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500 लोगों से एक करोड़ ठगने के बाद बंद कर दी कंपनी
Updated Mon, 16 Jul 2018 11:34 PM IST
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एसपी का वर्जन आना बाकी है
500 लोगों से एक करोड़ ठगने के बाद कंपनी भागी
तकादा करने पहुंचे लोग तो कार्यालय से सामान भी समेट ले गए जालसाज
कंपनी के एक एजेंट ने अब एसपी से की शिकायत, आठ पर रिपोर्ट दर्ज
बरेली के क्रिस्टल कॉलोनी में तीन साल पहले खोला गया था ब्रांच कार्यालय
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। कंपनी बनाकर निवेश के नाम पर ठगी करने का एक और मामला सामने आया है। इसमें 500 लोगों से करीब एक करोड़ रुपये जमा कराने के बाद कंपनी बंद कर दी गई। एक कर्मचारी ने अपने उच्चाधिकारियों पर संगीन आरोप लगाते हुए शिकायत एसपी से की। जिसके बाद एसपी के आदेश पर आठ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
बारादरी (बरेली) थाना क्षेत्र के क्रिस्टल कॉलोनी निवासी विजय प्रताप सिंह ने एसपी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि उसके पिता जगत प्रताप सिंह सहारा इंडिया परिवार कंपनी में काम करते थे। उस वक्त आलमबाग (लखनऊ) के गीतापल्ली इलाके के निवासी सोमनाथ अग्रहरि सहारा इंडिया परिवार में बरेली के रीजनल मैनेजर थे। इसको लेकर पिता की उनसे पहचान थी। करीब ढाई साल पहले सोमनाथ उसके घर आए और बताया कि उन्होंने एक नई कंपनी रियल इंडिया ग्रुप नाम से खोली है। जिसके वह मुख्य एडवाइजर हैं। उन्होंने बेहतर रिस्पांस का झांसा देकर उनको भी कंपनी में शामिल कर लिया। इसके बाद सात दिसंबर 2015 को उनके मकान के निचले हिस्से में कंपनी का ब्रांच ऑफिस बनाया गया। उद्घाटन के मौके पर कंपनी से जुड़े कई बड़े अधिकारी भी आए थे। आरोप है कि उनके कार्यालय से संबंधित पांच सौ लोगों से कंपनी में एक करोड़ रुपये की रकम जमा कराई गई। इसमें एक साल बाद अधिक रकम देने का भरोसा ग्राहकों को दिलाया गया था। समय पूरा होने के बाद जब लोगों ने अपना जमा कराया रुपया वापस मांगना शुरू किया तो आरोपियों ने पहले टालमटोल की। इसके बाद कंपनी का कार्यालय बंद कर सामान समेटकर चले गए। इसको लेकर जब बातचीत की गई, तो आरोप है कि कंपनी के बड़े अधिकारियों ने उनसे अभद्रता की और भगा दिया। अप्रैल 2018 में इसकी शिकायत जन सुनवाई पोर्टल पर की गई, लेकिन कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। जिसके बाद न्याय के लिए एसपी पीलीभीत से मुलाकात कर शिकायत की। तब जाकर कानूनी कार्रवाई हो सकी है।
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फिर करोड़ों की चपत लगने के बाद हुई कार्रवाई
एजेंट ने ही आगे आकर दर्ज कराई रिपोर्ट, प्रशासनिक मशीनरी पर उठे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। निवेश के नाम पर ठगी का मामला एक बार फिर प्रशासनिक मशीनरी पर सवालिया निशान खड़ा कर गया है। एक साल तक कंपनी लोगों को बेहतर मुनाफे का लालच देकर ठगती रही। उसके एजेंट सुनहरा सपना दिखाकर मेहनत की कमाई लूटने वालों तक पहुंचाते रहे, लेकिन प्रशासन मौन रहा। उसको इसकी भनक तक नहीं लगी। ऐसे में साठगांठ की ओर इशारा जाना, कोई नई बात नहीं है। अब कार्रवाई की शुरूआत उसी कंपनी में बतौर एजेंट काम करने वाले युवक की ओर से की गई है। कंपनी ने किस तरह से लोगों को चूना लगाया। इसका भी पुलिस को दी गई तहरीर में खुलकर कोई जिक्र नहीं किया गया है। वहीं पूर्व में स्वैप मशीन से लेकर समूह बनाकर ठगी के मामले प्रकाश में आ चुके हैं। इन मामलों में भी कार्रवाई की दिशा इससे हटकर नहीं रही थी। जब तक कंपनी काम करती रही, कोई आगे नहीं आया। बाद में एजेंट की तरफ से कार्रवाई कर दी गई। पुलिस को दी तहरीर में बताया गया है कि प्रतिदिन आने वाला रुपया कंपनी के बड़े अधिकारियों तक पहुंचा दिया जाता था। कई बार खुद उच्च स्तर से आए कर्मचारी कैश ले जाते थे। ऐसे में अगर सही ढंग से प्रशासनिक मशीनरी कंपनियों की जांच का जिम्मा निभाती, तो शायद जालसाजों को रंगेहाथ पकड़ा जा सकता था। पुलिस भले जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिला रही है, लेकिन ठगों के आगे प्रशासनिक मशीनरी की लापरवाही भी उजागर हो गई है।
