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खुली बैठक में ग्रामीणों ने चकबंदी कार्यों का विरोध किया
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नसीरपुर गांव में अधिकारियों का घेराव करते हुए चकबंदी कार्य का विरोध करते ग्रामीण।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
खुली बैठक में ग्रामीणों ने चकबंदी कार्यों का विरोध किया
मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। नसीरपुर गांव के ग्रामीण गांव में चकबंदी प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। गांव में पिछले करीब 7 वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया लंबित पड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि इस दौरान चकबंदी के लेखपाल गांव वालों को डराकर चक इधर से उधर करने के नाम पर ग्रामीणों से लाखों रुपये की अवैध उगाही कर चुके हैं। गांव की चौपाल में चकबंदी अधिकारियों व उपजिलाधिकारी ने ग्रामीणों की खुली बैठक में उनकी राय जानने का प्रयास किया। अधिकतर ग्रामीणों ने चकबंदी प्रक्रिया का विरोध किया।
तहसील क्षेत्र के गांव नसीरपुर में वर्ष 2014 में गांव की चकबंदी हेतु प्रक्रिया लागू हुई थी। प्रक्रिया लागू होने के बाद से ही ग्रामीण चकबंदी का विरोध कर रहे हैं। चकबंदी के लेखपाल व अन्य अधिकारी गांव में जाकर कई बार ग्रामीणों से विचार विमर्श कर चुके हैं। चकबंदी को लेकर अधिकतर विरोध के स्वर उभर कर आए हैं। शुक्रवार को उपजिलाधिकारी अरुण कुमार अपने साथ चकबंदी विभाग के एसओसी व सीओ तथा अन्य स्टाफ के साथ नसीरपुर गांव पहुंचे। गांव की चौपाल में ग्रामीणों की राय जानने के लिए खुली बैठक का आयोजन हुआ। बैठक में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चकबंदी के नाम पर चकबंदी विभाग के लेखपाल व अधिकारी ग्रामीणों को डराकर चक इधर से उधर करने के नाम पर लाखों रुपये की अवैध उगाही कर चुके हैं। कुछ दिन पहले चकबंदी विभाग के लेखपाल का अवैध उगाही को लेकर वीडियो भी वायरल हुआ था। ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने गांव में चकबंदी प्रक्रिया लागू करने का विरोध किया। ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि यदि चकबंदी लागू करनी है तो खादर की करें। चकबंदी को लेकर ग्रामीणों की एक राय नही हो सकी। अधिकतर ग्रामीण चकबंदी के विरोध में दिखायी दिए। इस मौके पर रामस्नेह, बिजेंद्र, अशोक शर्मा, डॉ. सुभाष, बल्लू व राममेहर सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे।
वर्जन......
लंबित पड़ी चकबंदी प्रक्रिया लागू करने को लेकर गांव में खुली बैठक का आयोजन किया गया। अधिकतर ग्रामीण चकबंदी प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। सभी ग्रामीणों की एक राय नही हो सकी। इस समस्या को लेकर अधिकारियों के साथ विचार विमर्श कर निर्णय लिया जाएगा। - उपजिलाधिकारी, अरुण कुमार।
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मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। नसीरपुर गांव के ग्रामीण गांव में चकबंदी प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। गांव में पिछले करीब 7 वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया लंबित पड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि इस दौरान चकबंदी के लेखपाल गांव वालों को डराकर चक इधर से उधर करने के नाम पर ग्रामीणों से लाखों रुपये की अवैध उगाही कर चुके हैं। गांव की चौपाल में चकबंदी अधिकारियों व उपजिलाधिकारी ने ग्रामीणों की खुली बैठक में उनकी राय जानने का प्रयास किया। अधिकतर ग्रामीणों ने चकबंदी प्रक्रिया का विरोध किया।
तहसील क्षेत्र के गांव नसीरपुर में वर्ष 2014 में गांव की चकबंदी हेतु प्रक्रिया लागू हुई थी। प्रक्रिया लागू होने के बाद से ही ग्रामीण चकबंदी का विरोध कर रहे हैं। चकबंदी के लेखपाल व अन्य अधिकारी गांव में जाकर कई बार ग्रामीणों से विचार विमर्श कर चुके हैं। चकबंदी को लेकर अधिकतर विरोध के स्वर उभर कर आए हैं। शुक्रवार को उपजिलाधिकारी अरुण कुमार अपने साथ चकबंदी विभाग के एसओसी व सीओ तथा अन्य स्टाफ के साथ नसीरपुर गांव पहुंचे। गांव की चौपाल में ग्रामीणों की राय जानने के लिए खुली बैठक का आयोजन हुआ। बैठक में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चकबंदी के नाम पर चकबंदी विभाग के लेखपाल व अधिकारी ग्रामीणों को डराकर चक इधर से उधर करने के नाम पर लाखों रुपये की अवैध उगाही कर चुके हैं। कुछ दिन पहले चकबंदी विभाग के लेखपाल का अवैध उगाही को लेकर वीडियो भी वायरल हुआ था। ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने गांव में चकबंदी प्रक्रिया लागू करने का विरोध किया। ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि यदि चकबंदी लागू करनी है तो खादर की करें। चकबंदी को लेकर ग्रामीणों की एक राय नही हो सकी। अधिकतर ग्रामीण चकबंदी के विरोध में दिखायी दिए। इस मौके पर रामस्नेह, बिजेंद्र, अशोक शर्मा, डॉ. सुभाष, बल्लू व राममेहर सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे।
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लंबित पड़ी चकबंदी प्रक्रिया लागू करने को लेकर गांव में खुली बैठक का आयोजन किया गया। अधिकतर ग्रामीण चकबंदी प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। सभी ग्रामीणों की एक राय नही हो सकी। इस समस्या को लेकर अधिकारियों के साथ विचार विमर्श कर निर्णय लिया जाएगा। - उपजिलाधिकारी, अरुण कुमार।
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