आईएमए की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं रहीं प्रभावित

Bareily Bureau Updated Tue, 06 Jun 2017 07:01 PM IST
डाॉक्टटराों की हड़ताला
डाॉक्‍टटराों की हड़ताला
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पीलीभीत। डॉक्टरों व चिकित्सीय संस्थानों पर हिंसा व उपद्रव को रोकने को कड़ा कानून बनाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर आईएमए से जुड़े डॉक्टर मंगलवार को हड़ताल पर रहे। प्राइवेट अस्पताल, क्लीनिक व जांच सेंटरों पर ताले लटके रहे। इससे मरीजों व तीमारदारों को दिक्कत का सामना करना पड़ा। वहीं आईएमए डॉक्टरों ने बैठक कर समस्याओं व लंबित मांगों पर चर्चा की।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को दिल्ली चलो मार्च का आयोजन किया गया। इसके चलते जिले भर में आईएमए से जुड़े डॉक्टर हड़ताल पर रहे। आईएमए डाक्टरों ने ओपीडी व डायग्नोस्टिक सेवाओं को पूरी तरह से बंद रखा। आईएमए के बैनर तले शहर के एक होटल में बैठक हुई। यहां डॉक्टरों ने कहा कि देश में आए दिन अस्पतालों में हिंसा व उपद्रव की घटनाएं देखने को मिल रही है। कई डॉक्टरों पर कातिलाना हमले भी किए गए। ऐसे में चिकित्सीय कार्य सुरक्षित नहीं रह गया है। सरकार को इसके लिए कड़ा कानून बनाने की जरूरत है ताकि चिकित्सक अपने संस्थानों मेें बेहतर चिकित्सीय सेवाएं दे सके। इस मौके पर आईएमए अध्यक्ष डॉ. विपिन साहनी, सचिव डॉ. सौरभ अग्रवाल, डॉ. एसके अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष डॉ. केएन तिवारी, डॉ. महेश चंद्रा, डॉ. तरुण सेठी, डॉ. पीयूष अग्रवाल, डॉ. भरत सेठी, डॉॅ. ममता सक्सेना, डॉ. नीलम अग्रवाल, डॉ. प्रभाकर शर्मा, डॉ. आरएच गोखले, डॉ. नीरज गुप्ता, डॉ. एसके मित्रा, डॉ. प्रांजल अग्रवाल, डॉ. आस्था कंचन, डॉ. रश्मि सेठी, डॉ. रोहित सिंह, डॉ. डीके गंगवार, डॉ. सुमित सचान, डॉ. ओजस्वी शर्मा समेत कई डॉक्टर मौजूद रहे।
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भटकते रहे मरीज
जिले में आईएमए से जुड़े करीब 80 डॉक्टर हैं। मंगलवार को हुई हड़ताल के चलते दूर दराज से दवा लेने शहर पहुंचे मरीजों व उनके तीमारदारों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ा सुबह से ही अस्पतालों के सामने मरीजों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। बाद में जब लोगों को हड़ताल की जानकारी हुई तो उन्हें बिना इलाज के ही बैरंग लौटना पड़ा। फिलहाल पूरे दिन प्राइवेट अस्पतालों, क्लीनिकों व जांच सेंटरों के बाहर मरीज डाक्टरों का इंतजार करते देखे गए।
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इन मांगों को लेकर रही हड़ताल
- केंद्रीय स्तर से चिकित्सकों व चिकित्सीय संस्थानों पर हिंसा व उपद्रव रोकने को कड़ा कानून बने।
- मेडिकल छात्रों पर एनईटी के प्रस्ताव को खारिज किया जाए।
- चिकित्सकीय प्रतिष्ठानों का रजिस्ट्रेशन एकल विंडो से किया जाए।
- चिकित्सकों को पर्चा लिखने का स्वायत्तता अधिकार रहे।
- एलोपैथिक दवाओं का पर्चा लिखने का अधिकार सिर्फ एलोपैथिक चिकित्सकों को मिले।
- हेल्थ सेक्टर का बजट एक प्रतिशत से बढ़ाकर 2.5 प्रतिशत किया जाए।

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