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जगद्गुरु ने विश्व शांति के लिए किया अनुष्ठान
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 16 Sep 2016 01:31 AM IST
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शुक्रताल में कथा सुनाते संत।
- फोटो : अमर उजाला
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मोरना भागवत उद्धगम स्थल शुक्रताल के श्री लक्ष्मी नारायण आश्रम मंदिर में सात दिवसीय भागवत कथा का समापन हो गया। जिसमें जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राज राजेश्वराश्रम जी महाराज ने विश्व शांति के लिए अनुष्ठान कराया। इसके बाद साधु, संतों को दान दक्षिणा दी गई।
ब्रह्मलीन अनंत श्री विभूषित यति सम्राट वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी श्री प्रकाशानंद जी महाराज की स्मृति में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राज राजेश्वराश्रम जी महाराज के सानिध्य में आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा संपन्न हुई। कथा व्यास याज्ञिक गणपति देवज्ञ महाराज ने कहा कि मानव का इच्छाओं पर नियंत्रण होना चाहिए।
यदि उन पर अंकुश नहीं, सीमा निर्धारित नहीं की, उन्हें सही दिशा नहीं दी गई, तो ये भी विनाशकारी सिद्ध होंगी। अनियंत्रित इंद्रिया इच्छाओं के कारण आज समाज में कितना दुख, अशांति, अपराध, हिंसा और विकार हैं।
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मानव इच्छाओं की पूर्ति में बाधक को शत्रु समझते हैं पर यह नहीं समझते की इच्छा ही शत्रु है। लोग कहते हैं कि इच्छा नहीं होगी तो विकास कैसे होगा। इच्छा के बिना मानव आगे कैसे बढ़ेगा। वास्तव में आवश्यकता के कारण यह होता है। मानव जाति के भलाई के लिए मानव को सामाजिक विकास, चरित्र विकास और शारीरिक विकास के बारे में कार्य करने होंगे।
मानव कल्याण के लिए भागवत कथा का रसपान अवश्य करें। तभी उसका उद्धार होगा। कथा के आयोजन में मानव समिति जगद्गुरु आश्रम जयपुर के बद्री नारायण गौड़, समुद्र सिंह, शंकरलाल जोगी, राजीव भार्गव, मूलचंद, बद्री प्रसाद, सोनी, प्यारे मोहन, शिवकुमार त्यागी, भोलाराम शास्त्री आदि मौजूद रहे।
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ब्रह्मलीन अनंत श्री विभूषित यति सम्राट वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी श्री प्रकाशानंद जी महाराज की स्मृति में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राज राजेश्वराश्रम जी महाराज के सानिध्य में आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा संपन्न हुई। कथा व्यास याज्ञिक गणपति देवज्ञ महाराज ने कहा कि मानव का इच्छाओं पर नियंत्रण होना चाहिए।
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यदि उन पर अंकुश नहीं, सीमा निर्धारित नहीं की, उन्हें सही दिशा नहीं दी गई, तो ये भी विनाशकारी सिद्ध होंगी। अनियंत्रित इंद्रिया इच्छाओं के कारण आज समाज में कितना दुख, अशांति, अपराध, हिंसा और विकार हैं।
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मानव इच्छाओं की पूर्ति में बाधक को शत्रु समझते हैं पर यह नहीं समझते की इच्छा ही शत्रु है। लोग कहते हैं कि इच्छा नहीं होगी तो विकास कैसे होगा। इच्छा के बिना मानव आगे कैसे बढ़ेगा। वास्तव में आवश्यकता के कारण यह होता है। मानव जाति के भलाई के लिए मानव को सामाजिक विकास, चरित्र विकास और शारीरिक विकास के बारे में कार्य करने होंगे।
मानव कल्याण के लिए भागवत कथा का रसपान अवश्य करें। तभी उसका उद्धार होगा। कथा के आयोजन में मानव समिति जगद्गुरु आश्रम जयपुर के बद्री नारायण गौड़, समुद्र सिंह, शंकरलाल जोगी, राजीव भार्गव, मूलचंद, बद्री प्रसाद, सोनी, प्यारे मोहन, शिवकुमार त्यागी, भोलाराम शास्त्री आदि मौजूद रहे।