फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   चार माह में 8 लाख खर्च, किसान फिर भी अनजान

चार माह में 8 लाख खर्च, किसान फिर भी अनजान

Sat, 05 Aug 2017 07:00 PM IST
Updated Sat, 05 Aug 2017 07:00 PM IST
विज्ञापन
चार माह में 8 लाख खर्च, किसान फिर भी अनजान
पीलीभीत। किसानों को प्रशिक्षण देने एवं आधुनिक तकनीक की जानकारी देने के लिए कृषि विभाग की ओर से समय समय पर मेला एवं गोष्ठियों का आयोजन किया जाता है। जिले में इस वित्तीय वर्ष के चार माह में 14 गोष्ठियां एवं एक मेले का आयोजन कर लगभग आठ लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं लेकिन किसानों को इसका लाभ नहीं मिला है। अधिकांश किसान आज भी विभागीय योजनाओं से अनभिज्ञ हैं।
विज्ञापन

केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दो गुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत कृषि के विकास एवं इसकी योजनाओं के प्रचार प्रसार भी भारी भरकम बजट भी खर्च किया जा रहा है। समय समय पर रबी, खरीफ और जायद के साथ दलहन तिलहन गोष्ठियां की जाती हैं साथ ही कृषि मेलों का आयोजन किया जाता है। किसानों को आधुनिक खेती एवं विभागीय योजनाओं की जानकारी देने के लिए आयोजित इन गोष्ठी व मेलों के लिए बजट भी उपलब्ध कराया जाता है लेकिन प्रचार प्रसार न हो एवं जागरूकता की कमी के कारण किसानों को इसका लाभ नहीं मिलता। गोष्ठियों व मेले में प्राय: कुछ ऐसे कृषक ही बार बार देखने को मिलते हैं जो जागरूक हैं एवं उन्नत खेती कर रहे हैं। आम किसान इन कार्यक्रमों से दूर रहता है। चालू वित्तीय वर्ष में अप्रैल से जुलाई तक 14 गोष्ठियां एवं एक बड़े मेले का आयोजन किया जा चुका है। इन पर छह लाख से अधिक की धनराशि खर्च होना दर्शायी गई है।
विज्ञापन

00000
स्टाल व प्रदर्शनी तक सीमिति हैं मेले
किसानों को योजनाओं व आधुनिक तकनीक की जानकारी देने के लिए आयोजित होने वाले कृषि मेलों में कृषि से जुड़े विभिन्न विभागों एवं खाद, रसायन एवं कृषि यंत्र बेचने वाली कंपनियों के स्टाल लगाए जाते हैं। उद्घाटन के समय निरीक्षण होने के बाद इनमें से अधिकांश सूने पड़े रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

000000000
गिने चुने स्थानीय कृषि वैज्ञानिक ही देते है सलाह
किसानों को उन्नत तकनीकि, बीज की प्रजाति एवं अनुसंधान आदि की जानकारी देने के लिए जिले में कृषि विज्ञान केंद्र के गिने चुने चंद वैज्ञानिक की मौजूद हैं। हर गोष्ठी, मेला या कार्यशाला में इन्हीं को बुलाया जाता है इसके अलावा अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि अपने भाषण देकर चलते बनते है। बड़े विश्वविद्यालयों अथवा शोध संस्थानों से वैज्ञानिकों को भी बुलाया जाना चाहिए।

000000000
कृषि के प्रचार प्रसार के समय गोष्ठी एवं मेलों का आयोजन किया जाता है। इस बार मंडल स्तरीय मेले का आयोजन किया गया था जो काफी सफल रहा। लक्ष्य से ज्यादा किसानों ने इसमें प्रतिभाग किया था। जिले में गोष्ठियों एवं मेलों का लाभ किसानों को मिल रहा है।
- डीबी सिंह, उपकृषि निदेशक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed