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Muzaffarnagar News: टिकैत ने सिसौली से संसार तक पहुंचाई किसानों की आवाज
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मुजफ्फरनगर। भाकियू के संस्थापक किसान मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की 13वीं पुण्यतिथि सिसौली के किसान भवन पर मनाई जाएगी। टिकैत ने किसानों को एकजुट कर सिर्फ लखनऊ और दिल्ली ही नहीं, बल्कि विदेशों के किसान आंदोलन में भी हिस्सा लिया। किसानों का कारवां उनके पीछे चलता रहा।
किसान मसीहा की पुण्यतिथि जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण बचाओ संकल्प दिवस के रूप में मनाई जाएगी। भाकियू जिलाध्यक्ष योगेश शर्मा ने बताया कि मुख्य कार्यक्रम किसान भवन सिसौली में आयोजित होगा। सुबह आठ बजे हवन होगा। इसके बाद 11 बजे श्रद्धांजलि सभा आयोजित होगी।
लंबे समय तक टिकैत के साथ रहे दरियाव सिंह बताते हैं कि किसान चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत पर अटूट भरोसा करते थे। उनकी सादगी किसानों को अपनी ओर आकर्षित करती थी। उन्होंने किसानों को जाति से ऊपर उठकर किसान जाति में जोड़ने का काम किया।
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बुजुर्ग किसान कालूराम कहते हैं कि चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने किसानों को सरकारी कर्मचारियों के उत्पीड़न से मुक्ति दिलाने का काम किया। कार्यालयों में पहले किसान-मजदूरों के घुसने की हिम्मत नहीं होती थी, लेकिन टिकैत ने किसानों को एकजुट कर आवाज बुलंद करना सिखाया।
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इनसेट
इस तरह बनीं और छा गई भाकियू
- वर्ष 1986 में जनता इंटर कॉलेज बड़ौत में पश्चिम के खाप चौधरियों की बैठक। अध्यक्ष पद पर चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के नाम पर मंथन।
- 17 अक्तूबर 1986 सिसौली में खाप चौधरी और किसानों की बैठक। बालियान खाप के चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को भाकियू का अध्यक्ष बनाया।
- 17 जनवरी 1987 को सिसौली में मासिक पंचायत। 27 जनवरी को शामली के करमूखेड़ी बिजलीघर पर धरने का फैसला। चार दिन धरना चला।
- 17 फरवरी 1987 को सिसौली में पंचायत। एक मार्च को शामली के करमूखेड़ी बिजलीघर पर महापंचायत का एलान किया।
- एक मार्च 1987 को करमूखेड़ी में महापंचायत, पुलिस की फायरिंग में दो किसानों का बलिदान। यहीं से भाकियू को सुर्खियां मिली।
इनसेट
अब तक भाकियू के सबसे बड़े आंदोलन
- मेरठ कमिश्ननरी का घेराव : भाकियू ने 27 जनवरी से 19 फरवरी 1988 तक तक लंबा धरना प्रदर्शन किया। टिकैत की पहली बार गिरफ्तारी के प्रयास असफल रहे।
- रजबपुर सत्याग्रह : रजबपुर में पांच किसानों की मौत के बाद भाकियू ने छह मार्च 1988 से 23 जून 1988 तक सत्याग्रह किया। जेल भरो आंदोलन किया।
- वोट क्लब का धरना : किसानों के मुद्दे पर 25 से 31 अक्तूबर 1988 तक दिल्ली के वोट क्लब पर धरना दिया। देशभर के किसानों का सैलाब उमड़ा।
- अलीगढ़ के खैर का आंदोलन : खैर में किसानों के मुद्दे पर भाकियू ने बड़ी पंचायत की। गेहूं और अन्य फसलों का मुद्दा उठाया।
- नईमा अपहरण कांड : तीन अगस्त 1989 से 10 अक्तूबर 1989 तक भोपा में आंदोलन। सीकरी की नईमा की बरामदगी के लिए हुआ था आंदोलन।
- दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन : संयुक्त किसान मोर्चा के साथ भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत आंदोलन का बड़ा चेहरा बने।
भाकियू अराजनैतिक की व्याख्यान माला
