UP: क्या लोगों का ब्रेनवॉश कर मदरसे में कराया जा रहा धर्म परिवर्तन? फंडिंग के आरोप, जांच में जुटी तीन टीमें
मुजफ्फरनगर के फुलत स्थित दारुल उलूम रहीमिया मदरसे पर धर्मांतरण के आरोपों के बाद एसएसपी संजय वर्मा ने तीन जांच टीमें गठित की हैं। पुलिस और एलआईयू ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
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मुजफ्फरनगर जनपद में 1946 से चल रहे मदरसा इन दिनों जांच के घेरे में है। खतौली क्षेत्र के फुलत गांव स्थित दारुल उलूम रहीमिया मदरसा धर्मांतरण के आरोपों को लेकर चर्चा में है। योग आश्रम बघरा के संचालक स्वामी यशवीर महाराज ने पांच लोगों के नाम और तस्वीरों की सूची जारी करते हुए मदरसा संचालकों पर पिछले दस वर्षों से धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया है।
सवाल है कि क्या सरकारी भूमि पर बने मदरसे में लोगों को ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण कराया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी संजय वर्मा ने जांच के लिए तीन टीमें गठित कर दी हैं। पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई की टीम ने मदरसे में पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
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पांच लोगों की सूची जारी, गंभीर आरोप लगाए
शुक्रवार को स्वामी यशवीर महाराज ने दो युवतियों समेत पांच लोगों की सूची और एक वीडियो बयान जारी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मदरसे में हिंदू समुदाय के लोगों को रोजगार और अन्य प्रलोभन देकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मदरसे के संचालक मौलाना हिफजुर्रहमान अंसारी और उनके पुत्र मौलाना जुबेर अंसारी इस पूरे प्रकरण से जुड़े हैं। साथ ही मदरसे की भूमि, संपत्ति और आय के स्रोतों की जांच कराने की भी मांग की।
पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई ने शुरू की जांच
आरोप सामने आने के बाद रतनपुरी थाना पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई की टीम ने मदरसे में पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की। एसएसपी संजय वर्मा ने बताया कि मामले की जांच के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं और सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
दो घरों पर मिले ताले, एक परिवार गांव से बाहर
जांच के दौरान पुलिस ने उन लोगों के बारे में जानकारी जुटाई, जिनका नाम सूची में शामिल किया गया है। तीन में से दो लोगों के घरों पर ताले मिले, जबकि एक व्यक्ति के घर उसकी पुत्रियां मिलीं। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ननिहाल गए हुए हैं। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
मदरसा प्रबंधन ने आरोपों को बताया निराधार
मदरसा प्रबंधन की ओर से संचालक के भाई खुर्शीद ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि मदरसा केवल शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है और जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी।
1946 से संचालित होने का दावा
जांच के दौरान मदरसा प्रबंधन ने अधिकारियों को बताया कि संस्थान वर्ष 1946 से संचालित है। मदरसे को वर्ष 2010 से पांचवीं कक्षा तक की मान्यता प्राप्त है। यहां 310 विद्यार्थी और 21 शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। भूमि से जुड़ा मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया गया है।