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जमीन पर 45 साल में एक दिन भी नहीं हुई खेती
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बहेड़ी में शमशान की भूमि का ग्राम प्रधान को दखल देते हुए राजस्व अधिकारी।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। खेती के लिए आवंटित श्मशान घाट की 30 बीघा जमीन पर कभी भी खेती नहीं हुई है। 45 साल में एक दिन भी इस जमीन पर हल नहीं चला है। जिन लोगों को पट्टे आवंटित हुए थे वे जानते हुए कि जमीन श्मशान घाट की है। मिल ने योजनाबद्ध तरीके से जमीन अपने नाम कराई। 40 साल जमीन खाली पड़ी रहने के बाद 2016 से कब्जे का प्रयास किया जा रहा था।
सदर तहसील के गांव बहेड़ी की भूमि प्रबंधक समिति ने 45 साल पहले एक दिसंबर 1975 को गांव के दस अनुसूचित जाति के लोगों के नाम भूमि आवंटन का प्रस्ताव किया था, जिस पर 31 दिसंबर 1975 को एसडीएम नीरा यादव ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी थी। जिन लोगों को जमीन आवंटित की गई उन्हें एक दिन भी इस जमीन का लाभ नहीं मिला। 45 साल में एक दिन भी श्मशान घाट की इस जमीन पर हल नहीं चला। गांव के ये गरीब लोग यह अच्छी तरह जानते थे कि तुम्हें श्मशान की भूमि दी गई है। इस समय इन आवंटियों में से एक भी जीवित नहीं है। उप्र राज्य सहकारी निगम की चीनी मिल रोहाना ने आवंटन के 14 साल बाद 1989 में जमीन का अधिग्रहण कर लिया। जिन लोगों को जमीन का आवंटन हुआ उन्हें नौ रुपये 40 पैसे प्रति किसान के हिसाब से मुआवजा दे दिया गया।
सहकारी चीनी मिल ने जमीन अधिग्रहित करने के बाद भी इस पर कभी कब्जा नहीं किया। 2010 में चीनी मिल को आईपीएल ने खरीद लिया। 2016 में आईपीएल ने इस जमीन पर कब्जे के लिए प्रक्रिया शुरू की तो ग्रामीणों ने इसकी शिकायत कर दी। मिल ने इस जमीन पर डिस्टलरी पास करा ली थी। डीएम से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत हुई। बाद में डीएम के न्यायालय में इस जमीन को लेकर वाद दायर किया गया। डेढ़ साल बाद डीएम सेल्वा कुमारी जे ने अपना निर्णय सुनाया।
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करोड़ों की है श्मशान भूमि
मुजफ्फरनगर। बहेड़ी के श्मशान की यह भूमि करोड़ों की है। मुजफ्फरनगर-सहारनपुर मार्ग पर स्थित यह 30 बीघा जमीन इस समय बहुत मायने रखती है।
इन लोगों के नाम हुआ था आवंटन
मुजफ्फरनगर। जमीन का आवंटन जिन दस लोगों के नाम हुआ उनमें खजान, सुरजी, भंवर सिंह, मनोहर, चौहड़, महावीर, रामसिंह, कालू, फुल्लू, हरदेवा शामिल रहे।
केस लड़ने वाले वकील का किया स्वागत
मुजफ्फरनगर। श्मशान की भूमि का केस लड़ने वाले अधिवक्ता राम अवतार सिंघल का बहेड़ी के ग्रामीणों ने स्वागत किया।
राजस्व रिकार्ड से आईपील का नाम हटा
मुजफ्फरनगर। एसडीएम सदर दीपक कुमार ने बताया कि डीएम के न्यायालय से हुए आदेश के बाद तहसील ने अपने स्तर की कार्रवाई कर दी है। राजस्व रिकार्ड में इंडियन पोटाश लिमिटेड रोहाना का नाम निरस्त कर दिया गया है। धारा 132 में सार्वजनिक उपयोग की भूमि श्मशान दर्ज की गई है। नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक की मौजूदगी में भूमि पर गांव सभा बहेडी को मौके पर दखल दे दिया गया है।
