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कभी इस दफ्तर तो कभी उस दफ्तर में मिलते हैं साहब
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पीलीभीत। समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग और दिव्यांग सशक्तिरण विभाग का चार्ज एक ही अधिकारी पर है। इससे योजनाओं पर अमल में दिक्कतें आ रही हैं। फरियादी भी अधिकारी को तलाशने के लिए इस दफ्तर से उस दफ्तर के चक्कर काटते रहते हैं। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारी पर भी काम का भार अधिक होने के कारण सामंजस्य बैठाने की चुनौती बनी रहती है।
करीब दो माह पहले समाज कल्याण अधिकारी एमके सिंह का रिटायरमेंट हो जाने के बाद इस विभाग की जिम्मेदारी जिला दिव्यांग सशक्तिरण अधिकारी केपी सिंह को सौंपी गई। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में भी अर्से से अधिकारी की तैनाती नहीं है। लिहाजा पूर्व से इस विभाग का चार्ज भी दिव्यांग सशक्तिरण अधिकारी के पास है। इस तरह एक अधिकारी पर तीन महत्वपूर्ण विभागों का भार आ गया है। खासबात यह है कि दिव्यांग सशक्तिरण विभाग का दफ्तर विकास भवन में भूतल पर है। समाज कल्याण विभाग का दफ्तर प्रथम और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का दफ्तर द्वितीय तल पर है। अक्सर होता यह है कि कोई दिव्यांग जब साहब से मिलने पहुंचता है तो पता चलता है कि साहब पिछड़ा वर्ग विभाग में मिलेंगे। जब वह द्वितीय तल पर पहुंचता है तो बताया जाता कि अधिकारी समाज कल्याण के दफ्तर में बैठे हैं। बेचारा फरियादी ऊपर से फिर प्रथम तल पर आता है। इस पर भी गारंटी नहीं कि अधिकारी से मुलाकात हो ही जाए। इसकी वजह यह कि अधिकारी की लोकेशन समय के हिसाब से बदल जाती है। यही नहीं तीनों विभागों में मौजूद कर्मचारियों के पास तक उनकी सही लोकेशन की सूचना नहीं रहती है।
यह सही है कि तीन विभागों का चार्ज होने के कारण समस्या तो आती है। काम सभी का देखना होता है। कोशिश रहती है कि फरियादियों को दिक्कत न आए, इसलिए थोड़ा-थोड़ा समय सभी दफ्तरों में बैठकर काम निपटाते हैं।
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-केपी सिंह, दिव्यांग सशक्तीरण, समाज कल्याण व पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी
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करीब दो माह पहले समाज कल्याण अधिकारी एमके सिंह का रिटायरमेंट हो जाने के बाद इस विभाग की जिम्मेदारी जिला दिव्यांग सशक्तिरण अधिकारी केपी सिंह को सौंपी गई। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में भी अर्से से अधिकारी की तैनाती नहीं है। लिहाजा पूर्व से इस विभाग का चार्ज भी दिव्यांग सशक्तिरण अधिकारी के पास है। इस तरह एक अधिकारी पर तीन महत्वपूर्ण विभागों का भार आ गया है। खासबात यह है कि दिव्यांग सशक्तिरण विभाग का दफ्तर विकास भवन में भूतल पर है। समाज कल्याण विभाग का दफ्तर प्रथम और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का दफ्तर द्वितीय तल पर है। अक्सर होता यह है कि कोई दिव्यांग जब साहब से मिलने पहुंचता है तो पता चलता है कि साहब पिछड़ा वर्ग विभाग में मिलेंगे। जब वह द्वितीय तल पर पहुंचता है तो बताया जाता कि अधिकारी समाज कल्याण के दफ्तर में बैठे हैं। बेचारा फरियादी ऊपर से फिर प्रथम तल पर आता है। इस पर भी गारंटी नहीं कि अधिकारी से मुलाकात हो ही जाए। इसकी वजह यह कि अधिकारी की लोकेशन समय के हिसाब से बदल जाती है। यही नहीं तीनों विभागों में मौजूद कर्मचारियों के पास तक उनकी सही लोकेशन की सूचना नहीं रहती है।
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यह सही है कि तीन विभागों का चार्ज होने के कारण समस्या तो आती है। काम सभी का देखना होता है। कोशिश रहती है कि फरियादियों को दिक्कत न आए, इसलिए थोड़ा-थोड़ा समय सभी दफ्तरों में बैठकर काम निपटाते हैं।
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-केपी सिंह, दिव्यांग सशक्तीरण, समाज कल्याण व पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी