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निष्काम सेवा को प्रभु भक्ति मानते थे वीतराग संत: ओमानंद
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शुकतीर्थ में शुकदेव आश्रम में शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव महाराज की जयंती पर आरती करते स्वामी ओ?
- फोटो : KHATAULI
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निष्काम सेवा को प्रभु भक्ति मानते थे वीतराग संत : ओमानंद
मुजफ्फरनगर, मोरना। शुकतीर्थ के जीर्णोद्धारक स्वामी कल्याणदेव की जयंती पर समाधि मंदिर में चरणाभिषेक किया गया। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि वीतराग संत निष्काम सेवा को प्रभु की भक्ति मानते थे।
भागवत पीठ शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ में स्वामी कल्याणदेव की 145वीं जयंती श्रद्धा और सादगी से मनाई गई। सूर्य ग्रहण के उपरांत समाधि मंदिर के कपाट खोले गए। वेद मंत्रोच्चारण के साथ पादुका पूजन और चरणाभिषेक किया गया। भागवत पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि गुरुदेव का जीवन तीन सदी का इतिहास और उनके पुण्य कर्मों की झलक है। वह संत परंपरा के अग्रणी पंक्ति के प्रथम संत थे। उन्होंने जगत की सेवा को ही जगदीश्वर की भक्ति माना। उनका सात्विक आचरण और सरल जीवन मानवता के लिए शास्त्र बन गया। नितांत अभाव की स्थिति में उन्होंने अपनी लगन, पुरुषार्थ, आत्मबल से ऐतिहासिक और वंदनीय कार्य किए। वह एक सच्चे योगी थे। भागवत प्रवक्ता राम स्नेही एवं आचार्य गिरीश चंद्र उप्रेती ने पूजन करवाया। श्री शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य आचार्य ज्ञान प्रसाद, कथा व्यास आशीष माधव शास्त्री, संत सीताराम, आचार्य अरुण, प्रदीप, जीवन, राजू उपाध्याय, विजय शर्मा, शैलेश आदि ने दिव्य संत की स्मृति को नमन किया।
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मुजफ्फरनगर, मोरना। शुकतीर्थ के जीर्णोद्धारक स्वामी कल्याणदेव की जयंती पर समाधि मंदिर में चरणाभिषेक किया गया। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि वीतराग संत निष्काम सेवा को प्रभु की भक्ति मानते थे।
भागवत पीठ शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ में स्वामी कल्याणदेव की 145वीं जयंती श्रद्धा और सादगी से मनाई गई। सूर्य ग्रहण के उपरांत समाधि मंदिर के कपाट खोले गए। वेद मंत्रोच्चारण के साथ पादुका पूजन और चरणाभिषेक किया गया। भागवत पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि गुरुदेव का जीवन तीन सदी का इतिहास और उनके पुण्य कर्मों की झलक है। वह संत परंपरा के अग्रणी पंक्ति के प्रथम संत थे। उन्होंने जगत की सेवा को ही जगदीश्वर की भक्ति माना। उनका सात्विक आचरण और सरल जीवन मानवता के लिए शास्त्र बन गया। नितांत अभाव की स्थिति में उन्होंने अपनी लगन, पुरुषार्थ, आत्मबल से ऐतिहासिक और वंदनीय कार्य किए। वह एक सच्चे योगी थे। भागवत प्रवक्ता राम स्नेही एवं आचार्य गिरीश चंद्र उप्रेती ने पूजन करवाया। श्री शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य आचार्य ज्ञान प्रसाद, कथा व्यास आशीष माधव शास्त्री, संत सीताराम, आचार्य अरुण, प्रदीप, जीवन, राजू उपाध्याय, विजय शर्मा, शैलेश आदि ने दिव्य संत की स्मृति को नमन किया।
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