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UP: मुजफ्फरनगर में 32 साल से बंद शिव मंदिर में शुरू हुई पूजा, पंडितों को देखकर मुसलमानों ने किया ये...
Mon, 23 Dec 2024 10:03 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Mon, 23 Dec 2024 10:03 PM IST
सार
मंदिर में स्वामी यशवीर महाराज ने हवन-पूजन किया। लोगों ने जयश्री राम, हर-हर महादेव के नारे लगाए। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने गली को सजाकर सबका स्वागत किया और फूल बरसाए।
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पंडितों पर फूल बरसाए मुस्लिम समुदाय के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लद्दावाला के शिव मंदिर ने भाईचारे की डोर को और अधिक मजबूत कर दिया। बघरा आश्रम के संचालक यशवीर महाराज हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों के साथ गली में पहुंचे तो पुष्पवर्षा होने लगी। 32 साल बाद शिव मंदिर में पूजन हुआ। तंग गली में दोनों समुदाय के लोगों के बीच खुशी रही, लड्डू बांटे गए।
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सोमवार सुबह स्वामी यशवीर महाराज हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ चुंगी नंबर दो पर भगवान शनि देव मंदिर पहुंचे। इसके बाद पैदल यात्रा करते हुए लद्दावाला स्थित शिव मंदिर पहुंचे। मंदिर वाली गली में पहुंचते ही मुस्लिम समाज के लोगों ने दुकानों व छतों से पुष्प वर्षा की।
मंदिर में स्वामी यशवीर महाराज ने गंगाजल छिड़ककर मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन किया। कार्यकर्ताओं ने शंख बजाकर जयश्री राम, हर-हर महादेव के नारे लगाए। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने गली व क्षेत्र को सजाकर सभी का स्वागत किया। इस दौरान भाजपा नेता सुधीर खटीक, हिंदू जागरण मंच के नरेंद्र पंवार, बिट्टू सिखेड़ा, सभासद हनीपाल, कुंवरपाल, गो सेवक नीशू, देशराज पंवार मौजूद रहे।
मंदिर में स्वामी यशवीर महाराज ने गंगाजल छिड़ककर मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन किया। कार्यकर्ताओं ने शंख बजाकर जयश्री राम, हर-हर महादेव के नारे लगाए। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने गली व क्षेत्र को सजाकर सभी का स्वागत किया। इस दौरान भाजपा नेता सुधीर खटीक, हिंदू जागरण मंच के नरेंद्र पंवार, बिट्टू सिखेड़ा, सभासद हनीपाल, कुंवरपाल, गो सेवक नीशू, देशराज पंवार मौजूद रहे।
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यह था मामला
शहर के लद्दावाला के शिव मंदिर में साल 1992 के बाद पूजा नहीं हुई थी। यहां रहने वाले हिंदू समुदाय के लोग अयोध्या मंदिर प्रकरण के बाद से मकान बेचकर पलायन कर गए थे। अमर उजाला ने 19 दिसंबर के अंक में समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद बघरा आश्रम के संचालक स्वामी यशवीर महाराज ने मंदिर को जागृत करने के लिए मंदिर में हवन करने की घोषणा की थी।
शहर के लद्दावाला के शिव मंदिर में साल 1992 के बाद पूजा नहीं हुई थी। यहां रहने वाले हिंदू समुदाय के लोग अयोध्या मंदिर प्रकरण के बाद से मकान बेचकर पलायन कर गए थे। अमर उजाला ने 19 दिसंबर के अंक में समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद बघरा आश्रम के संचालक स्वामी यशवीर महाराज ने मंदिर को जागृत करने के लिए मंदिर में हवन करने की घोषणा की थी।
शिव परिवार की स्थापना के लिए होगी बैठक
स्वामी यशवीर महाराज ने कहा कि लद्दावाला में हिंदू परिवार के लोगों के जाने के बाद भी यहां शिव मंदिर है। मंदिर का जीर्णोद्धार कर यहां पर शिव परिवार के साथ ही अन्य देवी देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा करते हुए मूर्ति स्थापना की जाएगी। तीन दिन बाद सर्व समाज की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन से मांग कर कहा कि मंदिर की वास्तविक भूमि का पता लगाने के लिए दस्तावेजों की जांच की जाए। मुस्लिम समाज के लोगों से मंदिर पर किए अतिक्रमण को स्वतः ही सहयोग करते हुए हटाने की अपील की। प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही यहां पर नियमित पूजा पाठ के लिए भी समाज से निर्णय कर व्यवस्था की जाएगी।
