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युवक की मौत पर मेडिकल कॉलेज में हंगामा
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युवक की मौत पर मेडिकल कॉलेज में हंगामा
मंसूरपुर (मुजफ्फरनगर)। बेगरजपुर स्थित मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित युवक की मृत्यु हो जाने पर परिजनों ने हंगामा किया। डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया। सूचना पर पहुंचे एसडीएम खतौली तथा मंसूरपुर पुलिस ने परिजनों को समझा बुझाकर शांत किया।
तितावी थाना क्षेत्र के गांव धनसनी निवासी 26 वर्षीय अंशुल को कोरोना संक्रमित होने पर 25 अप्रैल को मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज बेगराजपुर के कोविड अस्पताल में भर्ती कराया था। बुधवार सुबह उनकी मौत हो गई। दोपहर करीब 12:30 बजे अंशुल के पिता ने मेडिकल कॉलेज में हेल्प डेस्क पर फोन कर अपने बेटे के बारे में पूछा। हेल्प डेस्क से बताया गया कि अंशुल की हालत ठीक है तथा उसका ऑक्सीजन लेवल 92 है। मगर, 10 मिनट बाद ही हेल्प डेस्क से अंशुल के पिता के पास फोन गया कि अंशुल की मौत हो गई है। परिजन अस्पताल पहुंचे तो। डेथ सर्टिफिकेट उन्हें दिया गया उसे मृत्यु का समय सुबह 10:38 दिखाया गया। इसे लेकर परिजनों ने हंगामा कर दिया। परिजनों का कहना था कि गलत सूचना देने वाले डॉक्टर खिलाफ पहले कार्रवाई हो उसके बाद ही हम शव को लेंगे। सूचना पर पहुंचे एसडीएम खतौली इंद्रकांत द्विवेदी तथा मंसुरपुर पुलिस ने परिजनों को समझा-बुझाकर शांत किया। अंशुल एमबीए पास था तथा वर्तमान में गुरुग्राम की एक कंपनी में नौकरी कर रहा था। एसडीएम इंद्रकांत द्विवेदी का कहना है कि हेल्प डेस्क से नाम में कन्फ्यूजन हो जाने के कारण परिजनों को पहले गलत सूचना दी गई थी। मगर, 10 मिनट के बाद ही सही सूचना दे दी गई। इलाज में कोई लापरवाही नहीं की गई है।
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मंसूरपुर (मुजफ्फरनगर)। बेगरजपुर स्थित मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित युवक की मृत्यु हो जाने पर परिजनों ने हंगामा किया। डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया। सूचना पर पहुंचे एसडीएम खतौली तथा मंसूरपुर पुलिस ने परिजनों को समझा बुझाकर शांत किया।
तितावी थाना क्षेत्र के गांव धनसनी निवासी 26 वर्षीय अंशुल को कोरोना संक्रमित होने पर 25 अप्रैल को मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज बेगराजपुर के कोविड अस्पताल में भर्ती कराया था। बुधवार सुबह उनकी मौत हो गई। दोपहर करीब 12:30 बजे अंशुल के पिता ने मेडिकल कॉलेज में हेल्प डेस्क पर फोन कर अपने बेटे के बारे में पूछा। हेल्प डेस्क से बताया गया कि अंशुल की हालत ठीक है तथा उसका ऑक्सीजन लेवल 92 है। मगर, 10 मिनट बाद ही हेल्प डेस्क से अंशुल के पिता के पास फोन गया कि अंशुल की मौत हो गई है। परिजन अस्पताल पहुंचे तो। डेथ सर्टिफिकेट उन्हें दिया गया उसे मृत्यु का समय सुबह 10:38 दिखाया गया। इसे लेकर परिजनों ने हंगामा कर दिया। परिजनों का कहना था कि गलत सूचना देने वाले डॉक्टर खिलाफ पहले कार्रवाई हो उसके बाद ही हम शव को लेंगे। सूचना पर पहुंचे एसडीएम खतौली इंद्रकांत द्विवेदी तथा मंसुरपुर पुलिस ने परिजनों को समझा-बुझाकर शांत किया। अंशुल एमबीए पास था तथा वर्तमान में गुरुग्राम की एक कंपनी में नौकरी कर रहा था। एसडीएम इंद्रकांत द्विवेदी का कहना है कि हेल्प डेस्क से नाम में कन्फ्यूजन हो जाने के कारण परिजनों को पहले गलत सूचना दी गई थी। मगर, 10 मिनट के बाद ही सही सूचना दे दी गई। इलाज में कोई लापरवाही नहीं की गई है।
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