{"_id":"5b367bbc4f1c1b64068b8e5c","slug":"101530297276-pilibhit-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब डायरिया से बचाएगी रोटावायरस वैक्सीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब डायरिया से बचाएगी रोटावायरस वैक्सीन
Updated Sat, 30 Jun 2018 12:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
29पीबीटीपी-1,2
अब डायरिया से बचाएगी रोटा वायरस वैक्सीन
क्रासर...
जुलाई से टीकाकरण में शामिल होगा रोटा वायरस
क्रासर...
कार्यशाला में ट्रेनर्स ने किया डॉक्टरों को प्रशिक्षित
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। डायरिया से हर साल बड़ी संख्या में होने वाली बच्चों की मौतों की संख्या पर रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब रोटावायरस वैक्सीन को नियमित टीकाकरण अभियान में शामिल किया जाएगा। इसको लेकर शहर स्थित एक होटल में कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें ट्रेनर्स द्वारा डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम में सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने कहा कि बच्चों का टीकाकरण समय से होना जरुरी है ताकि डायरिया की बीमारी के चलते बच्चों की मौत न हो। सीएमएस डॉ. रतन पाल सिंह सुमन ने कहा कि रोटा वायरस बच्चों में डायरिया के प्रति प्रतिरक्षण क्षमता में वृद्धि करता है। जिससे डायरिया का खतरा काफी कम हो जाता है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सीएम चतुर्वेदी ने बताया कि देश में लगभग 78 हजार लोगों की मौत हर साल डायरिया से होती है। जिसमें अधिकांश बच्चों पांच वर्ष से कम आयु के होते हैं। बच्चों की डायरिया से मृत्यु की दर कम करने के लिए नई वैक्सीन रोटा वायरस लॉच की गई है। वैक्सीन की पांच बूंदे बच्चे को पिलाई जाएंगी। अभी तक यह रोटा वायरस वैक्सीन को नियमित टीकाकरण देश के 10 राज्यों में लागू किया जा चुका है। 15 जुलाई के बाद से टीकाकरण अभियान में बच्चों को यह वैक्सीन दी जाने लगेगी।
3 से 7 दिनों तक रहता है असर
डब्लूएचओ के डॉ. पीके कौशल ने बताया कि रोटा वायरस एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है। यह बच्चों में दस्त पैदा करने का सबसे बड़ा कारण है जिसके कारण बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ सकता है या बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है। रोटा वायरस संक्रमण की शुरुआत हल्के दस्त से होती है, जो आगे जाकर गंभीर रूप ले सकता है। पर्याप्त इलाज न मिलने के कारण शरीर में पानी व नमक की कमी हो सकती है तथा कुछ मामलों में बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है। रोटा वायरस संक्रमण में गंभीर दस्त के साथ-साथ बुखार और उल्टियां भी होती हैं और कभी-कभी पेट में दर्द भी होता है। दस्त एवं अन्य लक्षण लगभग 3 से 7 दिनों तक रहते हैं।
विज्ञापन
ब्लाक स्तर पर दी जाएगी ट्रेनिंग
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सीएम चतुर्वेदी ने बताया कि रोटा वायरस वैक्सीन को नियमित टीकाकरण के लिए ट्रेनर्स द्वारा डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया गया है। यह डॉक्टर बतौर ट्रेनर ब्लॉक स्तर पर आशाओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, एनएनएम आदि को प्रशिक्षण देंगे। उन्होंने बताया कि बच्चों को रोटावायरस वैक्सीन की पांच बूंदे जन्म के 6, 10 और 14 हफ्ते की आयु पर पिलाई जाएगी।
विज्ञापन
अब डायरिया से बचाएगी रोटा वायरस वैक्सीन
क्रासर...
जुलाई से टीकाकरण में शामिल होगा रोटा वायरस
क्रासर...
कार्यशाला में ट्रेनर्स ने किया डॉक्टरों को प्रशिक्षित
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। डायरिया से हर साल बड़ी संख्या में होने वाली बच्चों की मौतों की संख्या पर रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब रोटावायरस वैक्सीन को नियमित टीकाकरण अभियान में शामिल किया जाएगा। इसको लेकर शहर स्थित एक होटल में कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें ट्रेनर्स द्वारा डॉक्टरों को प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम में सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने कहा कि बच्चों का टीकाकरण समय से होना जरुरी है ताकि डायरिया की बीमारी के चलते बच्चों की मौत न हो। सीएमएस डॉ. रतन पाल सिंह सुमन ने कहा कि रोटा वायरस बच्चों में डायरिया के प्रति प्रतिरक्षण क्षमता में वृद्धि करता है। जिससे डायरिया का खतरा काफी कम हो जाता है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सीएम चतुर्वेदी ने बताया कि देश में लगभग 78 हजार लोगों की मौत हर साल डायरिया से होती है। जिसमें अधिकांश बच्चों पांच वर्ष से कम आयु के होते हैं। बच्चों की डायरिया से मृत्यु की दर कम करने के लिए नई वैक्सीन रोटा वायरस लॉच की गई है। वैक्सीन की पांच बूंदे बच्चे को पिलाई जाएंगी। अभी तक यह रोटा वायरस वैक्सीन को नियमित टीकाकरण देश के 10 राज्यों में लागू किया जा चुका है। 15 जुलाई के बाद से टीकाकरण अभियान में बच्चों को यह वैक्सीन दी जाने लगेगी।
विज्ञापन
3 से 7 दिनों तक रहता है असर
डब्लूएचओ के डॉ. पीके कौशल ने बताया कि रोटा वायरस एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है। यह बच्चों में दस्त पैदा करने का सबसे बड़ा कारण है जिसके कारण बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ सकता है या बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है। रोटा वायरस संक्रमण की शुरुआत हल्के दस्त से होती है, जो आगे जाकर गंभीर रूप ले सकता है। पर्याप्त इलाज न मिलने के कारण शरीर में पानी व नमक की कमी हो सकती है तथा कुछ मामलों में बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है। रोटा वायरस संक्रमण में गंभीर दस्त के साथ-साथ बुखार और उल्टियां भी होती हैं और कभी-कभी पेट में दर्द भी होता है। दस्त एवं अन्य लक्षण लगभग 3 से 7 दिनों तक रहते हैं।
विज्ञापन
ब्लाक स्तर पर दी जाएगी ट्रेनिंग
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सीएम चतुर्वेदी ने बताया कि रोटा वायरस वैक्सीन को नियमित टीकाकरण के लिए ट्रेनर्स द्वारा डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया गया है। यह डॉक्टर बतौर ट्रेनर ब्लॉक स्तर पर आशाओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, एनएनएम आदि को प्रशिक्षण देंगे। उन्होंने बताया कि बच्चों को रोटावायरस वैक्सीन की पांच बूंदे जन्म के 6, 10 और 14 हफ्ते की आयु पर पिलाई जाएगी।