स्वामी यशवीर महाराज ने कहा कि लद्दावाला में हिंदू परिवार के लोगों के जाने के बाद भी यहां शिव मंदिर है। मंदिर का जीर्णोद्धार कर यहां पर शिव परिवार के साथ ही अन्य देवी देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा करते हुए मूर्ति स्थापना की जाएगी। तीन दिन बाद सर्व समाज की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन से मांग कर कहा कि मंदिर की वास्तविक भूमि का पता लगाने के लिए दस्तावेजों की जांच की जाए। मुस्लिम समाज के लोगों से मंदिर पर किए अतिक्रमण को स्वतः ही सहयोग करते हुए हटाने की अपील की। प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही यहां पर नियमित पूजा पाठ के लिए भी समाज से निर्णय कर व्यवस्था की जाएगी।
ड्रोन को मुस्लिमों के हाथों में मिली गुलाब की पंखुड़ियां
पूजा-अर्चना के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। पुलिस ने ड्रोन उड़ाकर क्षेत्र के मकानों की छतों को देखा। इस दौरान मुस्लिम समाज के लोग हाथों में गुलाब की पंखुड़ियां लिए खड़े थे। इस दौरान सीओ सिटी व्योम बिंदल, तितावी, शहर कोतवाली, रामराज, महिला थाना व पुरकाजी पुलिस के साथ मौजूद रहे। सुरक्षा के लिए कई जगह बेरिकेडिंग लगाई थीं।
गली में अब इनका ठिकाना
मेहरबान, शमीम, पप्पू अंसारी, नईम, लियाकत, दानिश, लुकमान, मशकूर, समीर, याकूब आदि अपने परिवार के साथ यहां रहते हैं।
पूजा-अर्चना के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। पुलिस ने ड्रोन उड़ाकर क्षेत्र के मकानों की छतों को देखा। इस दौरान मुस्लिम समाज के लोग हाथों में गुलाब की पंखुड़ियां लिए खड़े थे। इस दौरान सीओ सिटी व्योम बिंदल, तितावी, शहर कोतवाली, रामराज, महिला थाना व पुरकाजी पुलिस के साथ मौजूद रहे। सुरक्षा के लिए कई जगह बेरिकेडिंग लगाई थीं।
गली में अब इनका ठिकाना
मेहरबान, शमीम, पप्पू अंसारी, नईम, लियाकत, दानिश, लुकमान, मशकूर, समीर, याकूब आदि अपने परिवार के साथ यहां रहते हैं।
हमने अपनी मर्जी से छोड़ा था घर
शहर के रामलीला टिल्ला पर रह रहे 85 वर्षीय रतनलाल सैनी बताते हैं कि 1992 में उन सभी ने अपनी मर्जी से क्षेत्र छोड़ा था। किसी को वहां कोई परेशानी नहीं थी, उस गली में सभी हिंदू मुस्लिम प्यार से रहते थे। वह बताते हैं कि 1980 के आसपास शहर में कर्फ्यू लगने के दौरान मुस्लिम परिवारों ने मदद की थी। रोजमर्रा का सामान भी देते थे। इतने दिन बाद मंदिर में पूजा हुई, उन्हें खुशी है, लेकिन बीमार होने के कारण जा नहीं सके। उस मंदिर वाली गली में शमशेर खटीक, रामकिशन सैनी, देशो खटीक, कालीचरण सैनी, महावीर खटीक, सुनील खटीक, लाला, पंडित सत्य स्वरूप शर्मा के परिवार रहते थे। सभी रामलीला टिल्ला व इंद्रा कॉलोनी में बस गए थे।
मंदिर के पुजारी रहे सत्य स्वरूप शर्मा के बेटे शिव शंकर शर्मा बताते हैं कि मोहल्ले के लोगों के साथ सभी का उठना बैठना था। सभी लोग उनके परिवार से प्यार करते थे।
शहर के रामलीला टिल्ला पर रह रहे 85 वर्षीय रतनलाल सैनी बताते हैं कि 1992 में उन सभी ने अपनी मर्जी से क्षेत्र छोड़ा था। किसी को वहां कोई परेशानी नहीं थी, उस गली में सभी हिंदू मुस्लिम प्यार से रहते थे। वह बताते हैं कि 1980 के आसपास शहर में कर्फ्यू लगने के दौरान मुस्लिम परिवारों ने मदद की थी। रोजमर्रा का सामान भी देते थे। इतने दिन बाद मंदिर में पूजा हुई, उन्हें खुशी है, लेकिन बीमार होने के कारण जा नहीं सके। उस मंदिर वाली गली में शमशेर खटीक, रामकिशन सैनी, देशो खटीक, कालीचरण सैनी, महावीर खटीक, सुनील खटीक, लाला, पंडित सत्य स्वरूप शर्मा के परिवार रहते थे। सभी रामलीला टिल्ला व इंद्रा कॉलोनी में बस गए थे।
मंदिर के पुजारी रहे सत्य स्वरूप शर्मा के बेटे शिव शंकर शर्मा बताते हैं कि मोहल्ले के लोगों के साथ सभी का उठना बैठना था। सभी लोग उनके परिवार से प्यार करते थे।
हमें पूजा-अर्चना से हुई खुशी
लद्दावाला निवासी मेहरबान बताते हैं कि वह इस गली में 1977 से परिवार के साथ रहते हैं। कभी भी किसी परिवार में कोई मनमुटाव नहीं हुआ। जब शहर में कर्फ्यू लगा था, वह सभी हिंदू परिवारों की 300 से ज्यादा बकरियों को चराकर लाते थे। लोगों को सामान भी लाकर देते थे। इस मंदिर में 32 साल बाद पूजा हुई है, वह सभी लोग खुश हैं। शायद पुराने परिवारों के लोगों से मुलाकात हो जाए।
लद्दावाला निवासी मेहरबान बताते हैं कि वह इस गली में 1977 से परिवार के साथ रहते हैं। कभी भी किसी परिवार में कोई मनमुटाव नहीं हुआ। जब शहर में कर्फ्यू लगा था, वह सभी हिंदू परिवारों की 300 से ज्यादा बकरियों को चराकर लाते थे। लोगों को सामान भी लाकर देते थे। इस मंदिर में 32 साल बाद पूजा हुई है, वह सभी लोग खुश हैं। शायद पुराने परिवारों के लोगों से मुलाकात हो जाए।