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ये किए गए नामजद
सुनगढ़ी थाने पर दर्ज की गई रिपोर्ट में आलमबाग (लखनऊ) के गीतापल्ली निवासी सोमनाथ अग्रहरि, संतप्रसाद मिश्रा उर्फ एसपी मिश्रा जोनल मैनेजर कोतवाली, रामपुर के सफाखाना निवासी प्रदीप गुप्ता, उनकी पत्नी ज्योति गुप्ता, जलालाबाद (शाहजहांपुर) के गुनारा गांव निवासी सुष्मिता सक्सेना, आलमबाग (लखनऊ) के प्रेमनगर निवासी पंकज श्रीवास्तव, सिविल लाइन नार्थ पीलीभीत मरौरी ब्लॉक के पीछे के निवासी प्रतीक मिश्रा, एलडीए कॉलोनी (कानपुर) के निवासी नितिन कुमार श्रीवास्तव को नामजद किया गया है।
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इन एजेंटों ने जमा कराई थी रकम
कंपनी से जुड़कर खातेधारों की रकम जमा कराने वालों में पवन कुमार, दिग्विजय नाथ शर्मा, पिपेंद्र प्रकाश, वेदप्रकाश, विमल सुयाल, साधना चौहान, वंदना सिंह, नरेंद्र सोलंगी, अंकित श्रीवास्तव, राधाकृष्ण, धर्मपाल, सुखपाल, रानी देवी, अजय प्रताप सिंह, सरिता, सुनील, ढाकन, खातून, मेवाराम, उमाचरन, संजू, सालिकराम, पायल, हेमपुष्पा, अतुल आदि एजेंट थे।
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एसपी के आदेश पर मामले में आठ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। इसमें एक आरोपी पीलीभीत का रहने वाला है। ठगी किन लोगों से हुई, किस तरह से अंजाम दी गई। इसको लेकर गहनता से जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- मुहम्मद कासिम, थानाध्यक्ष सुनगढ़ी
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500 लोगों से एक करोड़ ठगने के बाद कंपनी भागी
तकादा करने पहुंचे लोग तो कार्यालय से सामान भी समेट ले गए जालसाज
कंपनी के एक एजेंट ने अब एसपी से की शिकायत, आठ पर रिपोर्ट दर्ज
बरेली के क्रिस्टल कॉलोनी में तीन साल पहले खोला गया था ब्रांच कार्यालय
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। कंपनी बनाकर निवेश के नाम पर ठगी करने का एक और मामला सामने आया है। इसमें 500 लोगों से करीब एक करोड़ रुपये जमा कराने के बाद कंपनी बंद कर दी गई। एक कर्मचारी ने अपने उच्चाधिकारियों पर संगीन आरोप लगाते हुए शिकायत एसपी से की। जिसके बाद एसपी के आदेश पर आठ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है।
बारादरी (बरेली) थाना क्षेत्र के क्रिस्टल कॉलोनी निवासी विजय प्रताप सिंह ने एसपी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि उसके पिता जगत प्रताप सिंह सहारा इंडिया परिवार कंपनी में काम करते थे। उस वक्त आलमबाग (लखनऊ) के गीतापल्ली इलाके के निवासी सोमनाथ अग्रहरि सहारा इंडिया परिवार में बरेली के रीजनल मैनेजर थे। इसको लेकर पिता की उनसे पहचान थी। करीब ढाई साल पहले सोमनाथ उसके घर आए और बताया कि उन्होंने एक नई कंपनी रियल इंडिया ग्रुप नाम से खोली है। जिसके वह मुख्य एडवाइजर हैं। उन्होंने बेहतर रिस्पांस का झांसा देकर उनको भी कंपनी में शामिल कर लिया। इसके बाद सात दिसंबर 2015 को उनके मकान के निचले हिस्से में कंपनी का ब्रांच ऑफिस बनाया गया। उद्घाटन के मौके पर कंपनी से जुड़े कई बड़े अधिकारी भी आए थे। आरोप है कि उनके कार्यालय से संबंधित पांच सौ लोगों से कंपनी में एक करोड़ रुपये की रकम जमा कराई गई। इसमें एक साल बाद अधिक रकम देने का