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कागजों में तार फेंसिंग से फसलों की सुरक्षा
Updated Sun, 10 Dec 2017 07:12 PM IST
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जंगल में की गई तार फेंसिंग।
- फोटो : अमर उजाला
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माधोटांडा। वन्य जीवों से कृषि फसलों की सुरक्षा के लिए जंगल से सटे इलाकों में तार फेंसिंग कराई गई थी, लेकिन क्षतिग्रस्त होने के बाद न इनकी मानीटरिंग कराई गई और न ही मरम्मत। ऐसे में विधायक/सांसद निधि से या फिर सरकार की ओर से तार फेंसिंग कराने के नाम पर लाखों रुपये खर्च करने का क्या फायदा? टाइगर रिजर्व में जंगल किनारे लगाई गई तार फेंसिंग का इन दिनों कुछ ऐसा ही हाल है।
वन्यजीव जंगल से बाहर निकलकर सटे इलाकों मेें कृषि फसलों का खासा नुकसान करते हैं। यह भी सामने आया है कि वन्यजीवों के शिकार की तलाश में बाघ भी जंगल से बाहर निकल रहे हैं। मानवों पर हो रहे हमले भी इसी का नतीजा होना बताया जा रहा है। इस बात को लेकर किसान काफी हो हल्ला मचाते रहे हैं। जिसके बाद टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जंगल से सटे इलाकों में सांसद-विधायक निधि एवं सरकार से धनराशि लेकर तार फेंसिंग का कार्य शुरू कराया था। जो टाइगर रिजर्व की कई रेंजों में लगाई जा चुकी है, लेकिन इन दिनों इसकी हालत बहुत खराब है। कहीं लकड़ी बीनने वालों ने तो कहीं वन्यजीवों ने इसे जगह-जगह से क्षतिग्रस्त कर दिया है।
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डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने किसानों के सहयोग से कराई थी फेंसिंग
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने बराही, बसंतपुर नौनेर, केसरपुर सहित कई इलाकों मेें जंगल से सटे किसानों से तार फेंसिंग कराने में सहयोग लिया था। किसानों ने प्रति एकड़ जमीन के हिसाब से धन भी खर्च किया था। तार फेंसिंग की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग के साथ किसानों को दी गई थी। यह योजना लंबे समय तक कामयाब रही, लेकिन लकड़ी बीनने वालों ने साठगांठ कर जंगलों के भीतर घुसना शुरू कर दिया। इससे तार फेंसिंग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई और करंट का प्रवाह भी बंद हो गया। ऐसे में वन्यजीवों ने दोबारा फसलों को उजाड़ना शुरू कर दिया।
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तार फेंसिंग सुरक्षित रखने को मानीटरिंग जरूरी
जहां तार फेंसिंग लगाई गई, उन इलाकों में तार में करंट जारी रहे, इसको लेकर मानीटरिंग बेहद जरूरी है। यदि कहीं तार पौधों और पेड़ों की टहनियों को छू रहे हैं या कहीं वन्य जीवों के छलांग लगाने से तार फेंसिंग क्षतिग्रस्त हुई है तो उन सभी का मानीटरिंग कर पता लगाया जा सकता है। सच्चाई यह है किे तार फेंसिंग को लेकर मात्र कागजी घोड़े ही दौड़ाए जा रहे, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
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कई स्थानों में सिर्फ नाम के लिए रह गई तार फेंसिंग
बराही जंगल से सटे हल्दीडेंगा सहित कई इलाकों में गत वर्ष तार फेंसिंग कराई गई। बताते हैं कि यह तार फेंसिंग बेहद घटिया थी। जिसका नतीजा यह निकला कि कहीं तार ही टूट गए हैं तो कहीं लकड़ी बीनने वालों ने उसे दूसरे तार से बांध दिया या काट दिया है। वहीं अब वन्यजीव बड़े पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसा भी नहीं कि वन महकमे को इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन महकमा चुप्पी साधे बैठा है। जंगल के किनारे खेती करने वाले किसानों का कहना है कि गुणवत्तापरक तार फेंसिंग कराई जानी चाहिए और उसकी रोजाना मानीटरिंग भी जरूरी है।
