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राष्ट्रपति चुनाव पाकिस्तान में, धड़कनें बढ़ी हैं आगरा की

Mon, 29 Jul 2013 09:32 AM IST
आगरा/एजेंसी
आगरा/एजेंसी Updated Mon, 29 Jul 2013 09:32 AM IST
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pak presidential mamnoon hussain hopeful family fondly remembered in agra

मुहब्बत की नगरी आगरा की फिजाओं में इस वक्त उत्साह का माहौल है।

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पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी पीएमएल-एन द्वारा ताज नगरी में जन्मे ममनून हुसैन को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद पूरा शहर अपने आंगन के बच्चे को पड़ोसी मुल्क का राष्ट्रपति बनते देखने को बेताब है।

साल 1940 ममनून की पैदाइश आगरा में हुई। बंटवारे के बाद 1948 में उनका परिवार कराची चला गया। आगरा में उनके कई करीबी रिश्तेदार और परिचित अब भी रहते हैं। वे अब ममनून के राष्ट्रपति निर्वाचित होने की बाट जोह रहे हैं।
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पुराने दस्तावेजों के मुताबिक, सन 1600 के आसपास ख्वाजा गुलाम मोइयोद्दीन ने नाई की मंडी में खोजा की हवेली के नाम से हवेली बसाई थी। इसी हवेली के परिसर में ममनून का परिवार रहता था।
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एक जमाने में शहर के मशहूर लोगों की जमात इसी हवेली में रहा करती थी। मुगल बादशाह औरंगजेब की सल्तनत के समय जो इतिहास लिखा गया, उसे लिखने वाले खोजा हवेली परिसर में रहते थे।

ममनून का परिवार विभाजन पाकिस्तान चला गया था। बंटबारे के बाद यहां सिंधी व पंजाबी परिवार आकर रहने लगे। वर्तमान में दो हिस्सों में बंटी पुरखों की हवेली का एक हिस्सा बेकरी में तब्दील हो चुका है।

हवेली के दूसरे हिस्से में आज भी ममनून के रिश्तेदार रहते हैं। यहां ममनून के बचपन की यादें अब भी जिंदा हैं। अब इस हवेली को कीर्तिनगर के नाम से जाना जाता है।

ममनून के खानदान को जानने वाले कांग्रेसी नेता मुबारक कुरैशी के मुताबिक, ममनून के दादा उस्ताद जफर बहुत अच्छे तैराक थे, जिनका जूता के कारोबार में काफी नाम था। ममनून के ताऊ मोहम्मद उस्मान शहीद नगर इलाके में रहते हैं।

ममनून के रिश्तेदार हाजी निजामुद्दीन बताते हैं कि उस्ताद जफर के एक बेटा कल्लू और एक बेटी मुन्नी थी। ममनून की पैदाइश के सात साल बाद देश का बंटवारा हुआ उसी समय उस्ताद जफर परिवार के साथ कराची चले गए।

आज भी याद है आगरा का पेठा
ताज नगरी में रहने वाले ममनून के रिश्तेदारों का कहना है कि ममनून आज भी आगरा की तंग गलियों को नही भूले हैं।

उन्हें शहर के मशहूर पेठों के अलावा, दालमोठ और मंटोला की बिरयानी बेहद पसंद है। वह आगरा आकर अपने अजीजों को कभी नहीं भूलते और उनके घर पर खाना खाना पसंद करते थे।


लगभग तय है राष्ट्रपति बनाना
प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी से उम्मीवार घोषित किए जाने के बाद ममनून का पाकिस्तान का राष्ट्रपति बनाना तय है।

दरअसल वहां मुख्य विपक्षी पीपीपी ने चुनाव का बहिष्कार करने की घोषणा की है। राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबलियों में सदस्य संख्या के हिसाब से पीएमएल-एन के पास सबसे ज्यादा ताकत है।

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