UP: चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि आज, दुनियाभर में किसानों के लिए संघर्ष का उदाहरण बन गए मसीहा
आज किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि है। इस मौके पर चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साधारण से किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले चौधरी टिकैत किसानों के हित में किए गए संघर्ष से दुनिया भर में छा गए थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत किसानों के दिल में बसते हैं। किसानों के लिए उनका संघर्ष मिसाल है।आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। जब टिकैत युवावस्था में थे तो उनकी मां मुखत्यारी देवी ने बेटे को पुलिस में दरोगा बनाने का सपना संजोया था, लेकिन टिकैत जिम्मेदारी में ऐसे उलझे कि पुलिस सेवा में नहीं गए। वक्त बदला तो वह भाकियू के अध्यक्ष बने और दुनियाभर में किसानों के लिए उनका संघर्ष उदाहरण बन गया।
बाबा टिकैत की जीवन पर लिखी गई किताब 'चौधरी टिकैत' में उनकी माता दिवंगत मुखत्यारी देवी ने अपने इस सपने का साझा किया था। पिता चौहल सिंह के निधन के बाद परिवार आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा था। चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने कक्षा सात तक की शिक्षा हासिल की, लेकिन पारिवारिक समस्याओं में पढ़ाई छोड़नी पड़ी। बाल्यावस्था में ही बालियान खाप के चौधरी बनाए गए और इसके बाद उन्हें भाकियू की जिम्मेदारी मिली।
यह भी पढ़ें: Meerut News: खिसके मुस्लिम वोट बैंक को फिर से पाना सपा के लिए बड़ी चुनौती, खोज रहे हार के कारण
किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की आत्मा जीवनभर मुंडभर गांव में ही बसी रही। मुंडभर के किसानों ने भी हमेशा टिकैत की ढाल बनकर साथ दिया। टिकैत ने सार्वजनिक रूप से कई बार मुंडभर के सहयोग की सराहना की। मुंडभर में बिजलीघर का निर्माण भी कराया।
अच्छा काम करने वाले बनते हैं छोटूराम और चरण सिंह
15 मई 2011, दिन रविवार, सुबह के 7 बजकर 5 मिनट का समय। बीमार हाल चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने आंखें खोली। सामने पौत्र गौरव टिकैत बैठे हुए थे। चौधरी टिकैत ने मुस्कुराते हुए दृष्टांत दिया कि अच्छा काम करने वाले सर छोटूराम, चौधरी चरण सिंह और भगत सिंह जैसे बन जाते हैं, लेकिन अगर कोई सही राह पर नहीं चलेगा तो समाज में नाम भी तोड़-मरोड़ दिए जाते हैं। टिकैत के यही आखिरी शब्द थे।
किताबों में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत
भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के जीवन पर छह किताबें भी लिखी गई। वर्ष 1992 में लीबिया विश्वविद्यालय सभा के प्रोफेसर डॉ. महेंद्र सिंह राठी ने चौधरी टिकैत के नाम से किताब लिखी। इसके बाद सिसौली के रामभरोसे ने संक्षिप्त जीवन परिचय जारी किया। अधिवक्ता अशोक बालियान ने वर्ष 2003 में किसान आंदोलन में चौधरी टिकैत की भूमिका लिखी। उनके जीवन पर कुल छह किताबें प्रकाशित हुई।
चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने जीवन का पहला महत्वपूर्ण फैसला केवल 16 साल की उम्र में किया था। वर्ष 1955 में जनता इंटर कॉलेज सिसौली में बागपत के टीकरी और सिसौली की टीमों के बीच स्कूली हॉकी प्रतियोगिता के एक मैच में विवाद हो गया था। विवाद बढ़ा तो खिलाड़ियों की उम्र के ही खाप चौधरी टिकैत को मौके पर बुलाया गया। महज 16 साल की उम्र में टिकैत ने खिलाड़ियों की पीठ थपथपाते हुए जब यह कहा कि खिलाड़ी कभी एक गोल की चिंता नहीं करता तो दोनों टीमें फिर मैदान में उतरी।
भाकियू कोषाध्यक्ष दरियाव सिंह बताते हैं कि चौधरी टिकैत ने सामाजिक पंचायतों के आयोजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1950, 1956 और 1963 की सर्वखाप पंचायतों में टिकैत की मौजूदगी रही। वर्ष 2006 और 2010 में टिकैत ने सौरम में ऐतिहासिक पंचायतों का आयोजन कर नया अध्याय भी लिखा।
सिसौली में आज मनाई जा रही है महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि
भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि सोमवार को कस्बे के किसान भवन पर मनाई जा रही है। भाकियू नेता गौरव टिकैत ने बताया कि पुण्यतिथि पर सुबह आठ बजे किसान भवन पर यज्ञ आयोजित किया गया। इसके बाद वीर सैनिक सम्मान समारेाह और रक्तदान शिविर एवं मेडिकल जांच शिविर का आयोजन किया जाएगा।