- आईपीएल ने वर्ष 2010 में उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी चीनी मिल निगम से रोहाना चीनी मिल को खरीदा था। तब मिल के अलावा भूमि का भी बैनामा किया था। मिल ने श्मशान की भूमि पर कोई कब्जा नहीं किया। डीएम के आदेश क्या हुए, वह देख कर ही कुछ बताया जा सकता है। - लोकेश कुमार, प्रधान प्रबंधक, आईपीएल रोहाना चीनी मिल
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सदर तहसील के गांव बहेड़ी की भूमि प्रबंधक समिति ने 45 साल पहले एक दिसंबर 1975 को गांव के दस अनुसूचित जाति के लोगों के नाम भूमि आवंटन का प्रस्ताव किया था, जिस पर 31 दिसंबर 1975 को एसडीएम नीरा यादव ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी थी। जिन लोगों को जमीन आवंटित की गई उन्हें एक दिन भी इस जमीन का लाभ नहीं मिला। 45 साल में एक दिन भी श्मशान घाट की इस जमीन पर हल नहीं चला। गांव के ये गरीब लोग यह अच्छी तरह जानते थे कि तुम्हें श्मशान की भूमि दी गई है। इस समय इन आवंटियों में से एक भी जीवित नहीं है। उप्र राज्य सहकारी निगम की चीनी मिल रोहाना ने आवंटन के 14 साल बाद 1989 में जमीन का अधिग्रहण कर लिया। जिन लोगों को जमीन का आवंटन हुआ उन्हें नौ रुपये 40 पैसे प्रति किसान के हिसाब से मुआवजा दे दिया गया।
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सहकारी चीनी मिल ने जमीन अधिग्रहित करने के बाद भी इस पर कभी कब्जा नहीं किया। 2010 में चीनी मिल को आईपीएल ने खरीद लिया। 2016 में आईपीएल ने इस जमीन पर कब्जे के लिए प्रक्रिया शुरू की तो ग्रामीणों ने इसकी शिकायत कर दी। मिल ने इस जमीन पर डिस्टलरी पास करा ली थी। डीएम से लेकर मुख्यमंत्री तक शिकायत हुई। बाद में डीएम के न्यायालय में इस जमीन को लेकर वाद दायर किया गया। डेढ़ साल बाद डीएम सेल्वा कुमारी जे ने अपना निर्णय सुनाया।
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करोड़ों की है श्मशान भूमि
मुजफ्फरनगर। बहेड़ी के श्मशान की यह भूमि करोड़ों की है। मुजफ्फरनगर-सहारनपुर मार्ग पर स्थित यह 30 बीघा जमीन इस समय बहुत मायने रखती है।
इन लोगों के नाम हुआ था आवंटन
मुजफ्फरनगर। जमीन का आवंटन जिन दस लोगों के नाम हुआ उनमें खजान, सुरजी, भंवर सिंह, मनोहर, चौहड़, महावीर, रामसिंह, कालू, फुल्लू, हरदेवा शामिल रहे।
केस लड़ने वाले वकील का किया स्वागत
मुजफ्फरनगर। श्मशान की भूमि का केस लड़ने वाले अधिवक्ता राम अवतार सिंघल का बहेड़ी के ग्रामीणों ने स्वागत किया।
राजस्व रिकार्ड से आईपील का नाम हटा
मुजफ्फरनगर। एसडीएम सदर दीपक कुमार ने बताया कि डीएम के न्यायालय से हुए आदेश के बाद तहसील ने अपने स्तर की कार्रवाई कर दी है। राजस्व रिकार्ड में इंडियन पोटाश लिमिटेड रोहाना का नाम निरस्त कर दिया गया है। धारा 132 में सार्वजनिक उपयोग की भूमि श्मशान दर्ज की गई है। नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक की मौजूदगी में भूमि पर गांव सभा बहेडी को मौके पर दखल दे दिया गया है।
- आईपीएल ने वर्ष 2010 में उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी चीनी मिल निगम से रोहाना चीनी मिल को खरीदा था। तब मिल के अलावा भूमि का भी बैनामा किया था। मिल ने श्मशान की भूमि पर कोई कब्जा नहीं किया। डीएम के आदेश क्या हुए, वह देख कर ही कुछ बताया जा सकता है। - लोकेश कुमार, प्रधान प्रबंधक, आईपीएल रोहाना चीनी मिल