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प्रधान को बचाने को जांच टाल गए डीपीआरओ
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पीलीभीत। ग्राम निधि से हुए कार्यों और प्रधानमंत्री आवास में गड़बड़ी किए जाने की शिकायत उप निदेशक पंचायती राज से करना एक ग्रामीण को महंगा पड़ा। पहले तो प्रधान ने गांव पहुंचे डीपीआरओ के सामने ही पीड़ित की पिटाई की, बाद में मामला शांत होने पर डीपीआरओ तीन दिन में जांच पूरी करने का आश्वासन देकर मामला टाल गए। वहीं निर्धारित समय होने के बाद अफसर इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। कार्रवाई तो दूर जांच के लिए गांव तक नहीं पहुंचे।
मामला बरखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव नवादा महेश का है। यहां के तेजराम शर्मा ने ग्राम निधि से कराए गए कार्यों की सूचना जन सूचना के तहत मांगी थी। इसके साथ ही डीडी पंचायती राज अभय कुमार शाही को एक शिकायती पत्र भेजा था जिसमें ग्राम प्रधान महेंद्रपाल और सचिव हरीशचंद्र पर गांव में ग्राम निधि से कराए विकास कार्यों, प्रधानमंत्री आवास और शौचालय में बड़े पैमाने पर घोटाला किए जाने के आरोप लगाए थे। डीडी के आदेश पर 12 जनवरी को डीपीआरओ प्रमोद कुमार यादव जांच के लिए गांव पहुंचे। यहां दोनों पक्षों को बुलाया गया। इस बीच जांच को गांव पहुंचे डीपीआरओ को देख प्रधान का पारा चढ़ गया। उनके सामने ही प्रधान ने शिकायकर्ता की पिटाई कर दी। हंगामे के बीच जांच टाल दी गई। डीपीआरओ द्वारा तीन दिन में जांच का आश्वासन दिया गया था। मगर अभी तक इस मामले को कोई कारगर कदम नहीं उठाया जा सका है।
संबंधित अभिलेख सचिव द्वारा उपलब्ध नहीं कराए गए थे। जिस कारण जांच को गति नहीं दी जा सकी है। अभिलेख प्राप्त होते ही जल्द ही जांच के लिए टीम के साथ एक बार फिर गांव जाएंगे।
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प्रमोद कुमार यादव, डीपीआरओ
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मामला बरखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव नवादा महेश का है। यहां के तेजराम शर्मा ने ग्राम निधि से कराए गए कार्यों की सूचना जन सूचना के तहत मांगी थी। इसके साथ ही डीडी पंचायती राज अभय कुमार शाही को एक शिकायती पत्र भेजा था जिसमें ग्राम प्रधान महेंद्रपाल और सचिव हरीशचंद्र पर गांव में ग्राम निधि से कराए विकास कार्यों, प्रधानमंत्री आवास और शौचालय में बड़े पैमाने पर घोटाला किए जाने के आरोप लगाए थे। डीडी के आदेश पर 12 जनवरी को डीपीआरओ प्रमोद कुमार यादव जांच के लिए गांव पहुंचे। यहां दोनों पक्षों को बुलाया गया। इस बीच जांच को गांव पहुंचे डीपीआरओ को देख प्रधान का पारा चढ़ गया। उनके सामने ही प्रधान ने शिकायकर्ता की पिटाई कर दी। हंगामे के बीच जांच टाल दी गई। डीपीआरओ द्वारा तीन दिन में जांच का आश्वासन दिया गया था। मगर अभी तक इस मामले को कोई कारगर कदम नहीं उठाया जा सका है।
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संबंधित अभिलेख सचिव द्वारा उपलब्ध नहीं कराए गए थे। जिस कारण जांच को गति नहीं दी जा सकी है। अभिलेख प्राप्त होते ही जल्द ही जांच के लिए टीम के साथ एक बार फिर गांव जाएंगे।
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प्रमोद कुमार यादव, डीपीआरओ