फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   There was a time when people saw the bicycle, people used to say ride like this

एक दौर था, साइकिल दिखते ही लोग कहते सवारी हो तो ऐसी

Thu, 02 Jun 2022 11:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jun 2022 11:45 PM IST
विज्ञापन
There was a time when people saw the bicycle, people used to say ride like this
नगर में साइकिल से गंतव्य को जाते विद्यार्थी। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
मदन बालियान
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर। नए दौर की पीढ़ी बाइक, स्कूटी और कारों की चकाचौंध में उलझी है, लेकिन एक दौर साइकिल का भी रहा। परिवहन के साधनों की कमी थी, तब लोग मीलों का सफर साइकिल से ही तय करते थे। वर्तमान में बच्चों को साइकिल गिफ्ट की जाती है, लेकिन कभी यही साइकिल शादी में दूल्हे की शान बढ़ाती थी। दूर-दूराज के स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षक साइकिल पर ही सफर करते थे। सेहत के लिए फायदेमंद और खर्च भी कम। बीमारियों से भी साइकिल का सफर लोगों को बचाकर रखता था। जय भारत इंटर कॉलेज छपार से सेवानिवृत्त हुए शिक्षक शुगन चंद त्यागी (85) इन दिनों चरथावल में रह रहे हैं। वह कहते हैं कि साइकिल का सफर सेहत को दुरुस्त करने वाला है। डॉक्टर अब खुद लोगों को साइकिल चलाने की सलाह देते हैं।
पिता विधायक थे और मुझे दहेज में मिली थी साइकिल
पूर्व विधायक स्वर्गीय राजेंद्र दत्त त्यागी के पुत्र आनंद प्रकाश त्यागी एडवोकेट (88) बताते हैं कि तीन दशक पहले तक दहेज में साइकिल दी जाती थी। मेरी शादी भोपा थाने के गांव मलपुरा की रहने वाली प्रतिभा से हुई थी। उनके ससुर उस जमाने में प्रशासनिक अधिकारी थे। उन्होंने मुझे शादी में साइकिल दी थी। साइकिल से कचहरी में अरसे तक वकालत के दौरान आवागमन किया। चरथावल से से मुजफ्फरनगर साइकिल से ही जाया करते थे। साइकिल की सवारी का कोई तोड़ नहीं है। साइकिल चलाने की वजह से ही उन्हें आज तक घुटना दर्द समेत अन्य बीमारी नहीं है।
विज्ञापन

हमेशा हमराही रही मेरी साइकिल
भोपा के गांव छछरौली निवासी किसान कंवरपाल बाबा (80) बताते हैं कि उनके चाचा राम सिंह पटवारी की शादी में साइकिल मिली थी। इसी वजह से उन्होंने 11 वर्ष की उम्र में साइकिल चलाना सीख लिया। 1968 में उनकी शादी हुई। उनके साइकिल प्रेम को देखते हुए शादी में उन्हें भी साइकिल मिली। एक बार साथी धनपाल, बृजपाल और वेदपाल के साथ साइकिल पर सवार होकर हरिद्वार स्थित बीएचएल कंपनी में नौकरी की तलाश में गए थे। अब भी वह अधिकांश सफर साइकिल से ही तय करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

साइकिल पर सवार हुए तो फिर नहीं उतरे
छछरौली के रहने वाले शिक्षक कृपाल सिंह भी साइकिल प्रेमी है। वे बताते हैं कि उन्हें 40 साल पढ़ाते हो गए। इसी दौरान ड्यूटी के लिए वह 10 से लेकर 50 किमी तक का सफर साइकिल से ही तय करते हैं। सुबह सवेरे साइकिल को साफ सुथरा करना उनका पहला कार्य है। बेलड़ा निवासी मास्टर रामकुमार, जयपाल सिंह भी साइकिल के पुराने शौकीन हैं।
साइकिल से सफर करने वाले सीओ राम मोहन शर्मा
भोपा सर्किल के सीओ रहे राममोहन शर्मा भोपा में तैनाती के समय बाजार में अन्य स्थानों पर साइकिल पर घूमते देखे जाते थे। वह बताते हैं कि बचपन से लेकर आज तक वह साइकिल का सफर खूब पसंद करते हैं। घर से लेकर जंगल तक, गांव से लेकर शहर तक, घर से लेकर स्कूल तक उन्होंने यह सफर साइकिल के माध्यम से तय किया हैं। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग मथुरा में हैं।

साइकिल चलाओगे तो स्वस्थ रहोगे
फोटो
सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार बताते हैं कि साइकिल चलाने के फायदे ही फायदे हैं। फेफड़े और ह्दय रोगों से छुटकारा मिलता है। तनाव कम होता है। गठिया का खतरा कम हो जाता है। जोड़ों का दर्द नहीं होता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed