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मुजफ्फरनगर की सभी सीटों पर भाजपा की शानदार जीत
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 12 Mar 2017 12:29 AM IST
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जिले की सभी सीटों पर जीतने के बाद शिव चौक पर जुटे भाजपाई।
- फोटो : अमर उजाला
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विधानसभा चुनाव में नतीजे चौंकाने वाले रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू मतदाताओं के सिर चढ़कर बोला। जिले की सभी छह सीटों पर कमल खिल गया। सपा-कांग्रेस गठबंधन दूसरे और बसपा तीसरे स्थान पर रही। बसपा की हार से उसके समर्थकों को काफी झटका लगा है। रालोद की सबसे ज्यादा दुर्गति हुई है। रालोद का कोई प्रत्याशी जमानत नहीं बचा पाया।
शहर सीट पर भाजपा के कपिलदेव अग्रवाल ने सपा के गौरव स्वरूप को शिकस्त दी। गौरव पूर्व राज्यमंत्री चितरंजन स्वरूप के बेटे हैं। दंगे में एक साल जेल में रहे विक्रम सैनी खतौली सीट से रिकार्ड मतों से विजयी हुए हैं। उन्होंने पूर्व सांसद संजय चौहान के बेटे सपा प्रत्याशी चंदन सिंह चौहान को हराया है। दंगा प्रभावित बुढ़ाना विधानसभा सीट पर उमेश मलिक ने जीत दर्ज की है। उमेश ने सपा के प्रमोद त्यागी को पराजित किया है।
चरथावल सीट पर भाजपा के विजय कुमार कश्यप ने सपा के मुकेश चौधरी को हरा दिया है। पुरकाजी सुरक्षित सीट पर भाजपा उम्मीदवार प्रमोद ऊंटवाल ने बाजी मारी है। उन्होंने कांग्रेस-सपा गठबंधन प्रत्याशी एवं पूर्व मंत्री दीपक कुमार को हराया है। मीरापुर सीट पर पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना चुनाव जीत गए हैं। भड़ाना ने सपा प्रत्याशी लियाकत अली को शिकस्त दी है।
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वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर दंगा पूरी दुनिया में सुर्खियां में रहा। लोकसभा चुनाव में जैसा मतों का ध्रुवीकरण हुआ था, वैसा ही विधानसभा चुनाव में भी दिखाई दिया। अति पिछड़ी जातियों और आम आदमी ने मोदी पर भरोसा दिखाया। जातीय समीकरणों के आधार पर देखें तो सपा को मुस्लिमों का बंपर वोट मिला, लेकिन अन्य किसी बिरादरी के वोट नहीं मिले।
बसपा को केवल दलितों का ही वोट मिल सका। इसलिए बहनजी के सारे प्रत्याशी लड़ाई से बाहर हो गए। हैरानी की बात यह रही कि बसपा से जो मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में थे, उन्हें भी मुस्लिमों के वोट नहीं मिले। किसान राजनीति के गढ़ में रालोद के उम्मीदवार जमानत भी नहीं बचा पाए। बुढ़ाना में पूर्व मंत्री योगराज सिंह ही सबसे ज्यादा 23732 मत ले पाए।
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शहर सीट पर भाजपा के कपिलदेव अग्रवाल ने सपा के गौरव स्वरूप को शिकस्त दी। गौरव पूर्व राज्यमंत्री चितरंजन स्वरूप के बेटे हैं। दंगे में एक साल जेल में रहे विक्रम सैनी खतौली सीट से रिकार्ड मतों से विजयी हुए हैं। उन्होंने पूर्व सांसद संजय चौहान के बेटे सपा प्रत्याशी चंदन सिंह चौहान को हराया है। दंगा प्रभावित बुढ़ाना विधानसभा सीट पर उमेश मलिक ने जीत दर्ज की है। उमेश ने सपा के प्रमोद त्यागी को पराजित किया है।
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चरथावल सीट पर भाजपा के विजय कुमार कश्यप ने सपा के मुकेश चौधरी को हरा दिया है। पुरकाजी सुरक्षित सीट पर भाजपा उम्मीदवार प्रमोद ऊंटवाल ने बाजी मारी है। उन्होंने कांग्रेस-सपा गठबंधन प्रत्याशी एवं पूर्व मंत्री दीपक कुमार को हराया है। मीरापुर सीट पर पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना चुनाव जीत गए हैं। भड़ाना ने सपा प्रत्याशी लियाकत अली को शिकस्त दी है।
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वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर दंगा पूरी दुनिया में सुर्खियां में रहा। लोकसभा चुनाव में जैसा मतों का ध्रुवीकरण हुआ था, वैसा ही विधानसभा चुनाव में भी दिखाई दिया। अति पिछड़ी जातियों और आम आदमी ने मोदी पर भरोसा दिखाया। जातीय समीकरणों के आधार पर देखें तो सपा को मुस्लिमों का बंपर वोट मिला, लेकिन अन्य किसी बिरादरी के वोट नहीं मिले।
बसपा को केवल दलितों का ही वोट मिल सका। इसलिए बहनजी के सारे प्रत्याशी लड़ाई से बाहर हो गए। हैरानी की बात यह रही कि बसपा से जो मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में थे, उन्हें भी मुस्लिमों के वोट नहीं मिले। किसान राजनीति के गढ़ में रालोद के उम्मीदवार जमानत भी नहीं बचा पाए। बुढ़ाना में पूर्व मंत्री योगराज सिंह ही सबसे ज्यादा 23732 मत ले पाए।