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Muzaffarnagar News: करोड़ाें की जीएसटी चोरी में दो धरे
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मुजफ्फरनगर। खालापार थाना पुलिस ने 1300 करोड़ के फर्जी ई-वे बिलों से करोड़ाें की राजस्व चोरी करने के मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया। एक आरोपी एक फैक्टरी का डायरेक्टर तो दूसरा एकाउंटेंट है। जीएसटी चोरी करने में उत्तराखंड की तीन फैक्टरी सामने आई है।
एसपी सिटी सत्य नारायण प्रजापत ने बताया कि जशोधरा इंड्रस्ट्रीयल एरिया कोटद्वार उत्तराखंड से मोनू उर्फ महबूब उर्फ महमूद हसन निवासी तेवड़ा थाना ककरौली व रहीश मलिक निवासी कैला भट्टा थाना कोतवाली जनपद गाजियाबाद को पकड़ा गया है। रहीश कोटद्वार स्टील का डायरेक्टर व महबूब उर्फ मोनू संत स्टील एंड एलायस का एकाउंटेंट है। ये दोनों मुजफ्फरनगर में जानसठ रोड स्थित अक्शा रिसाइकिंलिंग एंड वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के फर्जी ई-वे बिल से जीएसटी चोरी प्रकरण में शामिल रहे हैं। पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद दोनों को गिरफ्तार किया। दोनों का चालान कर दिया गया।
ऐसे करते थे जीएसटी चोरी में सहयोग : महबूब उर्फ मोनू ने बताया कि वह मुजफ्फरनगर में जानसठ रोड पर स्थित अक्शा रिसाइकलिंग एंड वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक सोनू मलिक के लिए काम करता है, जिसका डायरेक्टर शादाब है। सोनू मलिक उसे ऑनलाइन व मोबाइल के माध्यम से संत स्टील एंड एलायस कोटद्वार, सुप्रीम स्टील एंड एलाया आदि से खरीदने व विक्रय करने के फर्जी ई-वे बिल भेजता था। जिन्हें वह शादाब के मुजफ्फरनगर में स्थित ऑफिस में कार्य करने वाले नदीम व समीर को व्हाटसएप से भेजता था।
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वे लोग जीएसटी के फर्जी बिल तैयार कर फर्जी कांटा पर्ची तैयार करते थे और ट्रांसपोर्ट बिल्टी भी तैयार करते थे। कांटा पर्ची और ट्रांसपोर्ट बिल्टी पर वह उन गाड़ियों का नंबर डालता था, जिनकी लिस्ट पहले से मिली होती थी। वे लोग अलग-अलग कंपनियों की मोहर भी रखते थे।
उन कंपनियों के फर्जी बिल तैयार करते थे। इस तरह एक फाइल तैयार करते थे। इन फाइलों को वह फैक्टरी मालिक के पास भेज देते थे। इन फाइलों के बारे में फैक्टरी मालिक ही जानते हैं। फाइल व बिल का इस्तेमाल कर फैक्टरी मालिक व शादाब सरकार से जीएसटी के करोड़ों रुपये वापस लेकर लाभ कमाता है। उन्हें भी हिस्सा मिलता था। रहीश मलिक ने बताया कि वह भी इन्हीं लोगों के साथ काम करता है। वह कोटद्वार स्टील का डायरेक्टर है। कोटद्वार स्टील व संत स्टील में ई-स्क्रैप का माल ना तो आता है, ना जाता है।
संत स्टील कोटद्वार में लोहे की इंगट में असली बिल बनाए जाते हैं, जिससे 100 गुना जीएसटी के कूटरचित बिल बनाते थे। वह सिर्फ कागजों में ई-स्क्रैप के माल का क्रय-विक्रय फर्जी दस्तावेज के माध्यम से करते हैं। कभी-कभी ही कंपनी चलाई जाती है। उसकी आड़ में फर्जी जीएसटी बिल बनाकर जीएसटी की चोरी करते हैं। उसे भी मुनाफा मिलता है। कम्पनी के चेक व अन्य कागजातों पर उसके ही हस्ताक्षर होते हैं।
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एसपी सिटी सत्य नारायण प्रजापत ने बताया कि जशोधरा इंड्रस्ट्रीयल एरिया कोटद्वार उत्तराखंड से मोनू उर्फ महबूब उर्फ महमूद हसन निवासी तेवड़ा थाना ककरौली व रहीश मलिक निवासी कैला भट्टा थाना कोतवाली जनपद गाजियाबाद को पकड़ा गया है। रहीश कोटद्वार स्टील का डायरेक्टर व महबूब उर्फ मोनू संत स्टील एंड एलायस का एकाउंटेंट है। ये दोनों मुजफ्फरनगर में जानसठ रोड स्थित अक्शा रिसाइकिंलिंग एंड वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के फर्जी ई-वे बिल से जीएसटी चोरी प्रकरण में शामिल रहे हैं। पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद दोनों को गिरफ्तार किया। दोनों का चालान कर दिया गया।
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ऐसे करते थे जीएसटी चोरी में सहयोग : महबूब उर्फ मोनू ने बताया कि वह मुजफ्फरनगर में जानसठ रोड पर स्थित अक्शा रिसाइकलिंग एंड वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक सोनू मलिक के लिए काम करता है, जिसका डायरेक्टर शादाब है। सोनू मलिक उसे ऑनलाइन व मोबाइल के माध्यम से संत स्टील एंड एलायस कोटद्वार, सुप्रीम स्टील एंड एलाया आदि से खरीदने व विक्रय करने के फर्जी ई-वे बिल भेजता था। जिन्हें वह शादाब के मुजफ्फरनगर में स्थित ऑफिस में कार्य करने वाले नदीम व समीर को व्हाटसएप से भेजता था।
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वे लोग जीएसटी के फर्जी बिल तैयार कर फर्जी कांटा पर्ची तैयार करते थे और ट्रांसपोर्ट बिल्टी भी तैयार करते थे। कांटा पर्ची और ट्रांसपोर्ट बिल्टी पर वह उन गाड़ियों का नंबर डालता था, जिनकी लिस्ट पहले से मिली होती थी। वे लोग अलग-अलग कंपनियों की मोहर भी रखते थे।
उन कंपनियों के फर्जी बिल तैयार करते थे। इस तरह एक फाइल तैयार करते थे। इन फाइलों को वह फैक्टरी मालिक के पास भेज देते थे। इन फाइलों के बारे में फैक्टरी मालिक ही जानते हैं। फाइल व बिल का इस्तेमाल कर फैक्टरी मालिक व शादाब सरकार से जीएसटी के करोड़ों रुपये वापस लेकर लाभ कमाता है। उन्हें भी हिस्सा मिलता था। रहीश मलिक ने बताया कि वह भी इन्हीं लोगों के साथ काम करता है। वह कोटद्वार स्टील का डायरेक्टर है। कोटद्वार स्टील व संत स्टील में ई-स्क्रैप का माल ना तो आता है, ना जाता है।
संत स्टील कोटद्वार में लोहे की इंगट में असली बिल बनाए जाते हैं, जिससे 100 गुना जीएसटी के कूटरचित बिल बनाते थे। वह सिर्फ कागजों में ई-स्क्रैप के माल का क्रय-विक्रय फर्जी दस्तावेज के माध्यम से करते हैं। कभी-कभी ही कंपनी चलाई जाती है। उसकी आड़ में फर्जी जीएसटी बिल बनाकर जीएसटी की चोरी करते हैं। उसे भी मुनाफा मिलता है। कम्पनी के चेक व अन्य कागजातों पर उसके ही हस्ताक्षर होते हैं।