मुजफ्फरनगर। भाकियू अराजनैतिक के प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि बुधवार को श्रीराम कॉलेज के सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। बाबा टिकैत की पुण्य तिथि पर व्याख्यान माला भी आयोजित की जाएगी। इसके अलावा संगठन के दो वर्षों के सफर पर उपलब्धियों के साथ साथ कार्यक्रम,नीतियों पर भी चर्चा की जाएगी।
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किसान मसीहा की पुण्यतिथि जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण बचाओ संकल्प दिवस के रूप में मनाई जाएगी। भाकियू जिलाध्यक्ष योगेश शर्मा ने बताया कि मुख्य कार्यक्रम किसान भवन सिसौली में आयोजित होगा। सुबह आठ बजे हवन होगा। इसके बाद 11 बजे श्रद्धांजलि सभा आयोजित होगी।
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लंबे समय तक टिकैत के साथ रहे दरियाव सिंह बताते हैं कि किसान चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत पर अटूट भरोसा करते थे। उनकी सादगी किसानों को अपनी ओर आकर्षित करती थी। उन्होंने किसानों को जाति से ऊपर उठकर किसान जाति में जोड़ने का काम किया।
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बुजुर्ग किसान कालूराम कहते हैं कि चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने किसानों को सरकारी कर्मचारियों के उत्पीड़न से मुक्ति दिलाने का काम किया। कार्यालयों में पहले किसान-मजदूरों के घुसने की हिम्मत नहीं होती थी, लेकिन टिकैत ने किसानों को एकजुट कर आवाज बुलंद करना सिखाया।
इनसेट
इस तरह बनीं और छा गई भाकियू
- वर्ष 1986 में जनता इंटर कॉलेज बड़ौत में पश्चिम के खाप चौधरियों की बैठक। अध्यक्ष पद पर चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के नाम पर मंथन।
- 17 अक्तूबर 1986 सिसौली में खाप चौधरी और किसानों की बैठक। बालियान खाप के चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत को भाकियू का अध्यक्ष बनाया।
- 17 जनवरी 1987 को सिसौली में मासिक पंचायत। 27 जनवरी को शामली के करमूखेड़ी बिजलीघर पर धरने का फैसला। चार दिन धरना चला।
- 17 फरवरी 1987 को सिसौली में पंचायत। एक मार्च को शामली के करमूखेड़ी बिजलीघर पर महापंचायत का एलान किया।
- एक मार्च 1987 को करमूखेड़ी में महापंचायत, पुलिस की फायरिंग में दो किसानों का बलिदान। यहीं से भाकियू को सुर्खियां मिली।
इनसेट
अब तक भाकियू के सबसे बड़े आंदोलन
- मेरठ कमिश्ननरी का घेराव : भाकियू ने 27 जनवरी से 19 फरवरी 1988 तक तक लंबा धरना प्रदर्शन किया। टिकैत की पहली बार गिरफ्तारी के प्रयास असफल रहे।
- रजबपुर सत्याग्रह : रजबपुर में पांच किसानों की मौत के बाद भाकियू ने छह मार्च 1988 से 23 जून 1988 तक सत्याग्रह किया। जेल भरो आंदोलन किया।
- वोट क्लब का धरना : किसानों के मुद्दे पर 25 से 31 अक्तूबर 1988 तक दिल्ली के वोट क्लब पर धरना दिया। देशभर के किसानों का सैलाब उमड़ा।
- अलीगढ़ के खैर का आंदोलन : खैर में किसानों के मुद्दे पर भाकियू ने बड़ी पंचायत की। गेहूं और अन्य फसलों का मुद्दा उठाया।
- नईमा अपहरण कांड : तीन अगस्त 1989 से 10 अक्तूबर 1989 तक भोपा में आंदोलन। सीकरी की नईमा की बरामदगी के लिए हुआ था आंदोलन।
- दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन : संयुक्त किसान मोर्चा के साथ भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत आंदोलन का बड़ा चेहरा बने।
भाकियू अराजनैतिक की व्याख्यान माला
मुजफ्फरनगर। भाकियू अराजनैतिक के प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि बुधवार को श्रीराम कॉलेज के सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। बाबा टिकैत की पुण्य तिथि पर व्याख्यान माला भी आयोजित की जाएगी। इसके अलावा संगठन के दो वर्षों के सफर पर उपलब्धियों के साथ साथ कार्यक्रम,नीतियों पर भी चर्चा की जाएगी।