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अदालती मामलों में उलझा प्राधिकरण
Noida
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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नोएडा। देश दुनिया के लिए मिसाल नोएडा अदालती मामलों में उलझकर रह गया है। अधिकांश विभाग के अधिकारी रोजाना लखनऊ और इलाहाबाद का दौरा कर रहे हैं, जिसकी वजह से प्राधिकरण में विकास कार्यों की रफ्तार थम सी गई है। वहीं, रोजमर्रा के कार्यों को निस्तारित करने में भी समस्या आ रही है।
पिछले एक साल से नोएडा के विकास की रफ्तार थमी सी हुई है। दिसंबर में चुनावी आचार संहिता लागू होने की वजह से मार्च तक कार्य बंद रहे। इसके बाद मई तक सीईओ और चेयरमैन की कुर्सी खाली होने की वजह से कार्यों को निस्तारित करने में समस्या आई। इसी बीच अदालती मामलों की संख्या अचानक बढ़ जाने की वजह से कार्यों को तेजी से नहीं किया जा रहा है। सेक्टर छह प्रशासनिक कार्यालय में अधिकांश विभागाध्यक्ष और अधिकारी लखनऊ और इलाहाबाद के दौरे पर हैं, जिसकी वजह से रोजमर्रा के कार्यों में भी दिक्कत आ रही है।
जमीन से जुड़े हुए मामलों की संख्या बढ़ने से लैंड विभाग के अधिकारी लगातार बाहर हैं, जबकि औद्योगिक विभाग में सारे काम बंद पड़े हुए हैं। यहां पर प्रदूषण को लेकर एनजीटी में मामले की सुनवाई हो रही है। निर्धारित समय से दो महीने बाद बजट जारी होने की वजह से लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। दूसरी तरफ सीईओ और चेयरमैन को लेकर रोजाना नई-नई चर्चाएं हो रही हैं, जिसकी वजह से निर्णय होने में दिक्कत आ रही है।
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पिछले एक साल से नोएडा के विकास की रफ्तार थमी सी हुई है। दिसंबर में चुनावी आचार संहिता लागू होने की वजह से मार्च तक कार्य बंद रहे। इसके बाद मई तक सीईओ और चेयरमैन की कुर्सी खाली होने की वजह से कार्यों को निस्तारित करने में समस्या आई। इसी बीच अदालती मामलों की संख्या अचानक बढ़ जाने की वजह से कार्यों को तेजी से नहीं किया जा रहा है। सेक्टर छह प्रशासनिक कार्यालय में अधिकांश विभागाध्यक्ष और अधिकारी लखनऊ और इलाहाबाद के दौरे पर हैं, जिसकी वजह से रोजमर्रा के कार्यों में भी दिक्कत आ रही है।
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जमीन से जुड़े हुए मामलों की संख्या बढ़ने से लैंड विभाग के अधिकारी लगातार बाहर हैं, जबकि औद्योगिक विभाग में सारे काम बंद पड़े हुए हैं। यहां पर प्रदूषण को लेकर एनजीटी में मामले की सुनवाई हो रही है। निर्धारित समय से दो महीने बाद बजट जारी होने की वजह से लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। दूसरी तरफ सीईओ और चेयरमैन को लेकर रोजाना नई-नई चर्चाएं हो रही हैं, जिसकी वजह से निर्णय होने में दिक्कत आ रही है।
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