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बेगुनाहों के साथ किया गया बदमाशों सा सलूक

Thu, 19 Mar 2020 12:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 19 Mar 2020 12:30 AM IST
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The treatment of miscreants done with innocents
पिनना निवासी पीड़ित नैन सिंह, जिसे पुलिस ने फर्जी मामले में जेल भेजा था। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
बेकसूरों के साथ किया गया बदमाशों सा सलूक
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मुजफ्फरनगर। गांव पीनना निवासी वृद्ध नैनसिंह और उनके बेटे सचिन को बेकसूर होते हुए भी आठ दिन जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ा। जेल से रिहा होने के बाद पीड़ित वृद्ध व्यथा बताते हुए फफक कर रो पड़ा। बोला, गिरफ्तारी की वजह पूछने पर पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदमाशों सा सलूक किया।
शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव पीनना निवासी अनुसूचित जाति के वृद्ध नैनसिंह लघु किसान है, जिसके नाम 22 बीघा जमीन है। परिवार में पत्नी प्रेमवती और दो बेटे सचिन और रवि हैं। बेकसूर होने के बावजूद बेटे सचिन के साथ आठ दिन जेल में रहने वाले वृद्ध नैनसिंह की आंखों से आंसू छलक पड़े। वृद्ध का कहना है कि सात मार्च की शाम वे दोनों बेटों के साथ घर में मौजूद थे। उसी समय बुढ़ाना रोड चौकी प्रभारी एसआई सुरेश कुमार पुलिस जीप में चार-पांच पुलिसकर्मियों के साथ उनके घर पहुंचे। घर जाते ही वृद्ध नैनसिंह और सचिन को पकड़कर बदमाशों की तरह सलूक करते हुए जबरन जीप में बैठा लिया। पिता-पुत्र ने इस व्यवहार की वजह पूछी तो हाथापाई की गई। इसके बाद दोनों को कोतवाली लाकर हवालात में बंद कर दिया। गिरफ्तारी की वजह पूछने पर कोतवाली में भी गाली-गलौज कर जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया। रात भर हवालात में बैठाने के बाद रविवार सुबह जज के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पीड़ित वृद्ध ने मामले की शिकायत आला अफसरों के साथ ही हाईकोर्ट में भी करने की बात कही।
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- कैसे हुए रिहा, नहीं है जानकारी
फर्जी एनबीडब्ल्यू के आधार पर जेल भेजे गए वृद्ध नैनसिंह का कहना है कि उन्हें जेल से किसने और कैसे रिहा कराया, जानकारी नहीं है। उन्हें तो 14 मार्च को जेल अधीक्षक एके सक्सेना ने अपने दफ्तर में बुलाकर रिहाई का परवाना आने की जानकारी दी, जिसके बाद शाम के समय जेल से रिहा कर दिया गया।
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- किस स्तर पर हुई चूक, पता लगाना चुनौती
मुजफ्फरनगर। वृद्ध नैनसिंह व बेटे सचिन की गिरफ्तारी के पीछे पुलिस एनबीडब्ल्यू जारी होना बता रही है, लेकिन पॉक्सो कोर्ट के लिपिक ने लिखित आख्या देकर वारंट जारी नहीं करना बताया है। बड़ा सवाल है कि किसने इतना बड़ा फर्जीवाड़ा किया और क्यों ? जब पॉक्सो कोर्ट से वारंट जारी नहीं हुआ तो थाना पुलिस तक फर्जी वारंट किसने पहुंचाया और आखिर कैसे थाना पुलिस फर्जी वारंट को पहचानने में गच्चा खा गई ? बेकसूर पिता-पुत्र को आठ दिन तक जेल में पहुंचाने वाली चूक किस स्तर पर और कैसे हुई, इसकी साजिश किसने रची, इसका खुलासा करना थाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती रहेगा।

वर्जन
एसएसपी अभिषेक यादव का कहना है कि कोर्ट से प्रतिदिन सैकड़ों वारंट जारी होते हैं। हर केस में वारंट की जांच करना या कोर्ट से उसकी जानकारी हासिल करना संभव नहीं है। जिसने भी इस धोखाधड़ी और साजिश को अंजाम दिया है, खुलासा कर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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