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सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता: शुभांजलि
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इंटर में जिले की टॉपर शुभांजलि शर्मा को मिठाई खिलाती मां ममता शर्मा।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता: शुभांजलि
मुजफ्फरनगर। यूपी बोर्ड इंटर की जिला टॉपर शुभांजलि शर्मा (86.4 प्रतिशत) कहती हैं कि सफलता के लिए कभी भी शॉर्टकट काम नहीं आता। इसके लिए कड़ी मेहनत और सतत प्रयास की आवश्यकता होती है। न केवल स्वयं के बल्कि परिवार वालों को भी जूझना पड़ता है।
मुनीम कॉलोनी नई मंडी निवासी शुभांजलि के पिता विनोद कुमार शर्मा की 2015 में बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी। मां ममता शर्मा प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका हैं। शुभांजलि बताती हैं कि स्कूल के अलावा रोजाना सात से आठ घंटे की पढ़ाई की। उसके गणित में 94, फिजिक्स में 82, केमिस्ट्री में 89, हिंदी में 78 और अंग्रेजी में 89 नंबर हैं। वह अब जिले से बाहर जाना चाहती है ताकि आईएएस बनने के लिए तैयारी कर सके। लक्ष्य निर्धारित कर लिया है, अब उसे पाने के लिए मेहनत करनी है। उसे स्कूल टॉप करने की उम्मीद थी लेकिन यह अंदाजा नहीं था कि जिला टॉप कर जाएगी। पढ़ाई के अलावा डांसिंग एवं सिंगिंग का शौक रखने वाली शुभांजलि को हाईस्कूल में भी मुख्यमंत्री की ओर से 21 हजार रुपये का चेक मिला था।
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बेटी सो न जाए, इसलिए मां जागती रही
मुजफ्फरनगर। इंटर की जिला टॉपर शुभांजलि की मां ममता शर्मा पर पति की मृत्यु के बाद तीन बच्चों की परवरिश करने की जिम्मेदारी है। वह कहती हैं कि उनकी आस केवल बच्चों पर है। वे पढ़-लिखकर कुछ बन जाएंगे तो मेहनत सफल हो जाएगी। बड़ा बेटा एमसीए कर रहा है जबकि छोटा दसवीं कक्षा में है। ममता शर्मा बताती हैं कि बेटी की शिक्षा के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया। परीक्षा के लिए रात भर इसलिए जागती रहती कि कहीं बेटी सो न जाए। बेटी के पास मोबाइल नहीं था और न ही वह टीवी देखती थी। बच्चे अब यही आश्वासन देते हैं कि तीन-चार साल की मेहनत और है, इसके बाद परिवार की सब परेशानियां खत्म हो जाएंगी।
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आर्मी ऑफिसर बनना चाहता है कि आकाश
मुजफ्फरनगर। यूपी बोर्ड इंटर में जनपद में तीसरा स्थान पाने वाला आकाश शर्मा (84.80 प्रतिशत) आर्मी ऑफिसर बनना चाहता है। इसके लिए वह एनडीए की तैयारी कर रहा है। अगले साल परीक्षा में शामिल होगा। दक्षिणी कृष्णापुरी निवासी आकाश के पिता देवेंद्र शर्मा एसिड प्लांट में काम करते हैं तथा मां रेनू शर्मा गृहिणी हैं। आकाश ने बताया कि घर पर पढ़ाई के साथ ही उसने कोचिंग भी की। पिता को कामकाज में समय नहीं मिल पाता। मां इंटर तक पढ़ी हैं। इसलिए स्कूल, कोचिंग और खुद की तैयारी से ही परीक्षा दी। बड़ा भाई बीटेक कर रहा है जबकि छोटी बहन छठी क्लास में है।
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मुजफ्फरनगर। यूपी बोर्ड इंटर की जिला टॉपर शुभांजलि शर्मा (86.4 प्रतिशत) कहती हैं कि सफलता के लिए कभी भी शॉर्टकट काम नहीं आता। इसके लिए कड़ी मेहनत और सतत प्रयास की आवश्यकता होती है। न केवल स्वयं के बल्कि परिवार वालों को भी जूझना पड़ता है।
मुनीम कॉलोनी नई मंडी निवासी शुभांजलि के पिता विनोद कुमार शर्मा की 2015 में बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी। मां ममता शर्मा प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका हैं। शुभांजलि बताती हैं कि स्कूल के अलावा रोजाना सात से आठ घंटे की पढ़ाई की। उसके गणित में 94, फिजिक्स में 82, केमिस्ट्री में 89, हिंदी में 78 और अंग्रेजी में 89 नंबर हैं। वह अब जिले से बाहर जाना चाहती है ताकि आईएएस बनने के लिए तैयारी कर सके। लक्ष्य निर्धारित कर लिया है, अब उसे पाने के लिए मेहनत करनी है। उसे स्कूल टॉप करने की उम्मीद थी लेकिन यह अंदाजा नहीं था कि जिला टॉप कर जाएगी। पढ़ाई के अलावा डांसिंग एवं सिंगिंग का शौक रखने वाली शुभांजलि को हाईस्कूल में भी मुख्यमंत्री की ओर से 21 हजार रुपये का चेक मिला था।
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बेटी सो न जाए, इसलिए मां जागती रही
मुजफ्फरनगर। इंटर की जिला टॉपर शुभांजलि की मां ममता शर्मा पर पति की मृत्यु के बाद तीन बच्चों की परवरिश करने की जिम्मेदारी है। वह कहती हैं कि उनकी आस केवल बच्चों पर है। वे पढ़-लिखकर कुछ बन जाएंगे तो मेहनत सफल हो जाएगी। बड़ा बेटा एमसीए कर रहा है जबकि छोटा दसवीं कक्षा में है। ममता शर्मा बताती हैं कि बेटी की शिक्षा के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया। परीक्षा के लिए रात भर इसलिए जागती रहती कि कहीं बेटी सो न जाए। बेटी के पास मोबाइल नहीं था और न ही वह टीवी देखती थी। बच्चे अब यही आश्वासन देते हैं कि तीन-चार साल की मेहनत और है, इसके बाद परिवार की सब परेशानियां खत्म हो जाएंगी।
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आर्मी ऑफिसर बनना चाहता है कि आकाश
मुजफ्फरनगर। यूपी बोर्ड इंटर में जनपद में तीसरा स्थान पाने वाला आकाश शर्मा (84.80 प्रतिशत) आर्मी ऑफिसर बनना चाहता है। इसके लिए वह एनडीए की तैयारी कर रहा है। अगले साल परीक्षा में शामिल होगा। दक्षिणी कृष्णापुरी निवासी आकाश के पिता देवेंद्र शर्मा एसिड प्लांट में काम करते हैं तथा मां रेनू शर्मा गृहिणी हैं। आकाश ने बताया कि घर पर पढ़ाई के साथ ही उसने कोचिंग भी की। पिता को कामकाज में समय नहीं मिल पाता। मां इंटर तक पढ़ी हैं। इसलिए स्कूल, कोचिंग और खुद की तैयारी से ही परीक्षा दी। बड़ा भाई बीटेक कर रहा है जबकि छोटी बहन छठी क्लास में है।