यू सेंटर खोलने का निर्णय लिया था। वजह यह रही है कि जनपद में जंगलों से निकले बाघों के हमले मैदानी क्षेत्र में काफी बढ़ गए। अब तक 19 लोग बाघों का शिकार हो चुके हैं।
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