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मेरा आखिरी चुनाव था, जनता ने अहंकार को हराया : मलिक
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मुजफ्फरनगर। नव निर्वाचित सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने जीत के बाद कहा कि यह चुनाव सत्ता और जनता के बीच था। जनता की जीत हुई है। यह मेरे जीवन का आखिरी चुनाव था। जनता ने मेरी लाज रखी है। यह हमारी नहीं जनता की जीत है।
कूकड़ा मंडी में मतगणना पूरी होने के बाद सपा प्रत्याशी हरेंद्र मलिक ने कहा कि लोकसभा चुनाव में जनता ने सत्ता को हरा दिया है। यह ऐसा चुनाव था जो सत्ता के खिलाफ जनता लड़ रही थी। युवाओं की बेरोजगारी, सरकारी कर्मचारियों की पेंशन बड़ा मुद्दा रहा। उन्होंने कहा कि उन्हें इस चुनाव में प्रत्येक वर्ग का सहयोग मिला है। मेरे लंबे राजनीतिक जीवन का यह आखिरी चुनाव था। लोकसभा क्षेत्र की जनता ने इस चुनाव में उनकी लाज रखी है।
पिता सांसद और बेटा विधायक
हरेंद्र मलिक की जीत ने अनोखा रिकाॅर्ड बनाया है। एक ही घर में सांसद और विधायक बन गए हैं। करीब 50 साल की राजनीतिक जीवन में सपा महासचिव हरेन्द्र मलिक ने जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। वह खुद सांसद चुने गए, जबकि उनके पुत्र पंकज मलिक विधायक हैं।
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तीसरे सदन में प्रवेश कर गए हरेंद्र
हरेंद्र मलिक जिले के ऐसे नेता है जो तीसरा सदन देखेंगे। हरेंद्र मलिक चार बार विधायक रहे हैं। एक बार वह राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। ये दोनों सदन वह पहले ही देख चुके हैं। अब उन्हें लोकसभा चुनाव जीतकर तीसरे सदन में जाने का अवसर मिला है।
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कूकड़ा मंडी में मतगणना पूरी होने के बाद सपा प्रत्याशी हरेंद्र मलिक ने कहा कि लोकसभा चुनाव में जनता ने सत्ता को हरा दिया है। यह ऐसा चुनाव था जो सत्ता के खिलाफ जनता लड़ रही थी। युवाओं की बेरोजगारी, सरकारी कर्मचारियों की पेंशन बड़ा मुद्दा रहा। उन्होंने कहा कि उन्हें इस चुनाव में प्रत्येक वर्ग का सहयोग मिला है। मेरे लंबे राजनीतिक जीवन का यह आखिरी चुनाव था। लोकसभा क्षेत्र की जनता ने इस चुनाव में उनकी लाज रखी है।
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पिता सांसद और बेटा विधायक
हरेंद्र मलिक की जीत ने अनोखा रिकाॅर्ड बनाया है। एक ही घर में सांसद और विधायक बन गए हैं। करीब 50 साल की राजनीतिक जीवन में सपा महासचिव हरेन्द्र मलिक ने जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया। वह खुद सांसद चुने गए, जबकि उनके पुत्र पंकज मलिक विधायक हैं।
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तीसरे सदन में प्रवेश कर गए हरेंद्र
हरेंद्र मलिक जिले के ऐसे नेता है जो तीसरा सदन देखेंगे। हरेंद्र मलिक चार बार विधायक रहे हैं। एक बार वह राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। ये दोनों सदन वह पहले ही देख चुके हैं। अब उन्हें लोकसभा चुनाव जीतकर तीसरे सदन में जाने का अवसर मिला है।