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जीएसटी में शुरु हुई एक्सेस टैक्स रिफंड की प्रक्रिया
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत
Updated Tue, 03 Jul 2018 12:05 AM IST
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जीएसटी काउंसिल ने व्यापारियों की एक और समस्या का समाधान कर दिया है। गलत मद में जमा एक्सेस टैक्स के रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, यह रिफंड व्यापारियों के सीधे खाते में पहुंचेगा।
डिप्टी कमिश्नर अरुण पांडेय ने बताया कि जीएसटी में आईजीएसटी, एसजीएसटी, सीजीएसटी के तहत टैक्स जमा किया जाता है, रिटर्न फाइल करते समय व्यापारियों को सारा ब्योरा देते हुए टैक्स का भुगतान करना पड़ता है। कई बार रिटर्न दाखिल करते वक्त कई व्यापारी गलत मद में टैक्स का भुगतान कर देते है, जैसे एसजीएसटी की जगह आईजीएसटी या फिर जीएसटी में भुगतान कर दिया, पेनाल्टी की जगह टैक्स में भुगतान कर दिया गया, तो व्यापारियों का पैसा उसी में अटका रह जाता था। उन्हें सही मद में टैक्स जमा करने के लिए पूरा पैसा जमा कराना पड़ता था और जो टैक्स जमा हो चुका है, उसका एडजस्टमेंट या फिर रिफंड का कोई विकल्प पहले नहीं था। उन्होंने बताया कि यह मुद्दा जीएसटी काउंसिल के सामने रखा गया था। जिसके बाद पिछले दिनों जीएसटी काउंसिल ने व्यापारियों की समस्या का समाधान कर दिया। एक्सेस टैक्स का रिफंड किया जाने लगा है। एसजीएसटी में जमा एक्सेस टैक्स विभागीय स्तर पर रिफंड किया जाएगा। अगर सीजीएसटी में एक्सेस टैक्स जमा हुआ है तो केंद्र स्तर से रिफंड की प्रक्रिया पूरी होगी।
बोले जीएसटी एक्सपर्ट
जीएसटी एक्सपर्ट सीए संजय अग्रवाल ने बताया कि जीएसटी काउंसिल द्वारा उठाया गया यह कदम व्यापारियों के लिए बेहद ही संतोष पूर्ण साबित होगा क्योंकि ऐसे बहुत से मामले लंबित पड़े है। रिटर्न फाइल करते समय गलत मद में टैक्स जमा करने की गलती सीए और टैक्स कंसलटेंट से भी हो जाती है। विभागीय अधिकारी भले ही एक्सेस टैक्स रिफंड का दावा करें लेकिन हकीकत में स्थिति बिल्कुल उलट है। सभी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी रिफंड या एडजस्टमेंट नहीं होने की वजह से सैकड़ों व्यापारियों की रकम आज भी अटकी हुई है। विभाग को कैंप लगाकर व्यापारियों को इसकी जानकारी देनी होगी। आवेदन करने के बाद रिफंड कब आएगा इसका भी कोई निर्धारित समय नहीं है।
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डिप्टी कमिश्नर अरुण पांडेय ने बताया कि जीएसटी में आईजीएसटी, एसजीएसटी, सीजीएसटी के तहत टैक्स जमा किया जाता है, रिटर्न फाइल करते समय व्यापारियों को सारा ब्योरा देते हुए टैक्स का भुगतान करना पड़ता है। कई बार रिटर्न दाखिल करते वक्त कई व्यापारी गलत मद में टैक्स का भुगतान कर देते है, जैसे एसजीएसटी की जगह आईजीएसटी या फिर जीएसटी में भुगतान कर दिया, पेनाल्टी की जगह टैक्स में भुगतान कर दिया गया, तो व्यापारियों का पैसा उसी में अटका रह जाता था। उन्हें सही मद में टैक्स जमा करने के लिए पूरा पैसा जमा कराना पड़ता था और जो टैक्स जमा हो चुका है, उसका एडजस्टमेंट या फिर रिफंड का कोई विकल्प पहले नहीं था। उन्होंने बताया कि यह मुद्दा जीएसटी काउंसिल के सामने रखा गया था। जिसके बाद पिछले दिनों जीएसटी काउंसिल ने व्यापारियों की समस्या का समाधान कर दिया। एक्सेस टैक्स का रिफंड किया जाने लगा है। एसजीएसटी में जमा एक्सेस टैक्स विभागीय स्तर पर रिफंड किया जाएगा। अगर सीजीएसटी में एक्सेस टैक्स जमा हुआ है तो केंद्र स्तर से रिफंड की प्रक्रिया पूरी होगी।
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बोले जीएसटी एक्सपर्ट
जीएसटी एक्सपर्ट सीए संजय अग्रवाल ने बताया कि जीएसटी काउंसिल द्वारा उठाया गया यह कदम व्यापारियों के लिए बेहद ही संतोष पूर्ण साबित होगा क्योंकि ऐसे बहुत से मामले लंबित पड़े है। रिटर्न फाइल करते समय गलत मद में टैक्स जमा करने की गलती सीए और टैक्स कंसलटेंट से भी हो जाती है। विभागीय अधिकारी भले ही एक्सेस टैक्स रिफंड का दावा करें लेकिन हकीकत में स्थिति बिल्कुल उलट है। सभी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी रिफंड या एडजस्टमेंट नहीं होने की वजह से सैकड़ों व्यापारियों की रकम आज भी अटकी हुई है। विभाग को कैंप लगाकर व्यापारियों को इसकी जानकारी देनी होगी। आवेदन करने के बाद रिफंड कब आएगा इसका भी कोई निर्धारित समय नहीं है।
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