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मुख्यमंत्री जी ! योजनाएं तो मंजूर कर दीं, अब बजट भी दे दीजिए
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पीलीभीत। योगी सरकार ने शारदा नदी से होने वाले कटान को रोकने के लिए बाढ़ नियंत्रण योजनाएं तो मंजूर कर दी हैं , लेकिन बजट का अब तक पता नहीं है। समय से बजट न मिला तो आने वाले मानसून में शारदा नदी एक बार फिर भारी तबाही मचा सकती है। इधर, बाढ़ खंड ने बाढ़ प्रभावित रमनगरा भुजिया में होने वाले कार्यों का स्थान बदलकर दूसरी जगह कार्य शुरू कराए हैं। इससे रमनगरा बुझिया पर एक बार फिर से संकट के बादल मंडरा सकते हैं।
शारदा नदी ने गत वर्ष बाढ़ के दौरान शारदा सागर डैम के सामने सहित रमनगरा भुजिया इलाके में कटान किया था। इससे सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि कटने के साथ-साथ मार्जनल बांध और बरसों पुरानी ठोकरें भी क्षतिग्रस्त हो गईं थीं। हालांकि उस दौरान रमनगरा भुजिया में कटान रोकने को 11 कटर के निर्माण को मंजूरी मिली थी। एक कटर का प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा था कि इस बीच शारदा नदी का जलस्तर बढ़ गया और फिर निर्माणकार्य अगले वर्ष के लिए रोक दिया गया था।
नए स्थान पर शुरू किए कार्य, पुराने को छोड़ दिया
इधर, जब गत वर्ष रमनगरा भुजिया में शारदा ने दाहिने किनारे पर, जहां 11 कटर बनने थे, उसके अपस्ट्रीम में बनी पत्थर की ठोकरों को क्षतिग्रस्त करना शुरू कर दिया था। करोड़ों की ठोकरों को क्षतिग्रस्त होता देख अभियंता पूरे बरसात भर बैंबू कटर लगाकर उन्हें बचाने में लगे रहे, लेकिन ठोकरों को क्षतिग्रस्त होने से नहीं बचा सके। माना जा रहा था कि बरसात बाद बड़ा प्रोजेक्ट बनाकर यहां बाढ़ नियंत्रण कार्य होंगे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इधर बाढ़ खंड ने गत वर्ष कटर निर्माण को चिह्नित किए गए कार्यस्थल को छोड़कर पूर्व में क्षतिग्रस्त हुई ठोकरों के समीप बचाव कार्य कराना शुरू किया है। जानकारों के मुताबिक, यदि सिंचाई विभाग ने छोड़े गए स्थान पर बचाव कार्य नहीं करवाए तो पुराने के साथ-साथ नए कार्य भी नदी की भेंट चढ़ सकते हैं।
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11 करोड़ का प्रोजेक्ट स्वीकृत, बजट अब तक नहीं
शारदा नदी ने गत वर्ष शारदा सागर डैम के सामने रमनगरा से लेकर ढकिया ताल्लुके महाराजपुर क्षेत्र तक ठोकर पांच से लेकर 21 तक दाहिने किनारे पर नदी ने खासा नुकसान पहुंचाया था। यहां अभियंताओं को नदी का किनारा शारदा डैम के करीब होने के चलते टेंपरेरी बाढ़ नियंत्रण कार्य कराने पड़े थे। इस स्थान पर कटान को रोकने को सिंचाई विभाग ने 11 करोड़ का एक प्रोजेक्ट बनाकर भेजा था। जिसे मंजूरी तो मिल गई, लेकिन अभी तक बजट आवंटित नहीं हो सका। बाढ़ खंड के अभियंता बजट को लेकर लखनऊ दौड़ भाग करने में जुटे हैं। यदि समय से बजट मिल गया तो यहां कुछ हद तक स्थायी बचाव कार्य कराए जा सकते हैं, लेकिन बजट आवंटन में देरी की गई तो आने वाले बरसात में इस क्षेत्र में भारी तबाही होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सका है। मार्जनल बांध भी नदी की भेंट चढ़ सकता है।
शारदा नदी पर रमनगरा भुजिया क्षेत्र में बचाव कार्य तेजी से शुरू करा दिए गए हैं। रमनगरा क्षेत्र में 11 करोड़ की लागत से परियोजना मंजूर कराई गई है, लेकिन अभी बजट नहीं मिला है। बजट मिलते ही वहां पर भी बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू करा दिए जाएंगे। - ध्रुव नारायण शुक्ला, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड
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शारदा नदी ने गत वर्ष बाढ़ के दौरान शारदा सागर डैम के सामने सहित रमनगरा भुजिया इलाके में कटान किया था। इससे सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि कटने के साथ-साथ मार्जनल बांध और बरसों पुरानी ठोकरें भी क्षतिग्रस्त हो गईं थीं। हालांकि उस दौरान रमनगरा भुजिया में कटान रोकने को 11 कटर के निर्माण को मंजूरी मिली थी। एक कटर का प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा था कि इस बीच शारदा नदी का जलस्तर बढ़ गया और फिर निर्माणकार्य अगले वर्ष के लिए रोक दिया गया था।
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नए स्थान पर शुरू किए कार्य, पुराने को छोड़ दिया
इधर, जब गत वर्ष रमनगरा भुजिया में शारदा ने दाहिने किनारे पर, जहां 11 कटर बनने थे, उसके अपस्ट्रीम में बनी पत्थर की ठोकरों को क्षतिग्रस्त करना शुरू कर दिया था। करोड़ों की ठोकरों को क्षतिग्रस्त होता देख अभियंता पूरे बरसात भर बैंबू कटर लगाकर उन्हें बचाने में लगे रहे, लेकिन ठोकरों को क्षतिग्रस्त होने से नहीं बचा सके। माना जा रहा था कि बरसात बाद बड़ा प्रोजेक्ट बनाकर यहां बाढ़ नियंत्रण कार्य होंगे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इधर बाढ़ खंड ने गत वर्ष कटर निर्माण को चिह्नित किए गए कार्यस्थल को छोड़कर पूर्व में क्षतिग्रस्त हुई ठोकरों के समीप बचाव कार्य कराना शुरू किया है। जानकारों के मुताबिक, यदि सिंचाई विभाग ने छोड़े गए स्थान पर बचाव कार्य नहीं करवाए तो पुराने के साथ-साथ नए कार्य भी नदी की भेंट चढ़ सकते हैं।
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11 करोड़ का प्रोजेक्ट स्वीकृत, बजट अब तक नहीं
शारदा नदी ने गत वर्ष शारदा सागर डैम के सामने रमनगरा से लेकर ढकिया ताल्लुके महाराजपुर क्षेत्र तक ठोकर पांच से लेकर 21 तक दाहिने किनारे पर नदी ने खासा नुकसान पहुंचाया था। यहां अभियंताओं को नदी का किनारा शारदा डैम के करीब होने के चलते टेंपरेरी बाढ़ नियंत्रण कार्य कराने पड़े थे। इस स्थान पर कटान को रोकने को सिंचाई विभाग ने 11 करोड़ का एक प्रोजेक्ट बनाकर भेजा था। जिसे मंजूरी तो मिल गई, लेकिन अभी तक बजट आवंटित नहीं हो सका। बाढ़ खंड के अभियंता बजट को लेकर लखनऊ दौड़ भाग करने में जुटे हैं। यदि समय से बजट मिल गया तो यहां कुछ हद तक स्थायी बचाव कार्य कराए जा सकते हैं, लेकिन बजट आवंटन में देरी की गई तो आने वाले बरसात में इस क्षेत्र में भारी तबाही होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सका है। मार्जनल बांध भी नदी की भेंट चढ़ सकता है।
शारदा नदी पर रमनगरा भुजिया क्षेत्र में बचाव कार्य तेजी से शुरू करा दिए गए हैं। रमनगरा क्षेत्र में 11 करोड़ की लागत से परियोजना मंजूर कराई गई है, लेकिन अभी बजट नहीं मिला है। बजट मिलते ही वहां पर भी बाढ़ नियंत्रण कार्य शुरू करा दिए जाएंगे। - ध्रुव नारायण शुक्ला, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड