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Muzaffarnagar News: आखिर हिंडन नदी पर सिकंदरपुर के ग्रामीणों को कब मिलेगा पुल
Tue, 20 Aug 2024 03:53 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 20 Aug 2024 03:53 AM IST
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चरथावल। हिंडन नदी में जोखिम उठाकर ग्रामीण पानी से होकर खेतों में जाने को मजबूर हैं। रोजाना जान जोखिम में डालकर दर्जनों महिलाएं और मजदूरी पेशा लोग नदी का पानी पार कर पशुओं के लिए चारा लेकर आते हैं। बरसात की वजह से बल्लियों का पुल पानी के कारण टूट कर नदी किनारे पड़ा है, जिससे पानी के गुजरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
सिकंदरपुर गांव के किसानों का सैकड़ों बीघे का कृषि भूमि का रकबा हिंडन नदी के पार है। खेतों में जाने के लिए किसानों और मजदूूरों को नदी पार करनी होती है। ट्रैक्टर और बुग्गी लेकर गांव वालों को वाया न्यामू से जाना पड़ता है। पुल की दूरी करीब पांच किमी है।
बरसात के बाद ग्रामीण खुद बल्लियों का पुल बनाकर जुगाड़ कर लेते हैं। लेकिन फिलहाल पहाड़ों पर बारिश के कारण पिछले दिनों हिंडन में पानी अधिक आने से पुल टूट चुका है।
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ग्राम प्रधान मौ.रजा बताते है नदी पार गांव वालों की दो बीघा जमीन श्मशान घाट की है। जोखित उठाकर लोगों को मजबूरन शवों का अंतिम संस्कार करने बल्लियां के पुल से जाना पड़ता है। महिलाएं और किशोरियां खेतों से चारा लाती हैं। उनकी जान जोखिम में रहती है। करीब डेढ़ साल से ग्रामीण और भाकियू अस्थायी पुल बनवाने की मांग को पानी में धरना प्रदर्शन कर चुके हैं।
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सिकंदरपुर गांव के किसानों का सैकड़ों बीघे का कृषि भूमि का रकबा हिंडन नदी के पार है। खेतों में जाने के लिए किसानों और मजदूूरों को नदी पार करनी होती है। ट्रैक्टर और बुग्गी लेकर गांव वालों को वाया न्यामू से जाना पड़ता है। पुल की दूरी करीब पांच किमी है।
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बरसात के बाद ग्रामीण खुद बल्लियों का पुल बनाकर जुगाड़ कर लेते हैं। लेकिन फिलहाल पहाड़ों पर बारिश के कारण पिछले दिनों हिंडन में पानी अधिक आने से पुल टूट चुका है।
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ग्राम प्रधान मौ.रजा बताते है नदी पार गांव वालों की दो बीघा जमीन श्मशान घाट की है। जोखित उठाकर लोगों को मजबूरन शवों का अंतिम संस्कार करने बल्लियां के पुल से जाना पड़ता है। महिलाएं और किशोरियां खेतों से चारा लाती हैं। उनकी जान जोखिम में रहती है। करीब डेढ़ साल से ग्रामीण और भाकियू अस्थायी पुल बनवाने की मांग को पानी में धरना प्रदर्शन कर चुके हैं।