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विश्व कैंसर दिवस : 11 साल के बच्चे ने जीती कैंसर से पहली जंग

Fri, 04 Feb 2022 12:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 04 Feb 2022 12:27 AM IST
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World Cancer Day: 11-year-old boy wins first battle with cancer
रतनपुरी क्षेत्र से बह रही काली नदी। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
भोपा। उपचार के साथ हौसला भी कैंसर से लड़ने में मदद करता है। भोकरहेड़ी के 11 साल के युगांश गर्ग ने कैंसर को मात दी है। परिजनों का कहना है कि हमेशा वह हिम्मत दिखाता है।
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भोकरहेड़ी निवासी पंकज गर्ग ने बताया कि उसके बेटे युगांश गर्ग की 11 वर्ष उम्र है। वह बताते हैं कि लगभग सात वर्ष पूर्व उसके बेटे का स्वास्थ्य खराब हुआ, तो उसने उसका चेकअप कराया। इसके बाद पता चला कि चार वर्ष की उम्र में युगांश गर्ग को ब्लड कैंसर की बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया। पंकज शर्मा ने हिम्मत के साथ अपने बेटे का उपचार कराया, तो कैंसर से पहली जंग जीत ली। तीन वर्ष बाद एक बार फिर युगांश कैंसर की एक दूसरी बीमारी टेस्ट यूनी की चपेट में आ गया। दिल्ली एम्स में इलाज चल रहा है। पंकज गर्ग ने बताया कि वह 90 प्रतिशत ठीक हो चुका है और उसे उम्मीद है की उसका एक दिन कैंसर की बीमारी को जरूर मात देगा।
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मुंह के कैंसर से मिली निजात
भोपा निवासी युवा नेता विजय राठी के मुंह में 2010 में कुछ परेशानी हुई तो उन्होंने अपना चेकअप कराया जिसके बाद मुंह में कैंसर की बीमारी की पुष्टि हुई। विजय राठी ने हिम्मत नहीं हारी और वह संघर्ष करते रहे। डेढ़ साल के बाद उनका सफल ऑपरेशन हुआ। हालांकि उनके मुंह से क्लियर आवाज नहीं निकल पाती है, लेकिन वह पूर्ण रूप से स्वस्थ है।
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कैंसर से जीत गया ओमप्रकाश
गांव यूसुफपुर निवासी ओम प्रकाश 62 वर्ष को लगभग 15 वर्ष पहले मुंह में कैंसर हो गया था उन्होंने नियमित रूप से अपना उपचार कराने के साथ ही हिम्मत नहीं तोड़ी, जिससे कैंसर पर विजय हासिल की। ओमप्रकाश के मुख से भी साफ आवाज नहीं निकल पाती हैं।
नदी से यहां फैल रही बीमारियां
रतनपुरी। क्षेत्र में काली नदी के प्रदूषित जल के कारण नदी के किनारे बसे कई गांवों के निवासी वर्षों से कैंसर, हेपेटाइटिस और त्वचा संबंधी जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे हैं। रतनपुरी क्षेत्र के रामपुर, घनश्यामपुरा, समौली, डबल, इंचौड़ा, कितास, रतनपुरी, मंडावली खादर आदि गांव काली नदी के किनारे पर बसे हैं। जिनमें कैंसर का प्रकोप है। जिससे दूषित पेयजल के कारण काली नदी के किनारे बसे गांवों में कैंसर का प्रकोप बहुत अधिक देखने को मिल रहा है। हेपेटाइटिस और त्वचा संबंधी रोगों के प्रसार भी काफी हद तक बढ़ा है।
डबल गांव में कहर बरपा रहा कैंसर
रतनपुरी। डबल गांव से अभी तक करीब 24 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा रतनपुरी में भी 12 से अधिक लोग कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के कारण काल के ग्रास में समा चुके हैं। इसके अलावा बहुत बड़ी संख्या में यहाँ के ग्रामीण अभी भी कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे हैं। डबल निवासी सतीश पुत्र जगदीश पिछले करीब साढ़े चार वर्षों से कैंसर से पीड़ित हैं। इसके अलावा रतनपुरी निवासी ममता पत्नी सुनील भी पिछले चार वर्ष से कैंसर से पीड़ित है।
जब साफ हुआ करता था नदी का पानी
गांव निवासी बुजुर्ग चरत सिंह, कुंवरपाल सिंह, पूर्व प्रधान रिछपाल सिंह, भंवर सिंह आदि का कहना है कि करीब अट्ठारह वर्ष पूर्व काली नदी का पानी बिल्कुल साफ हुआ करता था। लेकिन फैक्टरियों के प्रदूषित कचरा और पानी के काली नदी में गिरने के कारण अब इसका जल पूर्ण रूप से दूषित जो चुका है।

जिले में उपलब्ध नहीं कैंसर का उपचार
जिले के सरकारी अस्पतालों में कैंसर का उपचार उपलब्ध नहीं है। सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टर और कैंसर के इलाज की सुविधा जिले में नहीं है।
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