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नहीं थमी बाघ की चहलकदमी, दहशत बरकरार
Updated Sun, 14 Oct 2018 12:01 AM IST
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जीतपुर के खेतों में घूम रहा बाघ, पसरा सन्नाटा
वन विभाग की कार्यप्रणाली से नाखुश ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला (पीलीभीत)। माला रेंज के जंगल से बाहर आकर आबादी क्षेत्र में बाघ की चहलकदमी ग्रामीणों के लिए आफत बनती जा रही है। निगरानी के नाम पर खानापूरी कर रहे वनकर्मियों की कार्यप्रणाली से ग्रामीण असंतुष्ट हैं। दहशत के साए में रह रहे ग्रामीणों ने बाघ से निजात दिलाने के लिए शनिवार को वनकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया।
गजरौला क्षेत्र के अजीतपुर पटपरा गांव की सीमा में चार दिन पूर्व से जंगल से बाहर निकलकर एक बाघ आबादी के निकट पहुंच गया। बाघ की चहलकदमी के बाद से ही क्षेत्र में दहशत फैल गई। बाघ की आबादी क्षेत्र में चहलकदमी को देखते हुए शुरुआत में तो टाइगर रिजर्व प्रशासन गंभीर हुआ और बाघ को जंगल की ओर वापस करने के प्रयास भी किए गए लेकिन गन्ने का अधिक रकबा होने के चलते बाघ को वापस नहीं भेजा जा सका है। बाघ ने गन्ने के खेतों में शरण ले ली है। हालांकि ग्रामीणों को शांत करने के लिए वनकर्मी खानापूरी में लग गए। इधर क्षेत्र में लगातार बाघ की चहलकदमी जारी है। दहशत के चलते किसान अपनी पकी फसल को भी नहीं काट रहे हैं। आबादी क्षेत्र के निकट बाघ की लगातार मौजूदगी से परेशान ग्रामीणों ने वनकर्मियों पर गश्त के नाम पर खानापूर्ति का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। ग्रामीणों को मौसम में अचानक बदलाव होने से नुकसान का डर भी सता रहा है। प्रदर्शन करने वालों में दिनेश कुमार, मोतीराम, तिलकराम, बुद्धसेन, सरवन सिंह, राजपाल महेंद्र, होरीलाल समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।
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बाघ की सक्रियता देख लगाए जा रहे कैमरे
आबादी क्षेत्र में निकट खेतों में चार दिन पूर्व से लगातार बाघ की चहलकदमी व ग्रामीणों का आक्रोश देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रशासन चिंतित हुआ है। अधिकारियों ने क्षेत्र में चार कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं। इससे बाघ की लोकेशन के साथ सक्रियता का भी पता चल सके।
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वर्जन
बाघ के महुआ गांव की सीमा में पगचिह्न मिले हैं। बाघ की सक्रियता का पता लगाने के लिए अधिकारियों के निर्देश पर क्षेत्र में कैमरे लगवाए जा रहे हैं। बाघ पर पूरी नजर रखी जा रही है, वनकर्मी लगातार निगरानी में जुटे हैं। ग्रामीणों से भी सतर्क रहने की अपील की जा रही है। - डीके श्रीवास्तव, रेंजर माला
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जीतपुर के खेतों में घूम रहा बाघ, पसरा सन्नाटा
वन विभाग की कार्यप्रणाली से नाखुश ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला (पीलीभीत)। माला रेंज के जंगल से बाहर आकर आबादी क्षेत्र में बाघ की चहलकदमी ग्रामीणों के लिए आफत बनती जा रही है। निगरानी के नाम पर खानापूरी कर रहे वनकर्मियों की कार्यप्रणाली से ग्रामीण असंतुष्ट हैं। दहशत के साए में रह रहे ग्रामीणों ने बाघ से निजात दिलाने के लिए शनिवार को वनकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया।
गजरौला क्षेत्र के अजीतपुर पटपरा गांव की सीमा में चार दिन पूर्व से जंगल से बाहर निकलकर एक बाघ आबादी के निकट पहुंच गया। बाघ की चहलकदमी के बाद से ही क्षेत्र में दहशत फैल गई। बाघ की आबादी क्षेत्र में चहलकदमी को देखते हुए शुरुआत में तो टाइगर रिजर्व प्रशासन गंभीर हुआ और बाघ को जंगल की ओर वापस करने के प्रयास भी किए गए लेकिन गन्ने का अधिक रकबा होने के चलते बाघ को वापस नहीं भेजा जा सका है। बाघ ने गन्ने के खेतों में शरण ले ली है। हालांकि ग्रामीणों को शांत करने के लिए वनकर्मी खानापूरी में लग गए। इधर क्षेत्र में लगातार बाघ की चहलकदमी जारी है। दहशत के चलते किसान अपनी पकी फसल को भी नहीं काट रहे हैं। आबादी क्षेत्र के निकट बाघ की लगातार मौजूदगी से परेशान ग्रामीणों ने वनकर्मियों पर गश्त के नाम पर खानापूर्ति का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। ग्रामीणों को मौसम में अचानक बदलाव होने से नुकसान का डर भी सता रहा है। प्रदर्शन करने वालों में दिनेश कुमार, मोतीराम, तिलकराम, बुद्धसेन, सरवन सिंह, राजपाल महेंद्र, होरीलाल समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे।
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बाघ की सक्रियता देख लगाए जा रहे कैमरे
आबादी क्षेत्र में निकट खेतों में चार दिन पूर्व से लगातार बाघ की चहलकदमी व ग्रामीणों का आक्रोश देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रशासन चिंतित हुआ है। अधिकारियों ने क्षेत्र में चार कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं। इससे बाघ की लोकेशन के साथ सक्रियता का भी पता चल सके।
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बाघ के महुआ गांव की सीमा में पगचिह्न मिले हैं। बाघ की सक्रियता का पता लगाने के लिए अधिकारियों के निर्देश पर क्षेत्र में कैमरे लगवाए जा रहे हैं। बाघ पर पूरी नजर रखी जा रही है, वनकर्मी लगातार निगरानी में जुटे हैं। ग्रामीणों से भी सतर्क रहने की अपील की जा रही है। - डीके श्रीवास्तव, रेंजर माला