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UP News: रंग लाया मुजफ्फरनगर के 265 किसानों का संघर्ष, दिल्ली तक लड़ी लडाई में 22 साल बाद मिली जीत
Tue, 08 Jul 2025 12:37 AM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Tue, 08 Jul 2025 12:37 AM IST
सार
Muzaffarnagar: वर्ष 2002-03 में पूर्वी यमुना नहर के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया था। बदले में जमीन दी जानी तय हुई थी। मगर न जमीन मिली और न ही मुआवजा। अब जाकर मुआवजे की पहली किश्त जारी हुई है।
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किसान। सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
मानसून की रिमझिम के बीच बड़ौदा गांव में दिवाली जैसी खुशियां छा गई। नहर के लिए दी गई जमीन के बदले 22 साल बाद 265 किसानों के मुआवजे का रास्ता साफ हो गया है। तीन करोड़ रुपये शासन ने जारी कर दिए हैं।
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बुढ़ाना तहसील के बड़ौदा गांव में वर्ष 1988 में चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई थी। लोअर खंड पूर्वी यमुना नहर के लिए वर्ष 2002-03 में जमीन का अधिग्रहण किया गया। तय किया गया था कि जिन किसानों की जमीन नहर के लिए ली जाएगी, उन्हें गांव में ही दूसरी जगह जमीन मिलेगी।
विवादों के कारण वर्ष 2017-18 में गांव में धारा-6 लागू कर चकबंदी की प्रक्रिया रोक दी गई। ऐसे में जिन किसानों की जमीन नहर के लिए अधिग्रहित की गई थी, वह खाली हाथ रह गए। उन्हें न तो जमीन मिली और न ही मुआवजा।
विवादों के कारण वर्ष 2017-18 में गांव में धारा-6 लागू कर चकबंदी की प्रक्रिया रोक दी गई। ऐसे में जिन किसानों की जमीन नहर के लिए अधिग्रहित की गई थी, वह खाली हाथ रह गए। उन्हें न तो जमीन मिली और न ही मुआवजा।
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किसानों ने मुआवजे के लिए संघर्ष शुरू किया। दिल्ली और लखनऊ के चक्कर लगाए गए। जनप्रतिनिधियों के सामने गांव की समस्या रखी गई। जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन ठाकुर रामनाथ सिंह ने बताया कि सिंचाई विभाग शामली ने 13 करोड़ रुपये की मांग शासन से की थी। पहली किस्त के तीन करोड़ रुपये प्राप्त हो गए हैं।सिंचाई विभाग के एसई विवेक वार्ष्णेय ने मुआवजे की धनराशि मिलने की पुष्टि की है।
मुआवजे के इंतजार में यहां पीढि़यां ही बदल गई
बड़ौदा गांव के राजपाल बताते हैं कि मुआवजे की लड़ाई उनके पिता राम सिंह ने शुरू की थी। पिताजी के निधन के बाद उन्होंने संघर्ष शुरू किया। किसान शंकर और उसके बेटे जगदीश का निधन हो गया। अब उनके पोते अशोक कुमार को मुआवजा मिलेगा।
बड़ौदा गांव के राजपाल बताते हैं कि मुआवजे की लड़ाई उनके पिता राम सिंह ने शुरू की थी। पिताजी के निधन के बाद उन्होंने संघर्ष शुरू किया। किसान शंकर और उसके बेटे जगदीश का निधन हो गया। अब उनके पोते अशोक कुमार को मुआवजा मिलेगा।
किसानों से तैयार करा रहे दस्तावेज
सिंचाई विभाग के एडीएम वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार ने बताया कि किसानों से दस्तावेज तैयार करने के लिए कह दिया गया है। पात्रों की सूची तैयारी कर वितरण इस तरह किया जाएगा, जिससे पहली किस्त में ही अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें।
सिंचाई विभाग के एडीएम वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार ने बताया कि किसानों से दस्तावेज तैयार करने के लिए कह दिया गया है। पात्रों की सूची तैयारी कर वितरण इस तरह किया जाएगा, जिससे पहली किस्त में ही अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें।