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चरथावल में गहराया जल संकट, 350 हैंडपंप ठप, नलकूपों के हलक भी सूखे

अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Mon, 22 May 2017 01:05 AM IST
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चरथावल में नलकूप का रिबोर करते किसान।
चरथावल में नलकूप का रिबोर करते किसान। - फोटो : अमर उजाला

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तीन सालों से डार्क जोन में घोषित चरथावल ब्लाक में जल संकट गहराने लगा है। करीब पांच दर्जन गांवों में 350 हैंड पंप ठप पड़े है, जबकि सैकड़ों के हलक सूख गए हैं। कई क्षेत्रों में नलकूप भी पानी नहीं दे रहे हैं। खेतों की सिंचाई करने के लिए किसान नलकूपों का रिबोर करा रहे हैं।       
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शासन द्वारा चरथावल ब्लाक को डार्क जोन में घोषित किए तीन साल से ज्यादा बीत चुके हैं। क्षेत्र के 22 गांवों में 164 हैंडपंप पूरी तरह ठप हो चुके हैं। जबकि 38 गांवों में 186 हैंडपंप पानी नहीं दे रहे। कुटेसरा में 21, लुहारी खुर्द में 12, कुल्हेड़ी में 13, चरथावल देहात में 15, बहेड़ी में नौ, दधेडू कलां में आठ, निरधना में नौ, सैदपुर कलां में पांच, हैबतपुर में 10, चौकड़ा में छह, न्यामू में 14 हैंडपंप पूरी तरह खराब हो चुके हैं।


बीडीओ सुनील कुमार सिंह ने बताया कि 22 गांवों के रिबोर की रिपोर्ट डीडीओ को भेजी है। इनका रिबोर एमएसडीपी योजना से होगा। जबकि अन्य 38 गावों में खराब पड़े हैंडपंपों को रिबोर कराने के लिए 14 वें वित्त के बजट से ग्राम प्रधान और सचिव खुद कराएंगे। 

डार्क जोन में होने के कारण चरथावल में नए बोरिंग पर पाबंदी है। गेहूं कटाई के दौरान हर साल अप्रैल और मई महीने में बारिश हो जाती थी, लेकिन इस बार बारिश नहीं होने नलकूपों के बोरिंग का भूमिगत जल स्तर नीचे चला गया है। घर में लगे पुराने नलकों में पानी नहीं आ रहा है।

रोहताश कश्यप सिंचाई करने के लिए 10 फीट गहरा गड्ढ़ा खोदकर पानी का जुगत भिड़ा रहे हैं। ईशा का कहना है कि तराई क्षेत्र में पहले जमीन में पानी का चोया 30 फीट पर मिल जाता था। लेकिन अब 70 से 80 फीट पर पहुंच गया है। बड़े किसान नौ इंच बोरिंग में रिबोर कराकर सबमर्सिबल डालकर सिंचाई करने लगे हैं।             

जीवनदायिनी मानी जाने वाली हिंडन बनी जहरीली            
एक जमाने में क्षेत्र में गुजरने वाली प्राचीन हिंडन नदी किसानों और पशुओं के लिए जीवनदायिनी मानी जाती थी। लेकिन फैक्ट्रियों के विषैले और गंदे पानी ने नदी को जहरीली बना दिया है। नदी किनारे बसे गांवों का पानी दूषित होने के कारण कैंसर जैसी भयावह बीमारी पनप रही हैं। हैंडपंपों का पानी दूषित हो चुका है।

नसीरपुर के अधिवक्ता कुंवरपाल सिंह बताते हैं कि हिंडन किनारे सहारनपुर से मेरठ के जानी तक सवा सौ गांव बसे हैं। यदि जानी नहर के बजाए भायला में गंग नहर का पानी हिंडन में मिलाया जाता, तो सवा सौ गांवों में स्वच्छ जल मिलता। व्योवृद्ध देवदत्त कहते हैं करीब दो दशक पूर्व नदी किनारे थोड़ा सा रेत हटाकर निर्मल जल पीकर प्यास बुझाता था। लेकिन नदी अब जहरीली बन चुकी है। गांवों में बिरादरीवार लगे कुएं विलुप्त हो चुके हैं।

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