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नई शिक्षा नीति से युवाओं के सपने होंगे साकार

Thu, 30 Jul 2020 11:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2020 11:36 PM IST
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With the new education policy, the dreams of the youth will come true
शिक्षक डॉ सतीश त्यागी। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
नई शिक्षा नीति से युवाओं के सपने होंगे साकार
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मुजफ्फरनगर। शिक्षाविदों ने देश की नई शिक्षा नीति की सराहना की है। शिक्षाविदों ने केंद्र सरकार के कदम को दूरगामी और राष्ट्र के युवाओं के हित में बताया है। शिक्षा को मातृभाषा से जोड़ने के साथ ही रोजगारपरक बनाने की ओर कदम बढ़ाया गया है। नई शिक्षा नीति से युवाओं को और अधिक आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। साथ ही युवाओं के सपने साकार होंगे।
एसडी कॉलेज के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ सतीश त्यागी कहते हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत बदलाव की मांग लंबे समय से थी, जिसे 34 वर्ष बाद अब कहीं जाकर साकार रूप मिला है। मेडिकल-विधि के अलावा पूरी उच्च शिक्षा को एक रेगुलेटरी एजेंसी के तहत लाना स्वागत योग्य कदम है। कला अथवा विज्ञान जैसे विषय संकाय विभाजन के स्थान पर पहली बार विद्यार्थी को अपनी रुचि के अनुरूप मल्टी डिसीप्लिनरी ऑप्शन के तहत विषय चुनने की आजादी होगी। साथ ही विदेशों की तरह मल्टीपल एंट्री तथा एग्जिट ऑप्शन के रूप में क्रेडिट ट्रांसफर की भी सुविधा प्राप्त होगी, जिससे विद्यार्थियों की रुचि और कार्य प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। साथ ही किसी संकाय विशेष में पढ़ने की बाध्यता विद्यार्थी की समाप्त होगी तथा विज्ञान का छात्र राजनीतिशास्त्र और इतिहास पढ़ सकेगा, जिससे बहुमुखी व्यक्तित्व का विकास होगा।
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डीएवी कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अमित मलिक कहते हैं कि नवीन शिक्षा नीति एक बहुप्रतीक्षित शिक्षा नीति है, जो लगभग साढे़ तीन दशक बाद अस्तित्व में आई है। इसमें विशेष तौर पर कौशल आधारित शिक्षा पर जोर दिया गया है और शिक्षा को रोजगारपरक बनाने का प्रयास भी हुआ है। इस नीति में मातृभाषा पर भी जोर दिया गया है, जो स्वागत योग्य है और साथ ही अब विदेशी यूनिवर्सिटी को भारत आने का मौका मिलेगा।
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राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक एवं डीएवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शिव कुमार यादव कहते हैं कि भारत सरकार द्वारा बहुत लंबे समय के बाद नई शिक्षा नीति घोषित की गई है, जिसमें कक्षा दस का महत्व कम किया गया है। कक्षा दस के बाद रोजगारपरक शिक्षा पर जोर दिया गया है, जो आमजन के लिए लाभदायक होगा। कक्षा बारहवीं के बाद चार साल का बीएड कोर्स होगा, जो ग्रेजुएशन सहित होगा, यह छात्रों के हित में होगा। एमए के साथ बीएड एक वर्ष का ही होगा यह नीति लाभकारी होगी। शिक्षकों के लिए भी बीच-बीच में प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। उच्च प्राथमिक विद्यालय शेरनगर की अध्यापिका रेनु शर्मा कहती हैं कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता को नई ऊर्जा देगी, क्योंकि 5वीं तक मातृभाषा में पढ़ाई से उन्हें भारतीय संस्कृति, सभ्यता, संस्कारों और जीवन मूल्यों को जानने, समझने और दृढ़ता से अपनाने का मौका मिलेगा। स्थानीय भाषा में शिक्षा पाठ्यक्रम पढ़ने से अभिभावकों से बच्चे सीधे जुड़ेंगे। भारत को एकसूत्र में बांधने के लिए राष्ट्र भाषा हिंदी में कक्षा पांच तक अध्ययन से भावी पीढ़ी की नींव मजबूत होगी।
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