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कारी उस्मान के निधन से मंसूरपुर में शोक की लहर
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कारी उस्मान के निधन से मंसूरपुर में शोक की लहर
मंसूरपुर (मुजफ्फरनगर)। दारुल उलूम देवबंद के कार्यवाहक मोहतमिम एवं जमीयत उलेमा हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना कारी उस्मान मंसूरपुरी के इंतकाल की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव मंसूरपुर में पहुंची तो लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।
मौलाना कारी उस्मान के भांजे मंसूरपुर निवासी मोहम्मद नबील ने बताया कि उनके मामा कारी उस्मान का जन्म 12 अगस्त 1944 को मंसूरपुर में हुआ था। नाना मौहम्मदी ईशा अपने तीन पुत्रों को तालीम दिलाने के लिए देवबंद चले गए थे, वहीं पर सभी की तालीम पूरी हुई। तालीम पूरी करने के बाद उनके मामा ने मौलाना कारी उस्मान को बिहार तथा अमरोहा के मदरसे में पढ़ाया। इसके बाद वे देवबंद दारुल उलूम में आ गए।
उनका एक बेटा अफगान अमरोहा में तथा दूसरा बेटा सलमान मुरादाबाद के मदरसे में पढ़ाता है। उनकी एक बहन की शादी देहरादून तथा एक बहन की शादी मंसूरपुर में ही हुई थी। उनका एक भांजा मोहम्मद फहीम पिछली योजना में गांव का प्रधान चुना गया था।
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उनके मामा मौलाना कारी उस्मान को अरबी उर्दू, फारसी अंग्रेज हिंदी सहित कई भाषाओं में महारथ हासिल थी। धार्मिक तथा समाज सेवा के कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। मंसूरपुर में वे लगातार अपने भतीजे, बहन तथा भांजों से मिलने के लिए आते रहते थे। उनका परिवार देवबंद में ही रहता है। मोहम्मद नबील ने बताया कि उनकी मां राजदा खातून तथा परिवार के अन्य लोग देवबंद के लिए रवाना हो गए हैं।
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मंसूरपुर (मुजफ्फरनगर)। दारुल उलूम देवबंद के कार्यवाहक मोहतमिम एवं जमीयत उलेमा हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना कारी उस्मान मंसूरपुरी के इंतकाल की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव मंसूरपुर में पहुंची तो लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।
मौलाना कारी उस्मान के भांजे मंसूरपुर निवासी मोहम्मद नबील ने बताया कि उनके मामा कारी उस्मान का जन्म 12 अगस्त 1944 को मंसूरपुर में हुआ था। नाना मौहम्मदी ईशा अपने तीन पुत्रों को तालीम दिलाने के लिए देवबंद चले गए थे, वहीं पर सभी की तालीम पूरी हुई। तालीम पूरी करने के बाद उनके मामा ने मौलाना कारी उस्मान को बिहार तथा अमरोहा के मदरसे में पढ़ाया। इसके बाद वे देवबंद दारुल उलूम में आ गए।
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उनका एक बेटा अफगान अमरोहा में तथा दूसरा बेटा सलमान मुरादाबाद के मदरसे में पढ़ाता है। उनकी एक बहन की शादी देहरादून तथा एक बहन की शादी मंसूरपुर में ही हुई थी। उनका एक भांजा मोहम्मद फहीम पिछली योजना में गांव का प्रधान चुना गया था।
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उनके मामा मौलाना कारी उस्मान को अरबी उर्दू, फारसी अंग्रेज हिंदी सहित कई भाषाओं में महारथ हासिल थी। धार्मिक तथा समाज सेवा के कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। मंसूरपुर में वे लगातार अपने भतीजे, बहन तथा भांजों से मिलने के लिए आते रहते थे। उनका परिवार देवबंद में ही रहता है। मोहम्मद नबील ने बताया कि उनकी मां राजदा खातून तथा परिवार के अन्य लोग देवबंद के लिए रवाना हो गए हैं।