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हमें पाकिस्तान जाने की सलाह देने वाले देश छोड़कर कहीं और चले जाए: मदनी

Sun, 29 May 2022 11:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 29 May 2022 11:45 PM IST
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Those who advised us to go to Pakistan should leave the country and go somewhere else: Madani
अधिवेशन में संबोधन करते जमीयत अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी - फोटो : DEVBAND
हमें पाकिस्तान जाने की सलाह देने वाले देश छोड़कर कहीं और चले जाए: मदनी
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देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद की राष्ट्रीय प्रबंधक कमेटी के दो दिवसीय अधिवेशन के के समापन पर जमीयत अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यसभा सांसद मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि जो लोग हमें पाकिस्तान जाने का मशविरा देते हैं, यदि उन्हें हमारा मजहब, पहनावा और खानपान पसंद नहीं है तो वह देश छोड़कर कहीं ओर चले जाएं।
मुल्क के कोने-कोने से अधिवेशन में शिरकत करने पहुंचे उलमा की उपस्थिति में मदनी ने कहा कि हम इसी देश के रहने वाले हैं। हमारे पास पाकिस्तान जाने का विकल्प था, उसके बावजूद हम नहीं गए। लेकिन यह विकल्प आपके पास नहीं था। हमें अल्पसंख्यक माना जाता है। नफरत फैलाने वालों के इतर यदि हम अपनी सोच वालों को मिलाएं तो हम सबसे बड़ी आबादी हैं और देश में नफरत बांटने वालों की संख्या बहुत कम है। राष्ट्र निर्माण और देश को मजबूती देने वाले लोग अधिक हैं। उन्होंने कहा कि अगर नफरत फैलाने वाले एकता अखंडता की बात करते हैं तो वह उनका राष्ट्रप्रेम है और हम देश बचाने की बात करें तो उसे ढोंग बताया जाता है। वह लोग यह सुन लें कि इस देश के लिए अगर मेरा खून बहेगा तो यह मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी। मदनी ने देश में प्रेम, सद्भावना, एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए सभी वर्गों और धर्मों के साथ मिलकर भाईचारे के साथ काम करने पर जोर दिया।
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इतिहास के मतभेदों को जिंदा करना
सद्भाव और शांति के लिए खतरा
ईदगाह के मैदान में हुए अधिवेशन के दूसरे दिन वाराणसी से आए हाफिज उबैदुल्लाह ने धार्मिक स्थलों को लेकर प्रस्ताव रखते हुए कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद हो या फिर मथुरा की शाही ईदगाह या अन्य धार्मिक स्थल, वर्तमान में इनके खिलाफ एक अभियान छेड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि सत्तासीन लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि इतिहास के मतभेदों को बार-बार जीवित करेंगे तो यह सद्भाव और शांति के लिए खतरा साबित होगा। इस प्रस्ताव का समर्थन दारुल उलूम के नायब मोहतमिम मौलाना मुफ्ती राशिद आजमी ने किया।
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कॉमन सिविल कोड बर्दाश्त नहीं
प्रोफेसर मौलाना नोमानी शाहजहांपुरी ने कॉमन सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) को लेकर प्रस्ताव रखते हुए कहा कि संविधान ने हर नागरिक को अपने मजहब के मुताबिक रहने का अधिकार दिया है। कॉमन सिविल कोड मुस्लिम पर्सनल लॉ को खत्म करने के लिए बहुत बड़ा षडयंत्र है, जिसे मुसलमान बर्दाश्त नहीं करेगा। मजहबी लॉ में भी तब्दीली स्वीकार्य नहीं है। यदि सरकार जबरन इसे थोपने का प्रयास करेगी तो उन्हें विरोध करने को मजबूर होना पड़ेगा। असम के सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
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