खतौली। चार माह का वर्षा योग प्रवास पीसनोपाड़ा मंदिर में करने के उपरांत विज्ञानमति माता ससंघ ने नगर से हस्तिनापुर के लिए पद विहार किया। विहार से पूर्व माता ने मंदिर में जिनेंद्र भगवान का अभिषेक व पूजा अर्चना कराई।
विहार के समय विज्ञानमति माता ने अमृतमयी वाणी में बताया कि जीवन में संयम का पालन ही महानता है। मनुष्य पर्याय धर्म कार्य करने के लिए मिली है, जो भगवान की सच्ची भक्ति करते हैं, वे ही मुक्ति मार्ग पर आगे बढ़ते हैं। मनुष्य द्वारा किए गए भले एवं महान कार्य द्वारा उपार्जित पुण्य कार्य ही उसके साथ जाएंगे। सांसारिक वैभव व आत्मा को शांति नहीं दे सकते, जो आवश्यकताओं को घटाते हैं, वे ही सच्चे साधक हो सकते हैं। धर्मसभा के बाद मंदिर से दादरी के लिए पद विहार हुआ। पद विहार में मनोज, मुनेश, नीरज जैन, अकलंक जैन, विजय, अरुण, सुशील, रामकुमार, संजय, शशांक, जयभगवान, मनोज आदि रहे।