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इस बार चीन की नहीं, स्वदेशी राखी बहनों की पसंद
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बच्चों में खूब पसंद की जा रही कार्टून वाली राखियां।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
इस बार चीन की नहीं, स्वदेशी राखी बहनों की पसंद
मुजफ्फरनगर। इस बार चीन को सबक सिखाने के लिए चाइनीज राखियां का बहनों ने भी बहिष्कार किया है, जिससे बाजार में डिमांड नहीं होने से चाइनीज राखी गायब है। थोक व्यापारियों के अनुसार एक अनुमान के मुताबिक इस बार चाइनीज राखी नहीं बिकने से करीब तीन करोड़ की चपत चीन को लगी है। स्वदेशी के बीच बहनों को सादी और देश में बनी राखी पहली पसंद है।
भाई-बहन के अटूट प्रेम और पवित्र रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व तीन अगस्त सोमवार को मनाया जाएगा। राखी का बाजार सजे हैं, मगर इस बार बाजार से चाइनीज राखी गायब है। बहनों ने भी चाइनीज राखी का बहिष्कार किया है, जिससे माल ही बाजार में नहीं आया है। जबकि गत वर्षों तक राखी के अवसर पर चाइनीज राखियां बाजार पर हावी रहती थी। सदर बाजार निवासी थोक विक्रेता बबलू का कहना है कि गत वर्ष जनपद में करीब तीन करोड़ रुपये की चाइनीज राखी की बिक्री हुई थी, जो इस बार नहीं के बराबर है। सभी ने चाइनीज राखियों बहिष्कार किया है।
बच्चों की डिमांट छोटा भीम
कोर्ट रोड के दुकानदार मनीष सिंह बांगा कहते हैं कि इस बार बच्चे भी लाईटिंग वाली चाइनीज राखी नहीं मांग रहे, उनकी पसंद गणेशजी, हनुमानजी, छोटा भीम की राखी है, जो स्वदेशी है।
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सदर बाजार के थोक राखी विक्रेता गौरव गुप्ता कहते हैं कि चाइनीज राखी मंगाई ही नहीं। बहनें भी अपने यहां की बनी राखी मांग रही हैं। फैंसी राखी के बजाय सादी राखी की डिमांड है। हालांकि कोरोना काल के चलते बिक्री गत वर्ष से कुछ कम है। थोक विक्रेता नितिन गोयल कहते हैं कि मीडियम दाम की 10 से 20 रुपये वाली राखी बिक रही है। कलावा और डोरे वाली राखी ज्यादा पसंद की जा रही है। सदर बाजार के दुकानदार दीपक सिंघल ने बताया कि कोलकाता, अहमदाबाद, मुंबई, राजकोट की राखी की बाजार में डिमांड है। गत वर्ष चाइनीज राखी बिकी थी, इस बार कोई मांग नहीं है।
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मुजफ्फरनगर। इस बार चीन को सबक सिखाने के लिए चाइनीज राखियां का बहनों ने भी बहिष्कार किया है, जिससे बाजार में डिमांड नहीं होने से चाइनीज राखी गायब है। थोक व्यापारियों के अनुसार एक अनुमान के मुताबिक इस बार चाइनीज राखी नहीं बिकने से करीब तीन करोड़ की चपत चीन को लगी है। स्वदेशी के बीच बहनों को सादी और देश में बनी राखी पहली पसंद है।
भाई-बहन के अटूट प्रेम और पवित्र रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व तीन अगस्त सोमवार को मनाया जाएगा। राखी का बाजार सजे हैं, मगर इस बार बाजार से चाइनीज राखी गायब है। बहनों ने भी चाइनीज राखी का बहिष्कार किया है, जिससे माल ही बाजार में नहीं आया है। जबकि गत वर्षों तक राखी के अवसर पर चाइनीज राखियां बाजार पर हावी रहती थी। सदर बाजार निवासी थोक विक्रेता बबलू का कहना है कि गत वर्ष जनपद में करीब तीन करोड़ रुपये की चाइनीज राखी की बिक्री हुई थी, जो इस बार नहीं के बराबर है। सभी ने चाइनीज राखियों बहिष्कार किया है।
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बच्चों की डिमांट छोटा भीम
कोर्ट रोड के दुकानदार मनीष सिंह बांगा कहते हैं कि इस बार बच्चे भी लाईटिंग वाली चाइनीज राखी नहीं मांग रहे, उनकी पसंद गणेशजी, हनुमानजी, छोटा भीम की राखी है, जो स्वदेशी है।
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सदर बाजार के थोक राखी विक्रेता गौरव गुप्ता कहते हैं कि चाइनीज राखी मंगाई ही नहीं। बहनें भी अपने यहां की बनी राखी मांग रही हैं। फैंसी राखी के बजाय सादी राखी की डिमांड है। हालांकि कोरोना काल के चलते बिक्री गत वर्ष से कुछ कम है। थोक विक्रेता नितिन गोयल कहते हैं कि मीडियम दाम की 10 से 20 रुपये वाली राखी बिक रही है। कलावा और डोरे वाली राखी ज्यादा पसंद की जा रही है। सदर बाजार के दुकानदार दीपक सिंघल ने बताया कि कोलकाता, अहमदाबाद, मुंबई, राजकोट की राखी की बाजार में डिमांड है। गत वर्ष चाइनीज राखी बिकी थी, इस बार कोई मांग नहीं है।