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..बादशाहों का इंतजार करें, इतनी फुर्सत कहां फकीरों को
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मुशायरे में शमा रोशन करती प्रियमवदा राणा व अन्य
- फोटो : DEVBAND
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देवबंद (सहारनपुर)। अंजुमन फिदाय-ए-अदब ने राज्जुपुर गांव में ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन किया। इसमें शायरों ने देर रात्रि तक उम्दा कलाम पेश कर श्रोताओं की दाद बटोरीं।
रविवार की रात्रि में आयोजित मुशायरे में अंतरराष्ट्रीय शायर डॉ. नवाज देवबंदी ने पढ़ा, बादशाहों का इंतजार करें, इतनी फुर्सत कहां फकीरों को। अफजल मंगलौरी ने अपने जज्बात कुछ यूं बयां किए, छोड़कर ताज को सब तेरी ही सूरत देखें, बैठ जाए तू अगर ताजमहल के आगे। प्रसिद्ध शायर अलताफ जिया ने पढ़ा, शायद ये तकब्बुर की सजा मुझको मिली है, उभरा था बड़ी शान से अब डूब रहा हूं। वसीम राज्जुपुरी ने कहा, वो आसतीन में खंजर छुपा के आया था, मैं उसका हाथ न काटूं तो मेरा सर जाता।
अंतरराष्ट्रीय शायर डा. नदीम शाद ने अपने जज्बात कुछ इस तरह बयां किए, सबब तलाश करों अपने हार जाना का, किसी की जीत पे रोने से कुछ नहीं होगा। अलतमश अब्बास ने पढ़ा..लोग करते हैं यूं पसंद हमें, हम जो उर्दू जुबान वाले हैं सुनाकर देर रात्रि तक श्रोताओं को खूब दाद बटोरी। इनके अलावा बिलाल सहारनपुरी, इसरार, इंतेखाब संभली, अजरा, निकहत अमरोहवी, सुल्तान जहां, काशिफ रजा, महमूद असर, जहाज देवबंदी, गुलजार जिगर, राशिद बिस्मिल ने भी कलाम पेश किया। इसकी अध्यक्षता बाबर हुसैन कुद्दुसी ने की। संचालन मध्य प्रदेश से आए मेहमान शायर इस्माईल नजर ने किया। शमा रोशन पूर्व मंत्री स्व. राजेंद्र राणा की पुत्री प्रियमवदा राणा ने की। इसमें डॉ. नवाज देवबंदी, अफजल मंगलौरी, पुलिस चौकी प्रभारी यशपाल सोम, सपना अहसास, अहसान हनफी को सम्मानित भी किया गया। इसमें अनीस फरीदी, अजीम फरीदी, सदाकत अली, सफदर अलवी, जाकिर सागर आदि मौजूद रहे। अंत में मुशायरा संयोजक वसीम राज्जुपुरी व सह संयोजक राशिद बिस्मिल मसरुर रोशन ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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रविवार की रात्रि में आयोजित मुशायरे में अंतरराष्ट्रीय शायर डॉ. नवाज देवबंदी ने पढ़ा, बादशाहों का इंतजार करें, इतनी फुर्सत कहां फकीरों को। अफजल मंगलौरी ने अपने जज्बात कुछ यूं बयां किए, छोड़कर ताज को सब तेरी ही सूरत देखें, बैठ जाए तू अगर ताजमहल के आगे। प्रसिद्ध शायर अलताफ जिया ने पढ़ा, शायद ये तकब्बुर की सजा मुझको मिली है, उभरा था बड़ी शान से अब डूब रहा हूं। वसीम राज्जुपुरी ने कहा, वो आसतीन में खंजर छुपा के आया था, मैं उसका हाथ न काटूं तो मेरा सर जाता।
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अंतरराष्ट्रीय शायर डा. नदीम शाद ने अपने जज्बात कुछ इस तरह बयां किए, सबब तलाश करों अपने हार जाना का, किसी की जीत पे रोने से कुछ नहीं होगा। अलतमश अब्बास ने पढ़ा..लोग करते हैं यूं पसंद हमें, हम जो उर्दू जुबान वाले हैं सुनाकर देर रात्रि तक श्रोताओं को खूब दाद बटोरी। इनके अलावा बिलाल सहारनपुरी, इसरार, इंतेखाब संभली, अजरा, निकहत अमरोहवी, सुल्तान जहां, काशिफ रजा, महमूद असर, जहाज देवबंदी, गुलजार जिगर, राशिद बिस्मिल ने भी कलाम पेश किया। इसकी अध्यक्षता बाबर हुसैन कुद्दुसी ने की। संचालन मध्य प्रदेश से आए मेहमान शायर इस्माईल नजर ने किया। शमा रोशन पूर्व मंत्री स्व. राजेंद्र राणा की पुत्री प्रियमवदा राणा ने की। इसमें डॉ. नवाज देवबंदी, अफजल मंगलौरी, पुलिस चौकी प्रभारी यशपाल सोम, सपना अहसास, अहसान हनफी को सम्मानित भी किया गया। इसमें अनीस फरीदी, अजीम फरीदी, सदाकत अली, सफदर अलवी, जाकिर सागर आदि मौजूद रहे। अंत में मुशायरा संयोजक वसीम राज्जुपुरी व सह संयोजक राशिद बिस्मिल मसरुर रोशन ने सभी का आभार व्यक्त किया।

कलाम सुनाते शायर डा. नवाज देवबंदी- फोटो : DEVBAND

शायर डा. नदीम शाद- फोटो : DEVBAND

शायरा सुल्तान जहां- फोटो : DEVBAND

शायर अलतमश अब्बास- फोटो : DEVBAND

निकहत अमरोहवी- फोटो : DEVBAND

अहसान हनफी- फोटो : DEVBAND

शायर असरार अहमद- फोटो : DEVBAND

वसीम राज्जुपुरी- फोटो : DEVBAND

मो. बिलाल- फोटो : DEVBAND
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