भरोसा ग्राहकों को दिलाया गया था। समय पूरा होने के बाद जब लोगों ने अपना जमा कराया रुपया वापस मांगना शुरू किया तो आरोपियों ने पहले टालमटोल की। इसके बाद कंपनी का कार्यालय बंद कर सामान समेटकर चले गए। इसको लेकर जब बातचीत की गई, तो आरोप है कि कंपनी के बड़े अधिकारियों ने उनसे अभद्रता की और भगा दिया। अप्रैल 2018 में इसकी शिकायत जन सुनवाई पोर्टल पर की गई, लेकिन कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। जिसके बाद न्याय के लिए एसपी पीलीभीत से मुलाकात कर शिकायत की। तब जाकर कानूनी कार्रवाई हो सकी है।
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फिर करोड़ों की चपत लगने के बाद हुई कार्रवाई
एजेंट ने ही आगे आकर दर्ज कराई रिपोर्ट, प्रशासनिक मशीनरी पर उठे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। निवेश के नाम पर ठगी का मामला एक बार फिर प्रशासनिक मशीनरी पर सवालिया निशान खड़ा कर गया है। एक साल तक कंपनी लोगों को बेहतर मुनाफे का लालच देकर ठगती रही। उसके एजेंट सुनहरा सपना दिखाकर मेहनत की कमाई लूटने वालों तक पहुंचाते रहे, लेकिन प्रशासन मौन रहा। उसको इसकी भनक तक नहीं लगी। ऐसे में साठगांठ की ओर इशारा जाना, कोई नई बात नहीं है। अब कार्रवाई की शुरूआत उसी कंपनी में बतौर एजेंट काम करने वाले युवक की ओर से की गई है। कंपनी ने किस तरह से लोगों को चूना लगाया। इसका भी पुलिस को दी गई तहरीर में खुलकर कोई जिक्र नहीं किया गया है। वहीं पूर्व में स्वैप मशीन से लेकर समूह बनाकर ठगी के मामले प्रकाश में आ चुके हैं। इन मामलों में भी कार्रवाई की दिशा इससे हटकर नहीं रही थी। जब तक कंपनी काम करती रही, कोई आगे नहीं आया। बाद में एजेंट की तरफ से कार्रवाई कर दी गई। पुलिस को दी तहरीर में बताया गया है कि प्रतिदिन आने वाला रुपया कंपनी के बड़े अधिकारियों तक पहुंचा दिया जाता था। कई बार खुद उच्च स्तर से आए कर्मचारी कैश ले जाते थे। ऐसे में अगर सही ढंग से प्रशासनिक मशीनरी कंपनियों की जांच का जिम्मा निभाती, तो शायद जालसाजों को रंगेहाथ पकड़ा जा सकता था। पुलिस भले जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिला रही है, लेकिन ठगों के आगे प्रशासनिक मशीनरी की लापरवाही भी उजागर हो गई है।
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सुनगढ़ी थाने पर दर्ज की गई रिपोर्ट में आलमबाग (लखनऊ) के गीतापल्ली निवासी सोमनाथ अग्रहरि, संतप्रसाद मिश्रा उर्फ एसपी मिश्रा जोनल मैनेजर कोतवाली, रामपुर के सफाखाना निवासी प्रदीप गुप्ता, उनकी पत्नी ज्योति गुप्ता, जलालाबाद (शाहजहांपुर) के गुनारा गांव निवासी सुष्मिता सक्सेना, आलमबाग (लखनऊ) के प्रेमनगर निवासी पंकज श्रीवास्तव, सिविल लाइन नार्थ पीलीभीत मरौरी ब्लॉक के पीछे के निवासी प्रतीक मिश्रा, एलडीए कॉलोनी (कानपुर) के निवासी नितिन कुमार श्रीवास्तव को नामजद किया गया है।
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इन एजेंटों ने जमा कराई थी रकम
कंपनी से जुड़कर खातेधारों की रकम जमा कराने वालों में पवन कुमार, दिग्विजय नाथ शर्मा, पिपेंद्र प्रकाश, वेदप्रकाश, विमल सुयाल, साधना चौहान, वंदना सिंह, नरेंद्र सोलंगी, अंकित श्रीवास्तव, राधाकृष्ण, धर्मपाल, सुखपाल, रानी देवी, अजय प्रताप सिंह, सरिता, सुनील, ढाकन, खातून, मेवाराम, उमाचरन, संजू, सालिकराम, पायल, हेमपुष्पा, अतुल आदि एजेंट थे।
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एसपी के आदेश पर मामले में आठ लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। इसमें एक आरोपी पीलीभीत का रहने वाला है। ठगी किन लोगों से हुई, किस तरह से अंजाम दी गई। इसको लेकर गहनता से जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- मुहम्मद कासिम, थानाध्यक्ष सुनगढ़ी