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जंगल किनारे कराई गई सोलर तार फेंसिंग की वनकर्मी बराबर गश्त कर देख रहे हैं। बैटरी आदि खराबी होने पर उसे तत्काल सही कराया जा रहा है। जिन स्थानों पर तार फेंसिंग क्षतिग्रस्त है, उसे ठीक कराकर करंट चालू कराया जाएगा।
अनिल शाह, रेंजर बराही
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वन्यजीव जंगल से बाहर निकलकर सटे इलाकों मेें कृषि फसलों का खासा नुकसान करते हैं। यह भी सामने आया है कि वन्यजीवों के शिकार की तलाश में बाघ भी जंगल से बाहर निकल रहे हैं। मानवों पर हो रहे हमले भी इसी का नतीजा होना बताया जा रहा है। इस बात को लेकर किसान काफी हो हल्ला मचाते रहे हैं। जिसके बाद टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जंगल से सटे इलाकों में सांसद-विधायक निधि एवं सरकार से धनराशि लेकर तार फेंसिंग का कार्य शुरू कराया था। जो टाइगर रिजर्व की कई रेंजों में लगाई जा चुकी है, लेकिन इन दिनों इसकी हालत बहुत खराब है। कहीं लकड़ी बीनने वालों ने तो कहीं वन्यजीवों ने इसे जगह-जगह से क्षतिग्रस्त कर दिया है।
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डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने किसानों के सहयोग से कराई थी फेंसिंग
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने बराही, बसंतपुर नौनेर, केसरपुर सहित कई इलाकों मेें जंगल से सटे किसानों से तार फेंसिंग कराने में सहयोग लिया था। किसानों ने प्रति एकड़ जमीन के हिसाब से धन भी खर्च किया था। तार फेंसिंग की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग के साथ किसानों को दी गई थी। यह योजना लंबे समय तक कामयाब रही, लेकिन लकड़ी बीनने वालों ने साठगांठ कर जंगलों के भीतर घुसना शुरू कर दिया। इससे तार फेंसिंग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई और करंट का प्रवाह भी बंद हो गया। ऐसे में वन्यजीवों ने दोबारा फसलों को उजाड़ना शुरू कर दिया।
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तार फेंसिंग सुरक्षित रखने को मानीटरिंग जरूरी
जहां तार फेंसिंग लगाई गई, उन इलाकों में तार में करंट जारी रहे, इसको लेकर मानीटरिंग बेहद जरूरी है। यदि कहीं तार पौधों और पेड़ों की टहनियों को छू रहे हैं या कहीं वन्य जीवों के छलांग लगाने से तार फेंसिंग क्षतिग्रस्त हुई है तो उन सभी का मानीटरिंग कर पता लगाया जा सकता है। सच्चाई यह है किे तार फेंसिंग को लेकर मात्र कागजी घोड़े ही दौड़ाए जा रहे, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
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कई स्थानों में सिर्फ नाम के लिए रह गई तार फेंसिंग
बराही जंगल से सटे हल्दीडेंगा सहित कई इलाकों में गत वर्ष तार फेंसिंग कराई गई। बताते हैं कि यह तार फेंसिंग बेहद घटिया थी। जिसका नतीजा यह निकला कि कहीं तार ही टूट गए हैं तो कहीं लकड़ी बीनने वालों ने उसे दूसरे तार से बांध दिया या काट दिया है। वहीं अब वन्यजीव बड़े पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसा भी नहीं कि वन महकमे को इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन महकमा चुप्पी साधे बैठा है। जंगल के किनारे खेती करने वाले किसानों का कहना है कि गुणवत्तापरक तार फेंसिंग कराई जानी चाहिए और उसकी रोजाना मानीटरिंग भी जरूरी है।
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जंगल किनारे कराई गई सोलर तार फेंसिंग की वनकर्मी बराबर गश्त कर देख रहे हैं। बैटरी आदि खराबी होने पर उसे तत्काल सही कराया जा रहा है। जिन स्थानों पर तार फेंसिंग क्षतिग्रस्त है, उसे ठीक कराकर करंट चालू कराया जाएगा।
अनिल शाह, रेंजर बराही