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राष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वसम्मति से पारित हुए नौ प्रस्ताव
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सर्वसम्मति से नौ प्रस्ताव पारित
देवबंद (सहारनपुर)। दारुल उलूम में आयोजित हुए कुलहिंद राब्ता-ए-मदारिस इस्लामिया के राष्ट्रीय सम्मेलन में सभी मदरसा संचालकों के सुझावों पर विचार मंथन किया गया। दीनी इदारों के भीतर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और उनके उत्थान के लिए सर्वसम्मति से नौ प्रस्ताव पारित किए गए।
राष्ट्रीय सम्मेलन में पारित प्रस्ताव
1-मदरसों के तालीमी निजाम को बेहतर बनाने के साथ छात्रों को संस्कारवान
बनाने की जरूरत
2-मदरसों के मसलों का जायजा और उनका हल
3-मदरसों की अहमियत और प्रांतीय शाखाओं को सक्रिय करना।
4- षड्यंत्रकारी शक्तियों का जवाब देना
5- दीनी मकतब यानी छोटे मदरसों को खोलने पर जोर
6- धर्मांतरण की रोक को कार्य करना
इस प्रस्ताव में कहा गया कि पिछले कुछ समय से ईसाई मिशनरियां भोले भाले मुसलमानों
को तरह तरह के प्रलोभन देकर उनका धर्मांतरण कराने की फिराक में लगी रहती
है। इसलिए मदरसा संचालकों की जिम्मेदारी है कि वह कौम को इससे बचाने का काम करें।
7-मदरसों में दीन के साथ ही आधुनिक शिक्षा निजाम
8- समाज सुधार के लिए कार्य करने की जरूरत।
9- शोक संवेदना।
सम्मेलन में यह रहे शामिल
असम सांसद व दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य मौलाना बदरुद्दीन अजमल, मौलाना जैनुल आबदीन बैंगलूरु, बंगाल सरकार के केबिनेट मंत्री मौलाना सिद्दीकउल्लाह चौधरी, मौलाना फारुक उड़ीसा, मौलाना मुफ्ती शिराज मणिपुरी, मौलाना इब्राहीम केरला, मौलाना रहमतुल्ला कश्मीरी, मौलाना शाहिद सहारनपुरी, मौलाना अशहद रशीदी मुरादाबादी, मौलाना अब्दुल कवी हैदराबादी, मौलाना अब्दुल कादिर आसाम, मौलाना मुजम्मिल अली आसामी, मौलाना अली हसन जमुना नगर, हाफिज अब्दुल कुद्दुस कानपुरी, मौलाना अब्दुल मालिक मुगेसी, मौलाना मोहम्मद रांची, मौलाना इनायतुल्लाह पूंछ कश्मीर, मौलाना अरशद मध्यप्रदेश और मौलाना अहमद देवला सहित हजारों उलमा सम्मेलन में शामिल रहे।
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देवबंद (सहारनपुर)। दारुल उलूम में आयोजित हुए कुलहिंद राब्ता-ए-मदारिस इस्लामिया के राष्ट्रीय सम्मेलन में सभी मदरसा संचालकों के सुझावों पर विचार मंथन किया गया। दीनी इदारों के भीतर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और उनके उत्थान के लिए सर्वसम्मति से नौ प्रस्ताव पारित किए गए।
राष्ट्रीय सम्मेलन में पारित प्रस्ताव
1-मदरसों के तालीमी निजाम को बेहतर बनाने के साथ छात्रों को संस्कारवान
बनाने की जरूरत
2-मदरसों के मसलों का जायजा और उनका हल
3-मदरसों की अहमियत और प्रांतीय शाखाओं को सक्रिय करना।
4- षड्यंत्रकारी शक्तियों का जवाब देना
5- दीनी मकतब यानी छोटे मदरसों को खोलने पर जोर
6- धर्मांतरण की रोक को कार्य करना
इस प्रस्ताव में कहा गया कि पिछले कुछ समय से ईसाई मिशनरियां भोले भाले मुसलमानों
को तरह तरह के प्रलोभन देकर उनका धर्मांतरण कराने की फिराक में लगी रहती
है। इसलिए मदरसा संचालकों की जिम्मेदारी है कि वह कौम को इससे बचाने का काम करें।
7-मदरसों में दीन के साथ ही आधुनिक शिक्षा निजाम
8- समाज सुधार के लिए कार्य करने की जरूरत।
9- शोक संवेदना।
सम्मेलन में यह रहे शामिल
असम सांसद व दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य मौलाना बदरुद्दीन अजमल, मौलाना जैनुल आबदीन बैंगलूरु, बंगाल सरकार के केबिनेट मंत्री मौलाना सिद्दीकउल्लाह चौधरी, मौलाना फारुक उड़ीसा, मौलाना मुफ्ती शिराज मणिपुरी, मौलाना इब्राहीम केरला, मौलाना रहमतुल्ला कश्मीरी, मौलाना शाहिद सहारनपुरी, मौलाना अशहद रशीदी मुरादाबादी, मौलाना अब्दुल कवी हैदराबादी, मौलाना अब्दुल कादिर आसाम, मौलाना मुजम्मिल अली आसामी, मौलाना अली हसन जमुना नगर, हाफिज अब्दुल कुद्दुस कानपुरी, मौलाना अब्दुल मालिक मुगेसी, मौलाना मोहम्मद रांची, मौलाना इनायतुल्लाह पूंछ कश्मीर, मौलाना अरशद मध्यप्रदेश और मौलाना अहमद देवला सहित हजारों उलमा सम्मेलन में शामिल रहे।
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