मोरना। जाट धर्मशाला में दो दिवसीय सामवेद पारायण यज्ञ के समापन पर मुख्य अतिथि वैद्य जगपाल आर्य ने कहा कि यज्ञ संसार की नाभि के समान है। जहां यज्ञ होता है, वह धरा स्वर्ग के समान हो जाती है। यज्ञ वह होता है, जो अपने तक सीमित न रहकर व्यापक होने से शत्रु-मित्र दोनों को समान लाभ पहुंचाता है।
शुकतीर्थ जाट धर्मशाला में जन कल्याण सेवा समिति मुजफ्फरनगर के तत्वावधान में आयोजित यज्ञ के समापन पर उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से चार वेद हैं, जिनमें ऋगवेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के अनुसार यज्ञ का आयोजन किया जाता है। सामवेद पारायण यज्ञ में वेद मंत्रों की स्तुति गायन कर यज्ञशाला में विश्व शांति के लिए आहुति दी गई। यज्ञ के आयोजन में रूबल-शशी मल्होत्रा, राहुल-सलोनी मल्होत्रा आदि मुख्य यज्ञमान रहे। सुनीता आर्य, अनुराधा नारंग, साक्षी वेदपाठी रहीं। श्याम मल्होत्रा, राजीव, सोनू नांरग, शेखर, बनी खुराना, करण, सुरेंद्र, रीचा, मंगन, कृष्णपाल, हर्ष सिंघल आदि सहित कई महिलाए व पुरुषों ने यज्ञ में पूर्ण आहुति देकर विश्व शांति की स्थापना के लिए प्रार्थना की। इस दौरान महामंडलेश्वर स्वामी गोपालाचार्य महाराज, स्वामी मौनी बाबा, रोशनलाल बत्रा ने विचार रखे। संत महात्माओं और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।