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ओम बाबा पहले भी एक किले में करवा चुके हैं खुदाई
एसपी मिश्र/चित्रकूट
Updated Sun, 20 Oct 2013 08:26 AM IST
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उत्तर प्रदेश के डौंडिया खेड़ा के राव रामबक्श सिंह के किले की तरह एक दशक पहले यहां ऐंचवारा में भी खजाने की खोज हुई थी। स्वामी ओम ने ऐंचवारा गढ़ी स्थित आश्रम में हवन कराया था। उस समय उन्हें लोग उघारी बाबा के नाम से जानते थे।
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गांव के वृद्ध जनों का कहना है कि हवन के समय उनके साथ शोभन सरकार भी मौजूद थे। उसके बाद कई दर्जन मजदूर और जेसीबी मशीन से किला गढ़ी में खुदाई का काम शुरू हुआ था। उघारी बाबा के करीबी राम प्रकाश का कहना है अभी दो माह पूर्व ही बाबा शोभन सरकार के साथ कानपुर गए थे। उसके बाद उन्नाव में खजाने की चर्चा फैल गई।
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ऐंचवारा के ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2001 में ओम बाबा आए थे। शरीर पर सिर्फ एक धोती लपेटे होने के कारण उन्हें उघारी बाबा कहा जाने लगा। शुरुआत में बाबा अपने हाथ से पैसा नहीं छूते थे। धोती में कमर के पास पैसा लपेटे रहते थे। कोई सामान खरीदते समय वह लोगों को बताते कि कमर में पैसा बंधा है, निकाल लो। उसके बाद बचा हुआ पैसा वापस रख दो।
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चार साल बाद बाबा ने लोगों से मंदिर निर्माण कराने और विकास का वादा किया। इसके बाद गांव के तत्कालीन प्रधान नंद किशोर तिवारी की मदद से लोगों ने उन्हें जमीन भी दान दी। कुछ लोगों से बाबा ने जमीन भी खरीदी। उसी स्थान पर आश्रम और बजरंगबली का मंदिर है।
इसी दौरान गढ़ी की खुदाई करने पर ग्रामीणों ने काफी विरोध किया। उसके बाद गढ़ी स्थित कुंआ बंद करा दिया गया। गांव के खेमराज सिंह ने बताया उघारी बाबा ने विकास के लिए कहा था, इसलिए मंदिर के लिए जमीन दान की थी। जब हवन के बाद गुप्त तरीके से खुदाई शुरू हुई तो पीछे हट गए।
गांव के बुजुर्ग रमेश कुमार तिवारी ने बताया जिस जगह पर उघारी बाबा का आश्रम है, वहां कायस्थ समाज के जमींदार का किला था। अंग्रेजों के आक्रमण के समय नदी के पास से तोप से हमला हुआ था। जमींदार की तरफ से भी गोलाबारी की गई थी। आखिर में उन्होंने अपना सारा धन किला और कुएं में दबाकर जान दे दी थी। तब से माना जा रहा है कि कुएं में खजाना है। उस समय खुदाई के दौरान छोटी-छोटी ईटें निकली थीं।