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चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 337.48 करोड़ बकाया
Updated Thu, 03 May 2018 08:48 PM IST
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चीनी मिलों पर किसानों का 337.48 करोड़ बकाया
बरखेड़ा पर सर्वाधिक 192 करोड़, एलएच पर बाकी है 62.82 करोड़
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत।
प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने से पहले भाजपा ने गन्ना किसानों का भुगतान 14 दिन के अंदर कराने की घोषणा की थी कि सत्ता संभालने के एक साल भी भाजपा अपने वादे को पूरा नहीं कर पा रही है। जिले में पेराई सत्र समाप्ति की ओर है जबकि यहां की चार चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 337.53 करोड़ रुपया बकाया है। इसमें सबसे ज्यादा खराब स्थिति बरखेड़ा मिल की है। इस मिल ने अभी तक कुल खरीदे गए गन्ने का मात्र 36 प्रतिशत भुगतान ही किया है। मिल पर 191 करोड़ रुपया बकाया है।
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर किसानों को व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद थी जिसके चलते जिलेे में गन्ने के क्षेत्रफल में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई थी। पेराई सत्र प्रारंभ होने पर किसानों को लगा था कि समय से भुगतान मिलेगा। शहर की एलएच शुगर मिल ने प्रारंभ में 14 दिन के अंतराल के स्थान पर एक सप्ताह के अंदर ही भुगतान शुरू कर दिया था लेकिन कुछ समय बाद चीनी के दामों में आई गिरावट के चलते एलएच मिल ने भुगतान से हाथ खींच लिए। इससे जिले की चारों मिलों पर गन्ना बकाए के आंकड़ा बढ़ता चला गया। भुगतान में सबसे खराब स्थिति बरखेड़ा की बजाज चीनी की रही। पहली मई से मिल बंद हो गई। इस दौरान मिले ने किसानों से 302.79 करोड़ रुपये मूल्य का गन्ना खरीदा जिसके बदले मात्र 110.80 करोड़ का ही भुगतान किया जो कुल गन्ना मूल्य का मात्र 36 प्रतिशत है। मिल पर अब भी 191.98 करोड़ रुपया बकाया है। इसके अलावा जिले की दोनों सहकारी मिलों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं रही। पूरनपुर पर 40.76 करोड़ एवं बीसलपुर मिल पर 41.96 करोड़ रुपया बकाया है। इन दोनों मिलों ने क्रमश: 82.06 करोड़ एवं 96.25 करोड़ रूपये मूल्य का गन्ना खरीद कर क्रमश: 41.29 करोड़ एवं 54.29 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। वहीं शहर स्थित एलएच मिल का भुगतान अन्य सभी मिलों से बेहतर रहा मिल अब भी कुल खरीदे गए गन्ने का 87.38 प्रतिशत भुगतान कर चुकी है। प्रारंभ में मिल ने समय से और नियमित भुगतान दिया लेकिन अंत समय में इस मिल का भुगतान भी अटकने लगा। एलएच का पेराई सत्र अभी चल रही है। अभी तक मिल ने 497.78 करोड़ रूपये का गन्ना खरीदा है जिसके सापेक्ष 434.96 करोड़ का भुगतान वह कर चुकी है। इस मिल अभी 62.82 करोड़ रुपया बकाया है। इस तरह चारों मिलों पर गन्ना किसानों का कुल मिलाकर 337.53 करोड़ रुपया बकाया है।
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मिलों से भुगतान के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बरखेड़ा मिल की चीनी बिक्री से प्राप्ति धनराशि से भुगतान कराया जा रहा है जबकि सहकारी मिलों के भुगतान के लिए शासन को लिखा गया है।
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राजेश्वर यादव, जिला गन्ना अधिकारी
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चीनी मिलों पर किसानों का 337.48 करोड़ बकाया
बरखेड़ा पर सर्वाधिक 192 करोड़, एलएच पर बाकी है 62.82 करोड़
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत।
प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने से पहले भाजपा ने गन्ना किसानों का भुगतान 14 दिन के अंदर कराने की घोषणा की थी कि सत्ता संभालने के एक साल भी भाजपा अपने वादे को पूरा नहीं कर पा रही है। जिले में पेराई सत्र समाप्ति की ओर है जबकि यहां की चार चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का 337.53 करोड़ रुपया बकाया है। इसमें सबसे ज्यादा खराब स्थिति बरखेड़ा मिल की है। इस मिल ने अभी तक कुल खरीदे गए गन्ने का मात्र 36 प्रतिशत भुगतान ही किया है। मिल पर 191 करोड़ रुपया बकाया है।
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर किसानों को व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद थी जिसके चलते जिलेे में गन्ने के क्षेत्रफल में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई थी। पेराई सत्र प्रारंभ होने पर किसानों को लगा था कि समय से भुगतान मिलेगा। शहर की एलएच शुगर मिल ने प्रारंभ में 14 दिन के अंतराल के स्थान पर एक सप्ताह के अंदर ही भुगतान शुरू कर दिया था लेकिन कुछ समय बाद चीनी के दामों में आई गिरावट के चलते एलएच मिल ने भुगतान से हाथ खींच लिए। इससे जिले की चारों मिलों पर गन्ना बकाए के आंकड़ा बढ़ता चला गया। भुगतान में सबसे खराब स्थिति बरखेड़ा की बजाज चीनी की रही। पहली मई से मिल बंद हो गई। इस दौरान मिले ने किसानों से 302.79 करोड़ रुपये मूल्य का गन्ना खरीदा जिसके बदले मात्र 110.80 करोड़ का ही भुगतान किया जो कुल गन्ना मूल्य का मात्र 36 प्रतिशत है। मिल पर अब भी 191.98 करोड़ रुपया बकाया है। इसके अलावा जिले की दोनों सहकारी मिलों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं रही। पूरनपुर पर 40.76 करोड़ एवं बीसलपुर मिल पर 41.96 करोड़ रुपया बकाया है। इन दोनों मिलों ने क्रमश: 82.06 करोड़ एवं 96.25 करोड़ रूपये मूल्य का गन्ना खरीद कर क्रमश: 41.29 करोड़ एवं 54.29 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। वहीं शहर स्थित एलएच मिल का भुगतान अन्य सभी मिलों से बेहतर रहा मिल अब भी कुल खरीदे गए गन्ने का 87.38 प्रतिशत भुगतान कर चुकी है। प्रारंभ में मिल ने समय से और नियमित भुगतान दिया लेकिन अंत समय में इस मिल का भुगतान भी अटकने लगा। एलएच का पेराई सत्र अभी चल रही है। अभी तक मिल ने 497.78 करोड़ रूपये का गन्ना खरीदा है जिसके सापेक्ष 434.96 करोड़ का भुगतान वह कर चुकी है। इस मिल अभी 62.82 करोड़ रुपया बकाया है। इस तरह चारों मिलों पर गन्ना किसानों का कुल मिलाकर 337.53 करोड़ रुपया बकाया है।
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मिलों से भुगतान के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बरखेड़ा मिल की चीनी बिक्री से प्राप्ति धनराशि से भुगतान कराया जा रहा है जबकि सहकारी मिलों के भुगतान के लिए शासन को लिखा गया है।
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राजेश्वर यादव, जिला गन्ना अधिकारी