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तुम शांति के दीप जमाने में जला दो, रावन न आये कोई
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मुजफ्फरनगर। शनिवार दोपहर जिला कारागार में आयोजित कवि सम्मेलन में बाहर से कवियों-शायरों ने अपनी रचना व कलाम पढ़कर शमा बांध दिया। उन्होंने वतन परस्ती व जिंदगी की हकीकत बयां की। कवि सम्मेलन के इन क्षणों का खूब लुुत्फ उठाया। बाद में सभी को सम्मानित कवि-शायर को सम्मानित किया।
मुख्य अतिथि डीएम चंद्र भूषण सिंह व अति विशिष्ट अतिथि एसएसपी अभिषेक यादव ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। डीएम ने कहा कि ऐसे सकारात्मक कार्यक्रमों से बंदियों के नैतिक एवं मानसिक उत्थान में सहायता मिलती हैं। समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिये। मुजफ्फरनगर कारागार की यह एक सार्थक पहल हैं।
अब्दुल हकसहर मुजफ्फरनगरी ने अपनी कविता का पाठ कुछ इस अंदाज में किया- ‘‘अपने धोखे की हकीकत शाम होने पर खुली, अपना ही साया था जिस को हमसफर समझा था मैं’’।
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चौकस देवबंदी ने कलाम पढ़ते हुए कहा कि ‘‘मैं उसके मुॅह पर तो उसकी बड़ी तारीफ करता हूॅ, मगर ये सच हैं, वो बड़ी बेकार लगती है’’। अंकित दीप ने पढ़ा ‘‘चार दिन की जिंदगी हैं-जो जदो में कैद हैं, कितनी आजादी से हम अपनी हदों में कैद है’’ अहमद मुजफ्फरनगर ने पढ़ा ‘‘गोद में तेरी पलकर हुये जवां, देश दुनिया में हैं तेरे जैसा कहाॅं, मेरे प्यारे वतन मेरे हिंदुस्तान, तुम पे कुर्बान हो अपने ये जानो तन’’। हैदर शैदाई ने पढ़ा ‘‘अब तक तो कैद कर के मुझे पिंजरे में रखा, अब छोड़ भी रहा हैं, तो पर काट रहा है’’। जिगर देवबंद ने पढ़ा ‘‘तुम शांति के दीप जमाने में जला दो, रावन न आये कोई इधर रेखा बना दो’’। कलीम वफा ने पढ़ा ‘‘जेल में कविता पढ़ना भी बामशक्कत कैद है’’।
कुछ ने इस दौरान भजन भी सुनाये। इसके अलावा नाहिद समर जुगाड़, देवबंदी, अफरोज टांडवी व शाहिद अरमान ने भी कलाम पढ़े। जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने सभी कवि-शायर एवं अधिकारियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर नरेंद्र बहादुर सिंह अपर जिलाधिकारी(प्रशासन), अनूप कुमार सिटी मजिस्ट्रेट, अशोक कुमार डिप्टी कलेक्टर, अभिषेक कुमार डिप्टी कलेक्टर के अलावा मुख्य रूप से जेलर कमलेश सिंह, उप जेलर कैलाश नारायण शुक्ला, मेघा राजपूत, श्रीमती लक्ष्मी देवी, समाज सेवी नादिर राणा व शरद शर्मा एवं समस्त कारागार स्टाफ आदि मौजूद रहे।
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मुख्य अतिथि डीएम चंद्र भूषण सिंह व अति विशिष्ट अतिथि एसएसपी अभिषेक यादव ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। डीएम ने कहा कि ऐसे सकारात्मक कार्यक्रमों से बंदियों के नैतिक एवं मानसिक उत्थान में सहायता मिलती हैं। समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिये। मुजफ्फरनगर कारागार की यह एक सार्थक पहल हैं।
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अब्दुल हकसहर मुजफ्फरनगरी ने अपनी कविता का पाठ कुछ इस अंदाज में किया- ‘‘अपने धोखे की हकीकत शाम होने पर खुली, अपना ही साया था जिस को हमसफर समझा था मैं’’।
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चौकस देवबंदी ने कलाम पढ़ते हुए कहा कि ‘‘मैं उसके मुॅह पर तो उसकी बड़ी तारीफ करता हूॅ, मगर ये सच हैं, वो बड़ी बेकार लगती है’’। अंकित दीप ने पढ़ा ‘‘चार दिन की जिंदगी हैं-जो जदो में कैद हैं, कितनी आजादी से हम अपनी हदों में कैद है’’ अहमद मुजफ्फरनगर ने पढ़ा ‘‘गोद में तेरी पलकर हुये जवां, देश दुनिया में हैं तेरे जैसा कहाॅं, मेरे प्यारे वतन मेरे हिंदुस्तान, तुम पे कुर्बान हो अपने ये जानो तन’’। हैदर शैदाई ने पढ़ा ‘‘अब तक तो कैद कर के मुझे पिंजरे में रखा, अब छोड़ भी रहा हैं, तो पर काट रहा है’’। जिगर देवबंद ने पढ़ा ‘‘तुम शांति के दीप जमाने में जला दो, रावन न आये कोई इधर रेखा बना दो’’। कलीम वफा ने पढ़ा ‘‘जेल में कविता पढ़ना भी बामशक्कत कैद है’’।
कुछ ने इस दौरान भजन भी सुनाये। इसके अलावा नाहिद समर जुगाड़, देवबंदी, अफरोज टांडवी व शाहिद अरमान ने भी कलाम पढ़े। जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने सभी कवि-शायर एवं अधिकारियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर नरेंद्र बहादुर सिंह अपर जिलाधिकारी(प्रशासन), अनूप कुमार सिटी मजिस्ट्रेट, अशोक कुमार डिप्टी कलेक्टर, अभिषेक कुमार डिप्टी कलेक्टर के अलावा मुख्य रूप से जेलर कमलेश सिंह, उप जेलर कैलाश नारायण शुक्ला, मेघा राजपूत, श्रीमती लक्ष्मी देवी, समाज सेवी नादिर राणा व शरद शर्मा एवं समस्त कारागार स्टाफ आदि मौजूद रहे।