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जमीन से पानी नहीं निकालेगा नोएडा
Noida
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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नोएडा। देश में नोएडा ऐसा पहला शहर होगा, जहां भूमिगत जल को निकालना बंद कर दिया जाएगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए गंगाजल परियोजना को अगले वर्ष मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके बाद प्राधिकरण को अतिरिक्त पानी भी मिलेगा।
नोएडा में प्रतिदिन 190 से 215 मिलियन लीटर डेली (एमएलडी) पानी की आवश्यकता है। मौजूदा समय में नोएडा को 48 एमएलडी पानी गंगाजल के रूप में मिलता है, जबकि रेनीवेल और अन्य साधनों से मिलाकर कुल 368 एमएलडी पानी है। गंगाजल परियोजना की समीक्षा में निर्धारित किया गया है कि अगले वर्ष मार्च तक लक्ष्य को पूरा किया जाएं। मुख्य कार्यपालक अधिकारी संजीव सरन ने बताया कि नोएडा देश का पहला ऐसा शहर होगा, जहां जमीन से पानी निकालने की व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। परियोजना के पूरा होने पर नोएडा को 192 एमएलडी पानी और मिलेगा। जिसके साथ कुल गंगाजल 240 एमएलडी हो जाएगा। संजीव सरन का कहना है कि मौजूदा आबादी आठ लाख है, जबकि चार लाख लोगों का आना जाना लगा रहता है। इन्हें 190 से 210 एमएलडी की सप्लाई दी जाती है। अनुमान के मुताबिक अगले पांच सालों में आबादी बढ़कर 12 से 15 लाख पहुंचेगी, जबकि पानी की मांग 230 से 240 एमएलडी तक पहुंचेगी। ऐसे में नोएडा के पास सारे संसाधनों को मिलाकर कुल 570 एमएलडी पानी होता है। भविष्य में मांग की आपूर्ति होने के बाद करीब 330 एमएलडी पानी बचेगा। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में जमीन से पानी निकालने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे भूगर्भ का जलस्तर बढ़ेगा।
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नोएडा में प्रतिदिन 190 से 215 मिलियन लीटर डेली (एमएलडी) पानी की आवश्यकता है। मौजूदा समय में नोएडा को 48 एमएलडी पानी गंगाजल के रूप में मिलता है, जबकि रेनीवेल और अन्य साधनों से मिलाकर कुल 368 एमएलडी पानी है। गंगाजल परियोजना की समीक्षा में निर्धारित किया गया है कि अगले वर्ष मार्च तक लक्ष्य को पूरा किया जाएं। मुख्य कार्यपालक अधिकारी संजीव सरन ने बताया कि नोएडा देश का पहला ऐसा शहर होगा, जहां जमीन से पानी निकालने की व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा। परियोजना के पूरा होने पर नोएडा को 192 एमएलडी पानी और मिलेगा। जिसके साथ कुल गंगाजल 240 एमएलडी हो जाएगा। संजीव सरन का कहना है कि मौजूदा आबादी आठ लाख है, जबकि चार लाख लोगों का आना जाना लगा रहता है। इन्हें 190 से 210 एमएलडी की सप्लाई दी जाती है। अनुमान के मुताबिक अगले पांच सालों में आबादी बढ़कर 12 से 15 लाख पहुंचेगी, जबकि पानी की मांग 230 से 240 एमएलडी तक पहुंचेगी। ऐसे में नोएडा के पास सारे संसाधनों को मिलाकर कुल 570 एमएलडी पानी होता है। भविष्य में मांग की आपूर्ति होने के बाद करीब 330 एमएलडी पानी बचेगा। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में जमीन से पानी निकालने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे भूगर्भ का जलस्तर बढ़ेगा।
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