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मरीजों की सुविधाओं के दुश्मन बनें डॉक्टर्स

Mon, 22 Oct 2018 05:28 PM IST
Updated Mon, 22 Oct 2018 05:28 PM IST
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मरीजों की सुविधाओं के दुश्मन बनें डॉक्टर्स
‘मेरा अस्पताल ऐप’ से दूर निजी और सरकारी अस्पताल
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स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए डेढ़ साल पहले लांच किया गया था ऐप
- निजी तो छोड़िए सरकारी जिम्मेदारों को भी नहीं ऐप की जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना में शामिल ‘मेरा अस्पताल ऐप’ से निजी और सरकारी अस्पताल अब तक दूरी बनाए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लांच किए गए ऐप से अब तक एक भी अस्पताल नहीं जुड़ा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी जनप्रचार करने की जहमत नहीं उठाई गई। खासबात यह है कि ऐप के बारे में पब्लिक का वाकिफ होना तो दूर अस्पताल के कर्मचारी भी अंजान हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसर चाहे वह सीएमओ हो या फिर सीएमएस उनको भी कोई जानकारी नहीं है। जबकि, मेरा अस्पताल ऐप लांच हुए करीब डेढ़ साल हो गया है। इसकी एक वजह यह भी मानी जा रही है कि ऐप से अस्पतालों की अव्यवस्थाओं की पोल खुल जाएगी।
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देनी थी फीडबैक
ऐप पर सभी सरकारी और निजी अस्पताल को जोड़ा जाना है। ताकि इन अस्पतालों में इलाज के लिए जाने वाले मरीज और उनके तीमारदार अस्पताल की अच्छाइयों और खामियों का फीडबैक सरकार को दे सकें। खामियों को सुधारने के लिए सरकार ने यह तरकीब निकाली, जिसमें शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाना था, लेकिन डॉक्टर्स इस ऐप से जुड़ना आफत मोल लेना जैसा समझ रहे हैं। 000
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पीएम ऑफिस से निगरानी
मेरा अस्पताल ऐप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लांच किया है। इसकी निगरानी भी पीएमओ कार्यालय से की जाती है। जिसमें तमाम जिलेवार अस्पताल की फीडबैक के आधार पर अस्पताल को ग्रेडिंग दी जाएगी। अच्छा काम करने वाले अस्पतालों को पीएमओ की तरफ से सम्मानित किया जाएगा और उसमें सुविधाएं बढ़ाने के लिए संस्तुति कर वार्षिक फंड भी बढ़ाया जाएगा। वहीं खराब फीडबैक वाले अस्पतालों को चिह्नित कर उनको सुधारा जाएगा। ताकि अस्पताल में आने वाले मरीजों कों बेहतर सुविधा मिल सके।
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वर्जन
21पीबीटीपी-9
केंद्र सरकार की यह अच्छी योजना है। जानकारी नहीं होने के कारण मेरा अस्पताल ऐप से सरकारी और निजी अस्पतालों को नहीं जोड़ा सका है। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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21पीबीटीपी-10
मुझे ‘मेरा अस्पताल ऐप’ के बारे में किसी भी तरह की कोई जानकारी नहीं है। इस बारे में जब जानकारी ही नहीं है तो जुड़ना या न जुड़ना बाद की बात है। - डॉ. बी दास, राज जानकी अस्पताल

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वर्जन
ऐप से संबंधित जानकारी नहीं मिली है। भविष्य में इस तरह की किसी ऐप से जुड़ने की बात सामने आए तो निश्चित ही अस्पताल को जोड़ा दिया जाएगा।
- डॉ. आरपी सुमन, सीएमएस

फोटो-22
मरीजों से फीडबैक मिल सके यह सरकार की एक अच्छी पहल है। लेकिन मेरा अस्पताल ऐप के बारे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई भी जानकारी नहीं मिली है। ऐसी किसी ऐप से जुड़ने के भविष्य में कोई निर्देश मिलते है, तो निश्चित ही उसका पालन किया जाएगा। डॉ. अमित कुशवाहा, कुशवाहा क्लिनिक
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