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जिले में धड़ाम न हो जाए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना
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पीलीभीत। उद्योगों को बढ़ावा देने और रोजगार मुहैया कराने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की गई है। मगर जिम्मेदारों की बेरुखी और कागजों की खानापूर्ति की वजह से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना धड़ाम होती नजर आ रही है। सरकारी मानकों को पूरा न कर पाने वजह से जिले में बेरोजगारों को सिर्फ छोटे उद्योग मसलन आटा चक्की, तेल मिल आदि के लिए ही बैंकों से कर्ज मिल पा रहा है। वन डिस्ट्रिक वन उत्पाद योजना के तहत पीलीभीत में बांसुरी बनाने वाली 95 इकाईयां स्थापित किए जाने का लक्ष्य है। मगर अभी तक केवल एक के लिए ऋण स्वीकृत हुआ है। 50 से अधिक आवेदन लंबित हैं।
उद्योग विभाग के आंकड़ों की मानें तो चालू वित्तीय सत्र में योजना के तहत 114 इकाईयां स्थापित करने का लक्ष्य मिला था। इसके सापेक्ष अब तक महज 13 इकाईयां ही स्थापित हो सकी हैं। जबकि दस से अधिक फाइलें बैंकों में लंबित पड़ी हैं। इसके लिए अधिकतम ऋण सीमा 25 लाख रुपये निर्धारित है। जिन इकाईयों के स्थापित होने का दावा किया जा रहा है उनमें ज्यादातर आटा चक्की, तेल मिल, रेडिमेंट गारमेंट्स आदि शामिल हैं। इनमें ज्यादातर दस लाख की लागत से कम की हैं। इसकी असल वजह यह है कि यहां के लोग मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार के मानक पर खरा नहीं उतर रहे हैं। विभाग की मानें तो दस लाख से ज्यादा आवेदन करने वाले को कर्ज के लिए व्यवसायिक जमीन, एफडी, सरकारी नौकरी आदि की गारंटी देनी होती है। किसान क्रेडिट या कृषि योग्य जमीन गारंटी के लिए मान्य नहीं है। इस वजह से यहां मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना सफल नहीं हो पा रही है।
वन डिस्ट्रिक, वन उत्पाद का पूरा नहीं हो रहा कोरम
सरकार ने वन डिस्ट्रिक, वन प्रोडक्ट के तहत पीलीभीत में बांसुरी का चयन किया गया है। जिला उद्योग विभाग को चालू सत्र में 95 इकाईयां स्थापित करने का लक्ष्य दिया था। सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी महज एक को ही सरकारी कर्ज मिल सका है। जबकि पचास से अधिक आवेदन फाइलों में कैद हैं।
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कर्ज देने में कंजूसी बरत रहे बैंक
जिले में उद्योग स्थापित किए जाने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बैंक बन रहे हैं। उद्योग विभाग की तरफ से 40 से अधिक आवेदनों पर स्वीकृति दी जा चुकी है। मगर आवेदन पर बैंक विचार नहीं कर रहे हैं। यह आलम तब है जब प्रशासनिक अफसर उद्योग बंधु की बैठक में हर बार कारोबारियों की समस्या सुलझाने का दावा करते है। बीते दिनों डीएम डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा ने उद्योग बंधु की बैठक में बैंक अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर खासा नाराजगी व्यक्त की थी। उसके बाद भी बैंकों में लंबित पत्रावलियों पर विचार नहीं किया जा रहा। यही वजह है कि उद्योग लगा पाने में लोग सफल नहीं हो पा रहे हैं।
वर्जन-
उद्योगों की स्थापना के लिए हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट के तहत जिले में चयनित बॉसुरी की इकाईयां स्थापित करने पर खासा जोर है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 13 उद्योगों स्थापित किए जा चुके हैं। कुछ फाइलें बैंक स्तर पर लंबित हैं।
- मयाराम सरोज, उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र
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उद्योग विभाग के आंकड़ों की मानें तो चालू वित्तीय सत्र में योजना के तहत 114 इकाईयां स्थापित करने का लक्ष्य मिला था। इसके सापेक्ष अब तक महज 13 इकाईयां ही स्थापित हो सकी हैं। जबकि दस से अधिक फाइलें बैंकों में लंबित पड़ी हैं। इसके लिए अधिकतम ऋण सीमा 25 लाख रुपये निर्धारित है। जिन इकाईयों के स्थापित होने का दावा किया जा रहा है उनमें ज्यादातर आटा चक्की, तेल मिल, रेडिमेंट गारमेंट्स आदि शामिल हैं। इनमें ज्यादातर दस लाख की लागत से कम की हैं। इसकी असल वजह यह है कि यहां के लोग मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार के मानक पर खरा नहीं उतर रहे हैं। विभाग की मानें तो दस लाख से ज्यादा आवेदन करने वाले को कर्ज के लिए व्यवसायिक जमीन, एफडी, सरकारी नौकरी आदि की गारंटी देनी होती है। किसान क्रेडिट या कृषि योग्य जमीन गारंटी के लिए मान्य नहीं है। इस वजह से यहां मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना सफल नहीं हो पा रही है।
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वन डिस्ट्रिक, वन उत्पाद का पूरा नहीं हो रहा कोरम
सरकार ने वन डिस्ट्रिक, वन प्रोडक्ट के तहत पीलीभीत में बांसुरी का चयन किया गया है। जिला उद्योग विभाग को चालू सत्र में 95 इकाईयां स्थापित करने का लक्ष्य दिया था। सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी महज एक को ही सरकारी कर्ज मिल सका है। जबकि पचास से अधिक आवेदन फाइलों में कैद हैं।
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कर्ज देने में कंजूसी बरत रहे बैंक
जिले में उद्योग स्थापित किए जाने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बैंक बन रहे हैं। उद्योग विभाग की तरफ से 40 से अधिक आवेदनों पर स्वीकृति दी जा चुकी है। मगर आवेदन पर बैंक विचार नहीं कर रहे हैं। यह आलम तब है जब प्रशासनिक अफसर उद्योग बंधु की बैठक में हर बार कारोबारियों की समस्या सुलझाने का दावा करते है। बीते दिनों डीएम डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा ने उद्योग बंधु की बैठक में बैंक अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर खासा नाराजगी व्यक्त की थी। उसके बाद भी बैंकों में लंबित पत्रावलियों पर विचार नहीं किया जा रहा। यही वजह है कि उद्योग लगा पाने में लोग सफल नहीं हो पा रहे हैं।
वर्जन-
उद्योगों की स्थापना के लिए हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट के तहत जिले में चयनित बॉसुरी की इकाईयां स्थापित करने पर खासा जोर है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 13 उद्योगों स्थापित किए जा चुके हैं। कुछ फाइलें बैंक स्तर पर लंबित हैं।
- मयाराम सरोज, उपायुक्त जिला उद्योग केंद्र