{"_id":"675a80ae6db3f0eba807977d","slug":"there-is-an-atmosphere-of-sadness-among-the-family-members-due-to-the-death-of-the-deceased-there-is-mourning-in-the-village-muzaffarnagar-news-c-26-1-sal1002-133284-2024-12-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Muzaffarnagar News: किसान की मौत से परिजनों में गम का माहौल, गांव में छाया शोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Muzaffarnagar News: किसान की मौत से परिजनों में गम का माहौल, गांव में छाया शोक
Thu, 12 Dec 2024 11:50 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 12 Dec 2024 11:50 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
बाबरी। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे पर भाजू कट की मांग को लेकर चल रहे धरने पर किसान धीरेंद्र बालियान की आकस्मिक मौत से परिजनों पर गम का पहाड़ टूट गया। किसान की मौत से पत्नी, बेटी व अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा, वहीं गांव में शोक छाया रहा। मृतक तीन भाइयों में सबसे छोटा था। 12 बीघा कृषि भूमि से वह परिवार का गुजर बसर कर रहा था।
मृतक धीरेंद्र का सबसे बड़ा भाई जोगेंद्र प्राइवेट बस चलाता है जबकि उससे छोटा भाई जितेंद्र सीआरपीएफ से रिटायर्ड है और गांव में रहता है। जितेंद्र ने बताया कि धीरेंद्र सबसे छोटा भाई था। जितेंद्र ने बताया कि जब उसका भाई घर से गया था तो वह ठीक था, लेकिन रात को अचानक उनकी तबीयत खराब हुई। उनकी मौत से परिजनों को गहरा सदमा लगा। पत्नी पूनम और पुत्री नैन्सी और परिवार का रो-रोकर हाल बेहाल रहा। जितेंद्र ने बताया कि मृतक की पत्नी के नाम पर 12 बीघा कृषि भूमि है। खेतीबाड़ी कर धीरेंद्र अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। ग्रामीणों का रात तक उनके घर पर पहुंचकर पीड़ित परिजनों को शोक संवेदना व्यक्त कर ढांढस बंधाते रहे।
मृतक धीरेंद्र का सबसे बड़ा भाई जोगेंद्र प्राइवेट बस चलाता है जबकि उससे छोटा भाई जितेंद्र सीआरपीएफ से रिटायर्ड है और गांव में रहता है। जितेंद्र ने बताया कि धीरेंद्र सबसे छोटा भाई था। जितेंद्र ने बताया कि जब उसका भाई घर से गया था तो वह ठीक था, लेकिन रात को अचानक उनकी तबीयत खराब हुई। उनकी मौत से परिजनों को गहरा सदमा लगा। पत्नी पूनम और पुत्री नैन्सी और परिवार का रो-रोकर हाल बेहाल रहा। जितेंद्र ने बताया कि मृतक की पत्नी के नाम पर 12 बीघा कृषि भूमि है। खेतीबाड़ी कर धीरेंद्र अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। ग्रामीणों का रात तक उनके घर पर पहुंचकर पीड़ित परिजनों को शोक संवेदना व्यक्त कर ढांढस बंधाते रहे।
विज्ञापन